अब इस लाइव पेज को विराम देने का वक़्त आ गया है. बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा को दीजिए इजाज़त.
कल सुबह एक नए लाइव पेज के साथ हम फिर हाज़िर होंगे.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की वेबसाइट पर लगी कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.
मध्यपूर्व में तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और इसराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार के बीच फ़ोन पर बातचीत हुई है.
चंदन कुमार जजवाड़े, रौनक भैड़ा
अब इस लाइव पेज को विराम देने का वक़्त आ गया है. बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा को दीजिए इजाज़त.
कल सुबह एक नए लाइव पेज के साथ हम फिर हाज़िर होंगे.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की वेबसाइट पर लगी कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.

इमेज स्रोत, Chandradeep Kumar/ The India Today Group via Getty Images
मध्यपूर्व में तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और इसराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार के बीच फ़ोन पर बातचीत हुई है.
इसराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने गुरुवार को एस. जयशंकर से बात करते हुए पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बारे में जानकारी दी.
गिदोन सार ने एक्स पोस्ट में जानकारी दी, "मैंने भारत के विदेश मंत्री को ईरान के 'आतंकी शासन' के ख़िलाफ़ हमारी कार्रवाई की जानकारी दी. मैंने कहा कि यह शासन स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में 'समुद्री आतंकवाद' कर रहा है."
"यह सिर्फ़ अमेरिका या इसराइल का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की व्यवस्था और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली बुनियादी समस्या है. अगर इस गंभीर स्थिति को अभी नहीं रोका गया, तो यह पूरी दुनिया में फैल सकती है."
गिदोन सार यह भी कहा, "मैंने ईरानी शासन की 'दूसरे देशों के खिलाफ आक्रामकता' पर भी बात की, जो मध्य पूर्व, काकेशस और यूरोप तक फैली हुई है."
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी एक्स पोस्ट के ज़रिए बताया कि उनकी इसराइल के विदेश मंत्री से मध्यपूर्व में चल रहे संघर्ष पर बातचीत हुई है.

इमेज स्रोत, Prodip Guha/Getty Images
'सरके चुनर' गाने के लिरिक्स को लेकर हो रहे विवाद के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने फ़िल्म के मेकर्स और अभिनेता-अभिनेत्री को तलब किया है.
राष्ट्रीय महिला आयोग ने बताया कि गाने पर स्वतः संज्ञान लेते हुए उन्होंने अभिनेत्री नोरा फ़तेही, अभिनेता संजय दत्त, लिरिसिस्ट रक़ीब आलम, प्रोड्यूसर वेंकट के. नारायण और डायरेक्टर किरण कुमार को तलब किया है.
आयोग ने कहा, "गाने की सामग्री पहली नज़र में यौन संकेत देने वाली और आपत्तिजनक है. साथ ही भारतीय न्याय संहिता, आईटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करती हुई लगती है. इस मामले को आयोग ने गंभीरता से लिया है."
आयोग ने मेकर्स और अभिनेता-अभिनेत्री को 24 मार्च 2026 को दोपहर 12:30 बजे ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ पेश होने के लिए कहा है. अगर वे पेश नहीं होते हैं तो क़ानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जा सकती है.
गौरतलब है कि 'केडी- द डेविल' फ़िल्म के 'सरके चुनर' गाने के लिरिक्स पर विवाद होने के बाद इस पर प्रतिबंध लगा दिया था. अभिनेत्री नोरा फ़तेही का दावा है कि उनसे गाने को हिन्दी में डब करने की अनुमति नहीं ली गई थी.

