देखिए भावविभोर करने वाली ये भंगिमाएँ

नृत्य केवल खुशियों के मनोभावनाओं को व्यक्त करने का ही माध्यम नहीं है, बल्कि यह मन के द्वंद्व को भी दिखाता है.

भरतनाट्यम
इमेज कैप्शन, भरत के नाट्यशास्त्र के सिद्धांत पर आधारित प्रसिद्ध नृत्य शैली भरतनाट्यम प्राचीन नृत्य शैली है. बाद में कलाकारों ने इसे अपने-अपने ढंग से विकसित किया है. मशहूर भरतनाट्यम नृत्यांगना रमा वैद्यनाथन और दक्षिणा वैद्यनाथन के नृत्य में इसे बखूबी देखा जा सकता है. नृत्य में ‘जीवन के द्वैत’ को दिखाया गया है.
भरतनाट्यम
इमेज कैप्शन, द्वैत, यानी एक ही वक़्त में इंसान दो अलग-अलग भावों से जूझ रहा होता है. रमा वैद्यनाथन और दक्षिणा वैद्यनाथन ने मन की इन्हीं दोनों दशाओं को व्यक्त किया है.
सिक्के के दो पहलू होते हैं, दो अवधारणाएं होती हैं. मन इस के बीच खड़ा दोनों में से किसी एक को चुन लेने की चाह में कभी इधर कभी उधर देखता है.
इमेज कैप्शन, सिक्के के दो पहलू होते हैं, दो अवधारणाएं होती हैं. मन इस के बीच खड़ा दोनों में से किसी एक को चुन लेने की चाह में कभी इधर कभी उधर देखता है.
भरतनाट्यम
इमेज कैप्शन, कृष्ण संसार में भी हैं और संसार से परे भी. उन्हें हम एक चरवाहे के रूप में भी देखते हैं और परम पिता परमेश्वर के रूप में भी पाते हैं.
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इमेज कैप्शन, तंजौर वरणम् (चार लोगों द्वारा मिलकर लिखी गई एक काव्य श्रृंखला) में तन-मन से भगवान त्याग राज के प्रेम में पड़ी नायिका उनके प्रसिद्ध मंदिर तिरुवरूर में उनकी आराधना रागम् भैरवी और तालम रूपकम् से करती है.
भरतनाट्यम
इमेज कैप्शन, इस नृत्य श्रृंखला में रमा वैद्यनाथन और दक्षिणा वैद्यनाथन ने माँ और बेटी के संबंध को भी बेहद सुंदर ढंग से व्यक्त किया है.
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इमेज कैप्शन, द्वैत को वेदांत के तीन प्रमुख दर्शनों में एक माना जाता है, जिसका संबंध ईश्वर, प्रकृति तथा जीवात्मा से है.
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इमेज कैप्शन, वर्तमान को जीते हुए माँ, भविष्य की ओर नई आशा से देख रही अपनी बेटी के लिए एक उन्मुक्त संसार चाहती है, लेकिन वह इस द्वंद्व से भी जूझती है कि क्या यह संसार उसके लिए सुरक्षित है.
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इमेज कैप्शन, इस नृत्य में शक्ति यानी नारी मन के कोमल भाव भी बेहद सुंदर ढंग से अभिव्यक्त होते हैं.