देश में लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव जारी है, लेकिन इसके बीच असम तैयारी कर रहा है
इमेज कैप्शन, भारत में चुनावी माहौल के बीच असम में 14 अप्रैल से बिहू के आयोजन शुरू हो जाएंगे और ये त्योहार 16 अप्रैल तक चलेगा लेकिन लोगों का मानना है कि आम चुनावों की वजह से इस बार तैयारियों में दिक्कत हो रही है. इस तस्वीर में बोहाग बिहू के अवसर पर मछलीमारी प्रतियोगिता में भाग लेते लोग देखे जा सकते हैं.
इमेज कैप्शन, बिहू की शुरुआत गाय बिहू से होती है. इस दिन लोग अपनी गायों को नदी में ले जाकर नहलाते हैं और इस दौरान गायों को रात में भिगोकर रखी गई कच्ची हल्दी लगाई जाती है.
इमेज कैप्शन, असम की संस्कृति में पान, नारियल और सुपारी का काफी महत्व है. बिहू से पहले राज्य में पान की दुकानों पर काफी ख़रीदारी की जाती है.
इमेज कैप्शन, असम में बिहू साल में तीन बार मनाया जाता है और ये त्योहार फसल की कटाई या बुआई से जुड़ा हुआ है. इस दौरान अगर जेब में पैसे हों तो लोग जमकर खरीदारी करना पसंद करते हैं.
इमेज कैप्शन, बिहू का त्यौहार मनाने के दौरान असम में महिलाएं एक खास तरह के परिधान मेखला और चादर को ओढ़ती हैं और इनके रंग और डिजाइन इतने आकर्षक होते हैं कि भारत के किसी भी कोने की महिला बिहू मनाने की ज़िद कर बैठे तो आश्चर्य नहीं.
इमेज कैप्शन, आम चुनावों के चलते लोग बिहू की तैयारी ठीक से नहीं कर पा रहे हैं और पूरा प्रशासनिक अमला चुनाव की तैयारी में ही जुटा है. इसके चलते लोगों में नाराजगी भी है.
इमेज कैप्शन, शिवसागर जिले में बिहू से पहले एक आदिवासी महिला एक खास पकवान 'साग-पानी' तैयार कर रही हैं. चावल से बनने वाले 'साग-पानी' की मिठास पूरे असम के आदिवासी समुदाय में लोकप्रिय है.
इमेज कैप्शन, लाचित बोर्फुकान असम के लोकप्रिय जननायक हैं और किसी भी त्यौहार या बड़े आयोजन के मौके पर उनकी तस्वीरों की बिक्री बढ़ जाती है.