इमेज स्रोत, Sunil Ghosh/Hindustan Times via Getty Images
जामा मस्जिद की रुयत-ए-हिलाल कमेटी के मुफ़्ती आदिल ने कहा है कि भारत में शनिवार यानी 21 मार्च को ईद मनाई जाएगी.
मुफ़्ती आदिल ने कहा, "अभी बैठक हुई है और आज भारत में कहीं भी चाँद दिखाई नहीं दिया. इसलिए कल 30वां रोज़ा होगा और परसों ईद मनाई जाएगी."
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना ख़ालिद रशीद फ़रंगी महली ने कहा, "यह बताया जा रहा है कि आज यानी 19 मार्च को लखनऊ या भारत में कहीं भी चाँद दिखाई नहीं दिया. इसलिए कल, 20 मार्च को 30वां रोज़ा रखा जाएगा और 21 मार्च को ईद-उल-फ़ितर मनाई जाएगी."
गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि ईद के मौक़े पर आम लोगों की ज़िंदगी में कोई रुकावट न आए.
लाइव लॉ के मुताबिक़, कोर्ट ने कहा, "पुलिस ऐसी व्यवस्था करे जिससे हर किसी को सुरक्षित माहौल महसूस हो. समाज के किसी भी वर्ग से किसी को भी ऐसा करने की इजाज़त न दी जाए जिससे हालात बिगड़ें."

इमेज स्रोत, ATTA KENARE / AFP via Getty Images
ईरान ने इसराइल को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनके इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर फिर हमला हुआ तो इस बार कोई 'संयम' नहीं रखा जाएगा.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "इसराइल ने हमारे इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर हमला किया, जिसके जवाबी हमले में हमने अपनी ताक़त का सिर्फ़ थोड़ा हिस्सा इस्तेमाल किया. इसे रोकने की वजह सिर्फ़ यह थी कि हमें तनाव कम करने की अपील की गई थी."
उन्होंने चेतावनी देते हुए लिखा, "अगर हमारे इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर फिर हमला हुआ तो कोई 'संयम' नहीं दिखाया जाएगा. इस जंग का अंत तभी होगा जब हमारे नागरिक ठिकानों पर हुए नुक़सान पर भी बात होगी."
दरअसल, ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर हमले के बाद, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़ी तेल और गैस रिफ़ाइनरियों पर हमले किए. सऊदी अरब, क़तर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात इन हमलों से प्रभावित हुए.
भारत ने भी खाड़ी देशों में ऊर्जा ठिकानों पर हो रहे हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एनर्जी इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर हो रहे हमले तुरंत बंद होने चाहिए.

इमेज स्रोत, Ishant Chauhan/Hindustan Times via Getty Images
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने गुरुवार को ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया. इसके लागू होने के बाद अवैध तरीक़े से धर्मांतरण कराने वालों के लिए सख़्त सज़ा मिलेगी, कुछ मामलों में आजीवन कारावास तक का प्रावधान है.
इस क़ानून के तहत सभी अपराध ग़ैर-जमानती होंगे. साथ ही, एक अहम प्रावधान यह है कि धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति पर यह साबित करने की ज़िम्मेदारी होगी कि धर्म परिवर्तन में किसी तरह का दबाव, प्रलोभन या धोखाधड़ी शामिल नहीं थी.
सरकार का कहना है, "विधेयक का उद्देश्य बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी, ग़लत जानकारी या अन्य कपटपूर्ण तरीक़ों से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है."
सरकार के मुताबिक, "यह विधेयक छत्तीसगढ़ में लागू 1968 के क़ानून की जगह लेगा, जिसे राज्य गठन के बाद मध्य प्रदेश से अपनाया गया था. नए क़ानून में धर्मांतरण के दायरे को विस्तार देते हुए डिजिटल माध्यम और आर्थिक प्रलोभनों को भी शामिल किया गया है."
नए क़ानून के तहत धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित व्यक्ति को निर्धारित प्रारूप में सरकारी नुमाइंदे को सूचना देनी होगी. धर्म परिवर्तन कराने वाले पुजारी, मौलवी या अन्य धार्मिक व्यक्ति को भी इसकी जानकारी देनी होगी. इसके बाद प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और 30 दिनों के भीतर उस पर आपत्ति दर्ज कराई जा सकेगी.
विधेयक में सज़ा के प्रावधान भी कड़े किए गए हैं. अवैध धर्मांतरण के मामलों में सात से दस साल तक की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है. महिलाओं, नाबालिगों और अनुसूचित जाति, जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों से जुड़े मामलों में सज़ा 10 से 20 साल तक हो सकती है.
सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सज़ा और भी सख़्त है, जिसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान किया गया है.
सरकार का कहना है कि यह क़ानून जबरन या धोखे से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है. वहीं, विपक्ष का तर्क है कि ऐसे क़ानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धर्म चुनने के अधिकार को प्रभावित कर सकते हैं.

