जहाँ थिएटर ही जिंदगी है...

वे लोग अपना खाना-पीना, सोना यहाँ तक कि बच्चों की परवरिश भी थिएटर के मंच के निचले हिस्से में मौजूद जगह पर करते हैं. देखिए थिएटर कलाकारों की जिंदगी.

थाईलैंड में घुमक्कड़ नाटक परंपरा
इमेज कैप्शन, वे लोग अपना खाना-पीना, सोना यहाँ तक कि बच्चों की परवरिश भी थिएटर के मंच के निचले हिस्से में मौजूद जगह पर करते हैं और जब शाम ढलती है तो थाईलैंड के घुमक्कड़ नाटक का एक नया रंग रूप देखने को मिलता है. रंग-बिरंगे कपड़े, रंगीन चेहरे और चीनी नाट्य शैली, ये सब इसकी पहचान हैं.
थाईलैंड में घुमक्कड़ नाटक परंपरा
इमेज कैप्शन, इन घूमंतू कलाकारों का जिंदगी जीने का यह तौर तरीका पीढ़ियों से चला आ रहा है. थिएटर के सिलसिले में ये लोग खेल के लिए बने स्टेडियमों से लेकर छोटे छोटे चीनी मंदिरों तक अपना डेरा डालते हैं.
थाईलैंड में घुमक्कड़ नाटक परंपरा
इमेज कैप्शन, लेकिन इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अनिश्चित भविष्य की है. नई पीढ़ी के दर्शक थिएटर के इस शैली के लिए कोई बहुत ज्यादा आकर्षित नहीं हैं. उनका रुझान इंटरनेट की तरफ ज्यादा है.
थाईलैंड में घुमक्कड़ नाटक परंपरा
इमेज कैप्शन, बैंकॉक के एक मंदिर परिसर में अपना शो प्रदर्शित करने के बाद 30 कलाकारों के दल एक युवा सदस्य अन्नूप प्रोमा कहते हैं, "हमने देश के कोने-कोने में अपने शो किए हैं. हम हर जगह पर तीन-चार दिन रुकते हैं और फिर वहाँ से आगे बढ़ जाते हैं."
थाईलैंड में घुमक्कड़ नाटक परंपरा
इमेज कैप्शन, अन्नूप 21 साल के हैं और जब वे 12 साल के थे तो उन्होंने थिएटर की दुनिया में कदम रखा था. वह कहते हैं, "मुझे यात्रा करना अच्छा लगता है, मस्ती करना पसंद है. जहाँ कहीं भी मैं जाता हूँ, मैं नए दोस्तों से मिलता हूँ. यह सारी दुनिया के सामने अपने आप को रखने जैसा होता है."
थाईलैंड में घुमक्कड़ नाटक परंपरा
इमेज कैप्शन, और जब नाटक का शो खत्म हो जाता है, उसके कलाकार अपने अस्थायी बसेरों में आराम करने चले जाते हैं. उनके ये बसेरे ज्यादातर थिएटर के स्टेज के नीचे वाले हिस्से में होते हैं.
थाईलैंड में घुमक्कड़ नाटक परंपरा
इमेज कैप्शन, थाईलैंड में अब ऐसे 20 नाटक दल बचे हैं. इस परंपरा को बचाए रखने की कोशिशें भी की जा रही हैं. फेसबुक और सोशल मीडिया के मंचों पर इनके नाटकों की तस्वीरें जारी की जाती हैं ताकि युवा पीढ़ी इनके बारे में जान सकें.