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कोरोना वायरस: हीरो रहे डॉक्टरों और नर्सों को इतनी जल्दी भूल गए लोग!
- Author, सोफ़िया बेतिज़ा
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
इटली में कोरोना वायरस के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और नर्सों की नायकों की तरह से तारीफ़ हुई है. लेकिन, अब इन्हें दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं.
इटली का लोम्बार्डी दुनिया में कोरोना से सबसे बुरी तरह से प्रभावित इलाक़ा रहा है और यहाँ मेडिकल स्टाफ़ ने पूरे जी-जान से इस शहर को बचाने की कोशिश की है.
पाओलो मिरांडा क्रीमोना में एक इंटेंसिव केयर नर्स हैं. वह कहते हैं, "मैं अब ज़्यादा चिड़चिड़ा रहने लगा हूँ. मैं जल्दी ही ग़ुस्सा हो जाता हूं और मैं लड़ने लगता हूँ."
कुछ हफ्ते पहले पाओलो ने आईसीयू के अंदर के परेशान करने वाले हालात बयां करने का फ़ैसला किया.
उन्होंने वहाँ के फोटोग्राफ्स लेना शुरू कर दिया. वह कहते हैं, "जो कुछ भी हमारे साथ हुआ है वह मैं कभी भी भूलना नहीं चाहता हूं. मैं जल्द ही इतिहास बन जाऊँगा."
अपने फोटोज़ के ज़रिए वह यह दिखाना चाहते हैं कि ऐसे वक़्त में जबकि इटली में आम जीवन सामान्य स्थिति की तरफ बढ़ रहा है तब उनके सहयोगी दूसरे चरण से कैसे गुज़र रहे हैं.
वह कहते हैं, "हालाँकि, आपात स्थितियों में अब कमी आ रही है, लेकिन हम अभी भी अंधकार से घिरे हुए हैं. ऐसा लगता है कि हमारे पूरे जिस्म में घाव हो गए हैं. हम वह सब अपने अंदर लिए हुए हैं जो कुछ भी हमने देखा है."
बुरे सपने
ऐसे ही हालात का ज़िक्र मोनिका मैरिओटी भी करती हैं. वह भी इंटेंसिव केयर में नर्स हैं.
वह कहती हैं, "संकट के दौर के मुक़ाबले अब चीज़ें कहीं ज़्यादा मुश्किल भरी हैं. पहले हमें पता था कि हम एक दुश्मन से लड़ रहे हैं. अब चूंकि मेरे पास सोचने का वक़्त है, ऐसे में मैं खोया हुआ और लक्ष्यहीन महसूस कर रही हूं."
कोरोना वायरस के संकट के दौरान इन पर काम का बोझ था और इन्हें कुछ भी सोच पाने का बमुश्किल वक़्त मिल पाता था. गुज़रे कुछ हफ्तों में इकट्ठा हुआ पूरा तनाव अब सतह पर आने लगा है.
वह कहती हैं, "मुझे रात-रात भर नींद नहीं आती है. मैं पूरी रात में 10 दफ़ा जाग जाती हूं. मेरी धड़कन बढ़ी हुई होती है और सांसें अटकने लगती हैं."
उनकी सहयोगी एलिजा पिज़ेरा कहती हैं कि वह इमर्जेंसी में ख़ुद को काफ़ी मज़बूत पाती थीं, लेकिन अब उन्हें ऐसा लगता है कि जैसे वह थक कर चूर हो गई हैं.
वह घर पर खाना बनाने या घर की देखभाल करने लायक़ ख़ुद में ऊर्जा नहीं पाती हैं. जिस दिन की उनकी छुट्टी होती है उस दिन वह लगभग सारा दिन काउच पर बैठे-बैठे काट देती हैं.
नई हक़ीक़त से सामना
मार्टिना बेनेडेटी टस्कानी में आईसीयू की नर्स थीं. वह अभी भी अपने परिवार और दोस्तों से नहीं मिल रही हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे उन लोगों को संक्रमित कर देंगी.
वह कहती हैं, "मैं अपने पति तक से दूरी बनाए हुए हूँ. हम अलग-अलग कमरों में सोते हैं."
यहाँ तक कि सामान्य लगने वाली चीज़ें भी अजीब लगने लगी हैं. वह कहती हैं, "जब भी मैं वॉक पर जाती हूँ, मुझे बेचैनी होने लगती है. मैं तुरंत घर वापस आ जाती हूँ."
अब उन्हें कुछ ख़ाली वक़्त मिल रहा है तो उन्हें ख़ुद पर संदेह रहता है.
वह कहती हैं, "मुझे नहीं पता कि क्या मैं आगे भी नर्स बनी रहना चाहती हूँ या नहीं. पिछले छह साल में मैंने जितने लोग मरते नहीं देखे उससे कहीं ज़्यादा लोग मैं गुज़रे दो हफ़्तों में अपने सामने मरते देख चुकी हूँ."
इटली के सबसे बुरी तरह से प्रभावित इलाक़ों में कोविड-19 से लड़ने वाले क़रीब 70 फ़ीसदी हेल्थ वर्कर्स ख़ुद को बुरी तरह से थका हुआ पा रहे हैं. एक हालिया स्टडी में इस बात का पता चला है.