इमेज स्रोत, Sean Gallup/Getty Images
पाकिस्तान ने अमेरिका के उस बयान को ख़ारिज़ किया है, जिसमें पाकिस्तान की 'मिसाइल क्षमता से ख़तरे' की बात कही गई थी.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, "हमारी रणनीतिक क्षमता पूरी तरह रक्षात्मक है, जिसका मक़सद राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करना और दक्षिण एशिया में शांति व स्थिरता बनाए रखना है."
"पाकिस्तान का मिसाइल कार्यक्रम अंतरमहाद्वीपीय दूरी से काफ़ी कम है, भारत के ख़िलाफ़ 'विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध' की नीति पर आधारित है. इसके उलट, भारत की 12,000 किलोमीटर से ज़्यादा दूरी वाली मिसाइल क्षमता का विकास क्षेत्रीय सुरक्षा से आगे जाता है. पड़ोस और बाहर देशों के लिए चिंता का कारण है."

इमेज स्रोत, X/@ForeignOfficePk
बयान में आगे कहा, "पाकिस्तान अमेरिका के साथ सकारात्मक बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है, जो आपसी सम्मान, निष्पक्षता और सही तथ्यों पर आधारित हो."
गौरतलब है कि अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने रूस, चीन, नॉर्थ कोरिया, ईरान और पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम को 'अमेरिका के लिए ख़तरा' बताया था.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त

इमेज स्रोत, SAUL LOEB / AFP via Getty Images
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि दुनिया को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 'धन्यवाद' कहना चाहिए.
यह बात हेगसेथ ने ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच चल रहे युद्ध से जुड़े अपडेट्स देने के लिए बुलाई गई प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कही.
पेंटागन में आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पीट हेगसेथ ने कहा, "दुनिया, मध्य पूर्व, हमारे यूरोप के 'नाख़ुश साथी' और हमारी प्रेस के कुछ लोगों को राष्ट्रपति ट्रंप को 'धन्यवाद' कहना चाहिए."
"अमेरिकी फ़ौज से लड़ने के दौरान ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और वन-वे ड्रोन हमले 90 फ़ीसदी कम हो गए हैं."
उन्होंने कहा "दुनिया में इस समय सबसे ख़राब नौकरी ईरान की सेना में ऊंचे पद पर होना है. यह एक 'अस्थायी नौकरी' है."
हेगसेथ ने बताया, "अमेरिका कम से कम 120 ईरानी नौसैनिक जहाज़ों को नुक़सान पहुंचा चुका है या डुबो चुका है. उनकी पनडुब्बियां ख़त्म हो चुकी हैं."
गौरतलब है कि इससे पहले सऊदी अरब की राजधानी रियाद में 12 अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की एक अहम बैठक हुई. इसमें शामिल हुए देशों ने' ईरान की ओर से खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों' की कड़ी निंदा की.

