दफ़्तर में सोएं लेकिन ज़रा तरीक़े से

    • Author, लॉरेन्स नाइट
    • पदनाम, बिज़नेस रिपोर्टर, बीबीसी न्यूज़

दफ़्तर में अपना बिस्तर हो और उस पर आप बेधड़क सो सकें, इसके लिए बड़ा साहसी या कहें दुस्साहसी होना ज़रूरी है.

1990 के दशक में भीम सुवास्तोयो समाचार एजेंसी एएफ़पी के लिए इंडोनेशिया में जकार्ता ब्यूरो में काम करते थे.

और वो दफ़्तर में अपनी मेज़ के पीछे एक अलमारी के नीचे सोने के लिए बदनाम थे.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के बिज़नेस डेली कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ''जब भी कोई हांगकांग से जकार्ता के दफ़्तर आता तो यही कहता कि अपना बिस्तर दिखाओ. मेरी ऐसी छवि थी!''

भीम बताते हैं कि 1997 में जब एशिया में नक़दी संकट अपने चरम पर था तब इंडोनेशिया के रुपए की कीमत आधी रह गई थी और सुहार्तो सरकार गिर गई थी.

ये वो समय था जब दफ़्तर में भीम का बिस्तर सबसे ज़्यादा काम आता था.

वो हर समय ब्रेकिंग न्यूज़ कवर करने में व्यस्त रहते थे. उस समय इंडोनेशिया में मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल भी सीमित था.

इसलिए अपने दफ़्तर में लगातार बजने वाले फ़ोन कॉल्स के बीच वो नींद पूरी कर लेते थे.

लेकिन इस दौर के ख़त्म होने के बाद भी उन्हें लगा कि दफ़्तर में आधे घंटे की झपकी बड़े काम की होती है.

वो कहते हैं कि इससे दिनभर के लिए ज़्यादा ऊर्जा मिलती है. ये सुबह की तरह ही दिन की शुरुआत करने जैसा है.

भीम अकेले नहीं है. दक्षिण यूरोप में दोपहर की झपकी को 'सिएस्टा' कहा जाता है जिसके लिए सरकारी अनुमति होती है. चीन में भी कुछ-कुछ यही कहानी है.

जापान में बैठक में ऊंघने को आपके मेहनती होने की निशानी मानी जाती है.

कहा जाता है कि कई दफ़्तरों में बॉस ऊंघने का नाटक करते हैं ताकि वो अपने सहयोगियों की बातें सुन सकें और कई कर्मचारी अपने बॉस का मज़ाक बनाने के लिए ऐसे वक्त में फ़र्ज़ी बातें भी करते हैं.

हमारा शरीर एक दैनिक क्रम यानी बॉडी क्लॉक के मुताबिक काम करता हैं. हमारे हॉरमोन्स हमारे बॉडी क्लॉक को चलाते हैं.

नींद के पीछे जिस हॉर्मोन का हाथ है वो मेलाटॉनिन है. जब मेलाटॉनिन का स्तर बढ़ता है तो आपको नींद आती है.

लेकिन जब सूरज की रोशनी आप पर पड़ती है तो मेलाटॉनिन का स्तर गिरता है और नींद गायब होने लगती है.

अमरीका की नेशनल स्लीप फ़ाउन्डेशन की नैटेली दाउतोविच कहती हैं कि नींद दिमाग की सफ़ाई करती है, मेटाबॉलिक वेस्ट और टॉक्सिन्स को मस्तिष्क से बाहर करना नींद का काम है.

यही वजह है कि हम सभी को हर रात सात से नौ घंटे नियमित रूप से सोना चाहिए.

लेकिन क्या हम हर रात सात से नौ घंटे की नींद नहीं लेते हैं?

दूसरे शब्दों में दफ़्तर में तो आपके सिवा हर कोई समझ सकेगा कि आप थके हुए हैं.

मोबइल फ़ोन भी नींद की राह में रोड़ा बन गए हैं.

दाउतोविच कहती हैं, ''मैं ट्विटर फ़ीड पढ़ने के चक्कर में शाम को एक या दो घंटे बिस्तर में बैठे बैठे बर्बाद करती हूं.'' वो कहती हैं कि ये वाक़ई एक बुरी लत है.

फ़ोन की नीली रोशनी एक औसत बल्ब के मुकाबले ज़्यादा नीली होती है और मोबाइल फ़ोन की 'डेलाइट' से मेलाटॉनिन स्तर घट जाता है जिससे आप जागते रह जाते हैं.

