कर्नाटक के कॉर्पोरेशन मंंत्री केएन राजन्ना ने हनीट्रैप मामले को लेकर अपनी शिकायत राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर को सौंप दी.
राजन्ना ने दावा किया था कि उन्हें हनी ट्रैप में फंसाने की कोशिश की गई थी.
गृह मंत्री जी परमेश्वर ने बेंगलुरु में अपने घर पर राजन्ना के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह इस मामले पर कानूनी विशेषज्ञों और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से बात करेंगे. इसके बाद ही यह तय होगा कि जांच किस तरह होगी.
विपक्षी पार्टी बीजेपी इस मामले की सीबीआई जांच या न्यायिक आयोग से जांच कराने की मांग कर रही है.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए परमेश्वर ने कहा, "हम जांच का तरीका खुद तय करेंगे, यह सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका के फैसले पर निर्भर नहीं करेगा."
पिछले हफ्ते राजन्ना ने विधानसभा में सभी को चौंका दिया जब उन्होंने दावा किया कि उन्हें हनी ट्रैप में फंसाने की कोशिश की गई थी. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा सिर्फ उनके साथ नहीं हुआ, बल्कि राज्य और देश के 48 अन्य नेताओं के साथ भी ये करने की कोशिश हुई थी.
उस दिन गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा था कि अगर राजन्ना शिकायत दर्ज कराते हैं, तो वह तुरंत जांच के आदेश देंगे. लेकिन अब वह पहले कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा करने की बात कर रहे हैं.
इसकी वजह यह है कि राजन्ना ने तुमकुरु में पत्रकारों को बताया कि उनके पास अपने दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है.
राजन्ना ने हनी ट्रैप की कोशिश के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी, लेकिन उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले एक महिला, जिसने नीली जींस और नीला टॉप पहना था, उनसे मिलने आई थी. वह अकेले में एक जरूरी बात करना चाहती थी.
जब राजन्ना से पूछा गया कि क्या वह अपनी शिकायत के साथ कोई ठोस सबूत भी दे रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि उनके घर में सीसीटीवी नहीं लगा है, इसलिए कोई ठोस प्रमाण देना मुश्किल होगा.
जब पत्रकारों ने इस मामले की अधिक जानकारी मांगी, तो राजन्ना ने कहा, "जैसे ही एफ़आईआर दर्ज होगी, आपको सारी जानकारी मिल जाएगी. पहले मुझे गृह मंत्री को शिकायत देने दीजिए."
विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने पर हुई आलोचना को लेकर राजन्ना ने कहा, "मुझे यह बात कैबिनेट बैठक में बतानी चाहिए थी, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया. मैंने इसे विधानसभा में इसलिए उठाया क्योंकि (बीजेपी नेता बसनगौड़ा पाटिल यतनाल) ने इसका जिक्र किया और मेरा नाम लिया."
गृह मंत्री परमेश्वर ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई नहीं कर सकते थे, क्योंकि यह मामला विधानसभा में उठाया गया था. ऐसे मामलों में स्पीकर को सुझाव देना होता है कि सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए या नहीं.
गृह मंत्री परमेश्वर ने यह भी कहा कि वह इस आरोप पर टिप्पणी नहीं कर सकते कि हनी ट्रैप का मामला राजनीतिक साजिश है या नहीं.