इमेज स्रोत, Raj K Raj/Hindustan Times via Getty Images
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि ईद के मौक़े पर आम लोगों की ज़िंदगी में कोई रुकावट न आए. यह आदेश उस घटना सेभी जोड़ा गयाजो उत्तम नगर में हुई थी, जहां होली के दौरान झगड़े में 26 साल के युवक की मौत हो गई थी.
लाइव लॉ के मुताबिक़, कोर्ट ने कहा, "पुलिस ऐसी व्यवस्था करे जिससे हर किसी को सुरक्षित माहौल महसूस हो. समाज के किसी भी वर्ग से किसी को भी ऐसा करने की इजाज़त न दी जाए जिससे हालात बिगड़ें."
यह मामला एसोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें राज्य और पुलिस पर बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को रोकने में नाकामी का आरोप लगाया गया था.
चीफ़ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने आदेश में कहा, "ईद खुशी का त्योहार है. यह सबकी ज़िम्मेदारी है कि इस मौके पर किसी भी तरह की घटना से आम लोगों की ज़िंदगी प्रभावित न हो."
"राज्य और ख़ासकर पुलिस की ज़िम्मेदारी बनती है कि हर नागरिक अपने धार्मिक अधिकार और त्योहार की ख़ुशियां शांति से मना सके. याचिका में जताई गई चिंता 4 मार्च की घटना पर आधारित है, इसलिए पुलिस को और ज़्यादा सतर्क रहना होगा."
गौरतलब है कि 4 मार्च को दिल्ली के उत्तम नगर इलाक़े में एक झगड़े के दौरान 26 साल के युवक तरुण की मौत हो गई.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ यह हिंसा तब शुरू हुई जब होली खेलते समय तरुण के परिवार की एक लड़की ने पानी से भरा गुब्बारा फेंका, जो पड़ोसी परिवार की एक महिला पर जा गिरा.
इस घटना के बाद दोनों परिवारों में टकराव हुआ और हालात बिगड़ गए. लाइव लॉ के मुताबिक़ पुलिस ने अब तक इस मामले में 14 लोगों को गिरफ़्तार किया है और 2 नाबालिगों को भी पकड़ा है.

इमेज स्रोत, Dhiraj Singh/Bloomberg via Getty Images
भारत के शेयर बाज़ार में तेज़ गिरावट दर्ज की गई है. गुरुवार को सेंसेक्स 3.26 फ़ीसदी यानी 2496 अंक गिरकर 74,207 पर बंद हुआ. निफ्टी 3.26 फ़ीसदी यानी 775 अंक टूटकर 23,002 पर बंद हुआ.
क़रीब सवा तीन बजे सेंसेक्स 3.29 फ़ीसदी यानी 2,527 अंक गिर गया था, जिससे यह 74,153 पर कारोबार कर रहा था. निफ्टी 3.32 फ़ीसदी यानी 790 अंक गिरकर 22,984 पर चल रहा था. हालांकि, बाज़ार बंद होते-होते थोड़ा सुधार दिखा.
दरअसल, बाज़ार में गिरावट की बड़ी वजह क्रूड ऑयल की क़ीमतों में आई बढ़ोतरी को माना जा रहा है. ईरान के ऑयल इंफ़्रास्ट्रक्चर (साउथ पार्स गैस फ़ील्ड) पर हमले के बाद क्रूड में तेज़ी देखी गई.
इससे 18 मार्च को अमेरिकी बाज़ार भी गिरावट के साथ ही बंद हुए थे. नतीजतन, भारत सहित एशियाई बाज़ारों पर 19 मार्च को इसका प्रभाव देखने को मिला.
बाज़ार में आज ऊपर जाने वाले शेयरों की संख्या सिर्फ़ 921 थी, गिरने वाले शेयरों की संख्या 2,923 थी. जबकि 122 शेयरों की क़ीमतें जस की तस रहीं.