इस स्टडी की लेखिका सेरेना बारेलो कहती हैं, "वास्तव में डॉक्टरों और नर्सों के लिए यह सबसे मुश्किल समय है."
जब हम एक संकट से लड़ते हैं तो हमारे शरीर ऐसे हॉर्मोन निकालते हैं जिनसे हमें तनाव से निबटने में मदद मिलती है.
डॉक्टर बारेलो कहती हैं, "लेकिन, जब आपको गुज़रे वक़्त के बारे में सोचने का समय मिलता है और समाज आगे बढ़ने लगता है तो आपको सब कुछ बिखरता हुआ महसूस होता है और आप पहले के मुक़ाबले कहीं अधिक थका हुआ और तनाव में पाते हैं."
उन्हें चिंता है कि महामारी के गुज़रने के काफ़ी बाद तक भी कई डॉक्टर और नर्सें पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के लक्षणों का शिकार बने रहेंगे.
यह एक ऐसी अवस्था होती है जिसमें किसी ट्रॉमा के अनुभव से किसी शख्स की ज़िंदगी महीनों तक और कई दफा सालों तक प्रभावित रहती है.
हेल्थ वर्कर्स के लिए, यह उनकी जज़्बे और फोकस के साथ काम करने की नौकरी की ज़रूरतों पर बुरा असर डाल सकता है.
हीरो जिन्हें भुला दिया गया
पूरी दुनिया में फ्रंटलाइन डॉक्टरों और नर्सों की नायकों के तौर पर तारीफ़ हो रही है. लेकिन, इटली में यह प्यार अब ख़त्म होने लगा है.
मोनिका बताती हैं, "जब उन्हें लग रहा था कि वे मरने वाले हैं, तब हम अचानक से हीरो बन गए थे, लेकिन अब हमें भुलाया जा चुका है."
वह कहती हैं, "एक बार फिर से हमें लोगों की साफ़-सफ़ाई करने वाले आलसी और बेकार लोगों के तौर पर देखा जाने लगेगा."
तूरीन में हाल में ही नर्सों ने आपस में ख़ुद को बाँध लिया और कूड़ा भरने के बैग पहन लिए.
इसके ज़रिए उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि पीपीई किट की कमी के चलते उन्हें ख़ुद को कितना बदलना पड़ा था. इन नर्सों को अपने काम की पहचान के लिए विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा था.
एक मेगाफोन पर एक नर्स ने चिल्लाकर कहा था, "मार्च में हम सब हीरो थे, अब हमें इतनी जल्दी भुला दिया गया है."
उन्हें उनके काम के लिए बोनस दिए जाने का वादा किया गया था जो इन्हें अभी तक नहीं मिला है.
बचने का कोई रास्ता नहीं
इटली में कोविड-19 से कम से कम 163 डॉक्टर और 40 नर्सों को अपनी जान गँवानी पड़ी है. इनमें से चार ने तो ख़ुद ही अपनी जान ले ली थी.
इसके बावजूद कई हेल्थ वर्कर्स को लगता है कि जैसे यह महामारी कभी आई ही नहीं थी. केयर होम्स में कोविड-19 के मरीज़ों को देखने वाली डॉक्टर एलिजा नैनिनो कहती हैं, "मेरे अंदर ग़ुस्सा भर गया है."
जबसे लॉकडाउन हटा है, वह लगातार लोगों को बिना फेस मास्क लगाए और सामाजिक दूरी की उपेक्षा करते हुए लोगों के साथ खान-पान करते हुए देख रही हैं.
वह कहती हैं, "मैं ऐसे लोगों के पास जाना चाहती हूँ और उन पर ज़ोर से चिल्लाना चाहती हूँ. मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि वे हर किसी को ख़तरे में डाल रहे हैं."
वह कहती हैं, "यह मेरे और मेरे सहयोगियों के लिए बेहद असम्मानजनक है."
इस बात पर सभी हेल्थ वर्कर्स सहमत हैं कि आम लोगों के समर्थन के साथ ही वे इस संकट से बाहर निकल पाए हैं.
पाओलो कहते हैं, "मैं हीरो नहीं हूं, लेकिन यह चीज़ मुझे अपने ख़ास होने का अहसास कराती है. "
डॉक्टर बारेलो की स्टडी में कहा गया है कि पीटीएसडी से जूझ रहे हेल्थ वर्कर्स की मदद के लिए आम लोगों की ओर से उनके काम को मान्यता दिया जाना बेहद ज़रूरी है.
वह कहती हैं, "हम सभी पर एक अहम ज़िम्मेदारी इस समय है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम यह न भूलें कि डॉक्टरों और नर्सों ने हमारे के लिए कितना कुछ किया है."
पाओलो कहते हैं, "मैं ख़ुद को एक ऐसे सैनिक की तरह से पाता हूँ, जो युद्ध से लौटा है. निश्चित तौर पर मुझे सड़कों पर मरे हुए लोग और हथियार नहीं दिखाई देते, लेकिन कई मायनों में मुझे लगता है कि मैं खाइयों में था."
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