हमारा दिमाग मोबाइल फ़ोन को हमारे बेडरूम से जोड़ता है, जिसके पीछे-पीछे दफ़्तर और सामाजिक जीवन की बातें भी बेडरूम में प्रवेश करने लगती हैं.

जिससे स्ट्रेस के लिए ज़िम्मेदार हॉर्मोन कॉर्टिसॉल भी ऐसी बायोकेमिकल स्थिति पैदा करते हैं जो नींद की दुश्मन बन जाती हैं.

तो काम पर सोने के लिए क्या करें?

खुद को अनुशासित करना एक उपाय है जैसे सोने के समय पर ख़ुद को फ़ोन से दूर रखना.

  • अपने बॉस की इजाज़त ले लें.
  • कोई शांत और अलग-थलग जगह ढूंढें ( पार्क की बेंच पर सोएंगे तो पुलिस आपको जगा सकती है.)
  • 10 मिनट की झपकी लेने से आप गहरी नींद के बाद होने वाले उनींदेपन से बच सकते हैं. सोने के बाद 10 मिनट अपने आपको तरोताज़ा महसूस करने के लिए भी दीं.
  • अगर ये समय आपके लिए कम है तो आप अपने लिए 90 मिनट का समय निकाल सकते हैं.

लेकिन क्या रात की अच्छी नींद ही आपको दफ़्तर में तरोताज़ा दिमाग के साथ काम करने में आगे रखने के लिए काफ़ी है.

ये समझने के लिए मैं एक दफ़्तर में गई जहां सचेत रहना ज़िंदगी और मौत का सवाल है.

ये दफ़्तर था ब्रिटेन का नेशनल एयर ट्राफ़िक कंट्रोल सर्विस, नैट्स का. यहां इसी सवाल के जवाब के लिए पूरा एक विभाग है.

नैट्स से जुड़े नील मे कहते हैं, " हम इस बात को बहुत साफ़-साफ़ समझते हैं कि एक कंट्रोलर के सामने तब भी हादसा हो सकता है जब रूट बहुत व्यस्त हो या एकदम शांत."

नैट्स में विमानों को कंट्रोल करने वाले कर्मचारियों को अपने इस काम से होने वाली बोरियत या फिर ओवरलोड के बीच सर्वोत्कृट मानसिक संतुलन बनाया जाता है.

स्वैनविक में नैट्स के कंट्रोल रूम में नील से मेरी मुलाकात हुई थी.

गुफ़ा जैसी ये जगह एयरपोर्ट पर बने एयरक्राफ़्ट हैंगर की याद दिलाती थी, हैंगर में विमान रखे जाते हैं.

दरअसल कर्मचारियों का ध्यान कम से कम बंटे इसलिए ये जगह ऐसी बनाई जाती है.

दिन जैसी नक़ली रोशनी 24 घंटे जलती है और जो शोरगुल आप सुन सकते हैं वो कई सौ कंट्रोलरों की विमान के पायलट से हो रही बातचीत होती है.

ये कंट्रोलर हेडसेट पहने हुए दक्षिणी इंग्लैंड के आसमान में उड़ रहे विमानों के चालकों से संपर्क में रहते हैं.

पूरा स्टाफ़ दो लोगों की टीम में काम करता है, इसका मक़सद एक दूसरे के काम की निगरानी के अलावा आपसी बातचीत है जो उनके दिमाग को सक्रिय बनाए रखती है.

नील बताते हैं कि उन लोगों को हर दो घंटों पर तीस मिनट का ब्रेक लेना होता है जिस दौरान वो ज़िम्मेदारी से मुक्त होते हैं.

इस ब्रेक में ये लोग या तो सो लेते हैं या फिर कैफ़े में जा सकते हैं.

नैट्स नींद को लेकर काफ़ी सक्रियता के साथ काम करता है.

स्वैनविक में रात की ड्यूटी करने वालों के लिए एक कमरा ख़ास तौर पर है जहां दफ़्तर आने के बाद वो दो घंटे सो सकते हैं.

नील ने कहा, " हम चाहते हैं कि वो सुबह पांच से छह के बीच सबसे ज़्यादा सजग रहें जब हीथ्रो में विमान उतरने लगते हैं. "

डॉ. दाउतोविच इस रवैये की तारीफ़ करती हैं.

वो कहती हैं कि हम अब भी नींद को बेहतर नतीजों के लिए सेहत की अच्छी आदत के बजाय आराम-विलास की चीज़ मानते हैं.

यानी दफ़्तर में सो जाने को अनुशासनहीनता नहीं समझा जाना चाहिए?

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