इमेज स्रोत, ANI
भारत ने खाड़ी देशों में ऊर्जा ठिकानों पर हो रहे हमलों पर प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि एनर्जी इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर हो रहे हमले तुरंत बंद होने चाहिए.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत ने पहले भी कहा था कि नागरिक ढांचे को निशाना बनाने से बचना चाहिए, इसमें ऊर्जा ठिकाने भी शामिल हैं. ऊर्जा ठिकानों पर हुए हाल के हमले बहुत चिंताजनक हैं. यह पहले से ही अस्थिर ऊर्जा स्थिति को और बिगाड़ते हैं. ऐसे हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरंत बंद होना चाहिए."
इसके अलावा, भारतीय विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि ऊर्जा के क्षेत्र में भारत से कुछ पड़ोसी देशों ने मदद मांगी है. इनमें बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव शामिल हैं.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "ऊर्जा के बारे में हमें कई पड़ोसी देशों से अनुरोध मिले हैं. हमें बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और कुछ अन्य पड़ोसी देशों से अनुरोध मिले हैं."
"जैसा कि मैंने पहले बताया था, भारत 2007 से अलग-अलग तरीकों से बांग्लादेश को डीजल भेज रहा है. हम अभी भी बांग्लादेश और अपने अन्य पड़ोसियों की मदद कर रहे हैं. यह काम हमारी अपनी ज़रूरत, हमारी रिफ़ाइनिंग क्षमता और डीज़ल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है."
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच चल रहे युद्ध के दौरान कई देशों में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है.

इमेज स्रोत, Santosh Kumar/Hindustan Times via Getty Images
पटना हाई कोर्ट ने गुरुवार को जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक अनंत सिंह को जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में ज़मानत दे दी. अनंत सिंह को पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में मतदान से पहले गिरफ़्तार किया गया था.
अनंत सिंह को ज़मानत मिलने पर उनके वकील नवीन कुमार ने एएनआई से कहा, "जब विधायक पर आरोप लगाया गया था, उस समय बिहार विधानसभा चुनाव होने वाले थे. विपक्ष ने जानबूझकर इस केस में उन्हें फंसाया, जबकि वह एक हादसा था. उन्होंने अपना सम्मान बचाए रखने और चुनाव को प्रभावित न करने के इरादे से ख़ुद ही सरेंडर किया."
उन्होंने कहा, "नतीजा यह हुआ कि जनता ने उन्हें फिर चुना और वे जीत गए. उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा क्योंकि यह राजनीतिक मामला था. जज ने भी समझा कि उन्हें राजनीतिक रंजिश की वजह से फँसाया गया था और इसलिए ज़मानत दी."
गौरतलब है कि 30 अक्तूबर को बिहार के मोकामा में दो उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच हुई हिंसक झड़प हुई. इसमें दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी. अनंत सिंह पर हत्या की साज़िश रचने का आरोप लगा था और उन्हें 1 नवंबर की रात पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था.

इमेज स्रोत, Morteza Nikoubazl/NurPhoto via Getty Images
मध्य-पूर्व में ऊर्जा ठिकानों पर हमले के बाद तेल और गैस की क़ीमतों में बढ़ोतरी हुई है. एशिया में शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 4% बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल हो गई. अमेरिका में ट्रेड होने वाले तेल की कीमत भी 3% बढ़ गई है.
बीबीसी के इंटरनेशनल बिज़नेस संवाददाता थियो लेगेट के मुताबिक़ गुरुवार सुबह ब्रिटेन में गैस की कीमतों में 25% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है.
बीबीसी की बिजनेस रिपोर्टर केटी होप के मुताबिक़, यहां तेल की कीमतें क़रीब 5% ज़्यादा पर ट्रेड कर रही हैं.
तेल और गैस की क़ीमतों में इस बढ़ोतरी के पहले मिडिल ईस्ट में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर नए हमले हुए हैं, जिनमें क़तर का मुख्य गैस भंडार भी शामिल है.
इसके साथ ही दुनिया के सबसे बड़े नेचुरल गैस फील्ड्स में से एक ईरान की साउथ पार्स गैस फैसिलिटी पर हमला हुआ है.
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क़तर में एक बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस एक्सपोर्ट केंद्र को निशाना बनाया, जिससे "काफ़ी नुक़सान" हुआ और वैश्विक एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं.
हालांकि तेल की कीमतें अभी भी युद्ध से पहले से काफी ऊपर हैं, लेकिन वे संघर्ष की शुरुआत में पहुंचे उच्चतम स्तरों से नीचे हैं, जब क्रूड क़रीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था.
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में एशिया के शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली.

