सुलगते ढेर पर बसी लाखों जिंदगियां

झरिया अपनी खनिज संपदा के कारण ही अब तक अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराता आया है लेकिन अब यही कोयला यहां के लोगों के जीवन के लिए श्राप बन गया है.

झरिया आग
इमेज कैप्शन, झरिया के जिन इलाकों में ज़मीन के नीचे आग लगी है, उनमें बोकापहाड़ी, कुजामा, केंदुआ-करकेंद, कतरास, लोयाबाद, सुदामडीह और कुस्तौर कोलियरी शामिल हैं.
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इमेज कैप्शन, झरिया के 8.9 वर्ग किलोमीटर इलाके में आग लगी हुई है उसके नीचे अब भी हज़ारों टन कोयला है जिसे केंद्र सरकार जल्द से जल्द निकाल लेना चाहती है ताकि देश की राष्ट्रीय संपदा जल कर खाक ना हो जाए.
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इमेज कैप्शन, आग प्रभावित इन इलाकों में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है इसके बावजूद इनके आस-पास बसी बस्तियों में रहने वाले लोग कहीं और जाने को तैयार नहीं है.
झरिया आग
इमेज कैप्शन, ये आग इतनी भयावह है कि कभी-कभी पता नहीं चलता कि कहां जमीन सुरक्षित है और कहां खतरनाक. शाम ढलते ही अक्सर यहां घरों के आस-पास जमे कोयले के ढेर में आग की लपटें निकलतीं दिखाई पड़ती है.
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इमेज कैप्शन, झरिया शहर के बीचों बीच बसी बस्ती बोकापहाड़ी का एक दृश्य जहां ओपन-कास्ट माईनिंग जारी है. जिस जगह पर खनन चल रहा है उससे बमुश्किल 100 मीटर की दूरी पर हज़ारों की आबादी बसी है.
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इमेज कैप्शन, खदानों में खनन के लिए जाते भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के कर्मचारी. इन लोगों का ये काम काफी चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा होता है, जहां कभी भी कोई हादसा घट सकता है.
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इमेज कैप्शन, बोकापहाड़ी की उजड़ी बस्तियों में अब भी कई परिवार बसे हुए है. इनमें से कुछ लोगों को विस्थापितों के लिए बनाई गई बस्ती बेलगढ़िया में या तो मकान नहीं मिला या रोजी-रोटी का साधन नहीं मिला है.
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इमेज कैप्शन, ये दृश्य चारों तरफ आग से घिरे कुजामा इलाके का है. यहां रहने वाले कई परिवार तो ऐसे हैं जो यहां कोयले के ढेर में लगी आग पर खाना भी पका लेते हैं.
झरिया आग
इमेज कैप्शन, ये तस्वीर धनबाद शहर के बाहरी इलाके बेलगढ़िया की है जहां विस्थापितों के लिए कॉलोनी बनाई गई है. ये कॉलोनी शहर से तकरीबन 20 किमी की दूरी पर बसी है और वहां आने-जाने के यातायात के साधन भी नहीं है.
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इमेज कैप्शन, झरिया शहर की राजबाड़ी रोड पर यहां के राजा का 125 साल पुराना महल. ऐसा माना जाता है कि यहां के राजा ने ही झरिया शहर को बसाया था लेकिन आर्थिक तंगी और आग ने 125 कमरे वाले इस राजमहल के वैभव को भी खत्म कर दिया है और अब ये महल भी ज़मींदोज़ होने को है.