इमेज स्रोत, Fayez Nureldine / AFP via Getty Images
सऊदी अरब की राजधानी रियाद में 12 अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने एक अहम बैठक की. इसमें शामिल हुए देशों ने' ईरान की ओर से खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों' की कड़ी निंदा की.
इन 12 देशों ने ईरान के खिलाफ एक साझा बयान भी जारी किया है. इनमें क़तर, अज़रबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.
इनकी ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया, "सभी देशों ने ईरान के उन हमलों की कड़ी निंदा की, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल कर रिहायशी इलाक़ों, तेल संयंत्रों, वाटर प्लांट, हवाई अड्डों, मकानों और राजनयिक दफ़्तरों को निशाना बनाया गया. प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे हमलों को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता."
संयुक्त बयान में कहा गया, "प्रतिनिधियों ने ज़ोर दिया कि हर देश को आत्मरक्षा का अधिकार है, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 में लिखा है. उन्होंने ईरान से तुरंत हमले रोकने की मांग की और कहा कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून, मानवता के क़ानून और पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्तों का सम्मान करना ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ भविष्य के रिश्ते तभी बेहतर हो सकते हैं जब वह दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करे और उनके आंतरिक मामलों में दख़ल न दे."

इमेज स्रोत, X/@MofaQatar_EN
इन देशों ने कहा, "ईरान को अरब देशों में अपनी समर्थित मिलिशिया को मदद, पैसा और हथियार देना बंद करना चाहिए. ईरान को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में जहाज़ों की आवाजाही रोकने या बाब अल-मंदब में समुद्री सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा करने जैसी धमकियों से बचना चाहिए."
गौरतलब है कि ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर हमले के बाद, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़ी तेल और गैस रिफ़ाइनरियों पर हमले किए. सऊदी अरब, क़तर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात इन हमलों से प्रभावित हुए.

इमेज स्रोत, Arijit Sen/Hindustan Times via Getty Images
कर्नाटक ने विधानसभा में 'झूठी शान' और 'जाति आधारित हिंसा के ख़िलाफ़' एक विधेयक पेश किया है. इस विधेयक का नाम 'कर्नाटक फ़्रीडम ऑफ़ चॉइस इन मैरिज एंड प्रिवेंशन एंड प्रोहिबिशन ऑफ़ ऑनर एंड ट्रेडिशन बिल, 2026' है.
बिल में बताया गया है कि अगर इस तरह के अपराध में किसी की मौत होती है तो कम से कम पांच साल की जेल होगी.
यह सज़ा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सज़ा से अलग होगी. अगर किसी कपल या व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचाई जाती है तो तीन साल की जेल और तीन लाख रुपये तक का जुर्माना होगा.
यह विधेयक उस घटना के लगभग तीन महीने बाद पेश किया गया है, जिसमें 21 साल की मान्या पाटिल की उसके पिता और रिश्तेदारों ने हत्या कर दी थी. वजह थी कि उसने अनुसूचित जाति समुदाय के विवेकानंद डोड्डामणि से शादी की थी.
मान्या छह महीने की गर्भवती थी. वह 21 दिसंबर 2025 को अपने मायके गई थी, तभी उन्हें पीटा गया. इससे पहले उन्होंने और विवेकानंद ने पुलिस सुरक्षा भी मांगी थी.
विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि कर्नाटक में जाति आधारित भेदभाव अब भी मौजूद है और यह हिंसा के रूप में सामने आता है, ख़ासकर उन युवाओं के खिलाफ जो अपनी पसंद से अंतरजातीय विवाह करते हैं.
मसौदे में लिखा है, "हत्या, हमला और धमकी जैसे अपराध बीएनएस में दंडनीय हैं, लेकिन ये प्रावधान जाति की 'इज़्ज़त' बचाने के नाम पर होने वाले ख़ास सामाजिक अपराधों को ठीक से नहीं रोकते."
कानून मंत्री एच.के. पाटिल ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "इस विधेयक को 'एवा नम्मवा एवा नम्मवा' नाम दिया गया है. यह 12वीं सदी के समाज सुधारक बसवेश्वर की कही हुई बात है."
समाज सुधारक बसवेश्वर के कथन का मतलब है- "वह हमारा है, वह हमारा है." यानी हर इंसान अपना है, चाहे उसकी जाति या पृष्ठभूमि कुछ भी हो."
जनवादी महिला संगठन की विमला केएस ने इस विधेयक का स्वागत किया.
उन्होंने कहा, "मैं पिछले 25 साल से केंद्र सरकार से ऐसे कानून की मांग कर रही हूँ. सुप्रीम कोर्ट की वकील कीर्ति सिंह ने इसका एक मसौदा भी तैयार किया था लेकिन चुनावी कारणों से कोई क़दम नहीं उठाया गया. अब इसे पूरी तरह लागू करना होगा."

इमेज स्रोत, Getty Images
ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़ी तेल और गैस रिफाइनरियों पर हमला करने की धमकी दी थी. इसके बाद मध्य पूर्व देशों पर रात भर हमले जारी रहे.
सऊदी अरब ने रातभर में सबसे ज़्यादा हमलों की सूचना दी. उसने बुधवार रात से हमलों के सात अपडेट्स जारी किए.
सऊदी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसने राजधानी रियाद और देश के "पूर्वी क्षेत्रों" में 17 ड्रोन और दो बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया.
बुधवार को क़तर के रास लाफ़ान ऊर्जा परिसर पर ईरान के जवाबी हमलों के बाद, क़तर ने घोषणा की कि गुरुवार तड़के उस पर फिर से हमला हुआ.
क़तर ने कहा कि बाद में हुए हमले में नुक़सान तो हुआ है, लेकिन किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है.
संयुक्त अरब अमीरात ने गुरुवार तड़के सूचना दी कि उसके एयर डिफ़ेंस सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक रहे थे, जबकि लड़ाकू विमान आसमान में ड्रोनों को रोक रहे थे.
वहीं बहरीन ने रात भर में तीन चेतावनियाँ जारी कीं, और नागरिकों से सुरक्षित जगह पर जाने का आग्रह किया.
जबकि कुवैत की सेना ने एक बयान जारी कर बताया कि वह "दुश्मन की मिसाइल और ड्रोन हमलों" का सामना कर रही है.
नमस्कार!
अब तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के पन्ने पर लगी कुछ अहम ख़बरें पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.

इमेज स्रोत, Getty Images
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की प्रतिक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं.
अराग़ची ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "मैक्रों ने ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हमले की निंदा में एक शब्द भी नहीं कहा. जब इसराइल ने ईरान में ईंधन के गोदामों को उड़ा दिया था, जिससे लाखों लोग ज़हरीले पदार्थों के संपर्क में आ गए थे. तब भी उन्होंने इसराइल की निंदा नहीं की थी."
उनकी मौजूदा "चिंता" हमारे गैस संयंत्रों पर इसराइल के हमले के बाद सामने नहीं आई. यह हमारी जवाबी कार्रवाई के बाद सामने आई है. दु:ख की बात है."
इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने वाले हमलों पर "रोक" लगनी चाहिए.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, मैक्रों ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और क़तर के अमीर से बात की.
उन्होंने कहा, “यह साझा हित में है कि हमलों को बिना किसी देरी के रोका जाए, ख़ासकर ऊर्जा और पानी की सप्लाई वाली सुविधाओं पर."
उन्होंने कहा, "नागरिक आबादी और उनकी बुनियादी ज़रूरतें, साथ ही ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा को सैन्य संघर्ष से बचाया जाना चाहिए."
दरअसल ईरान ने क़तर के रास लाफ़ान औद्योगिक क्षेत्र पर हमला किया जिसमें उसे काफ़ी नुकसान पहुंचा है. ये हमले ईरान के साउथ पार्स पर इसराइली हमले के बाद किए गए.