लाइव, ईरान में तीन लोगों को सार्वजनिक तौर पर दी गई सज़ा-ए-मौत

ईरान में जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल तीन लोगों को सज़ा-ए-मौत दे दी गई है.

सारांश

लाइव कवरेज

चंदन कुमार जजवाड़े

  1. ईरान में तीन लोगों को सार्वजनिक तौर पर दी गई सज़ा-ए-मौत

    मेहदी क़ासमी, सालेह मोहम्मदी और सईद दावूदी

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    ईरान में जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल तीन लोगों को सज़ा-ए-मौत दे दी गई है.

    ईरान की न्यायपालिका से जुड़ी मीज़ान न्यूज़ एजेंसी ने जानकारी दी है कि इन तीन लोगों पर सुरक्षाकर्मियों की हत्या करने का आरोप था.

    मीज़ान के अनुसार, मेहदी क़ासमी, सालेह मोहम्मदी और सईद दावूदी को 'हत्या' के साथ-साथ 'इसराइल और अमेरिका के इशारों पर काम करने का' दोषी पाया गया.

    एजेंसी के मुताबिक़ बचाव पक्ष के वकीलों की मौजूदगी में और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद, ईरान के क़ुम में आम लोगों के सामने ये मौत की सज़ा दी गई.

  2. क्या भारतीय तेल टैंकर होर्मुज़ से निकलने में कामयाब रहे? अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने ये बताया

    तुलसी गबार्ड

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड

    अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के ज़रिए भारतीय जहाज़ों (तेल टैंकर) के गुज़रने को लेकर टिप्पणी की है.

    तुलसी गबार्ड ने कहा है, “ऐसी कुछ रिपोर्ट्स हैं जिसमें बताया गया है कि चीन, भारत और कुछ अन्य देश अपने तेल टैंकर्स को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के ज़रिए पार कराने में कामयाब रहे हैं.”

    उन्होंने कहा है कि हालाँकि ये कितने तेल टैंकर हैं इसे लेकर अभी कुछ साफ़ नहीं है.

    भारत ने पिछले हफ़्ते कहा था कि ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच भारत के दो जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने में कामयाब रहे हैं.

    भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि इन जहाज़ों में से हर एक में 46 हज़ार मीट्रिक टन से ज़्यादा एलपीजी लदी है. यानी इनमें कुल क़रीब 93 हज़ार मीट्रिक टन एलपीजी है.

  3. अतनु चक्रवर्ती ने एचडीएफ़सी बैंक के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफ़ा, बैंक ने ये बताया

    अतनु चक्रवर्ती

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    इमेज कैप्शन, अतनु चक्रवर्ती ने एचडीएफ़सी बैंक के चेयरमैन पद से इस्तीफ़ा दे दिया है (फ़ाइल फ़ोटो)

    एचडीएफ़सी बैंक के अस्थायी चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती ने बैंक में "कुछ घटनाओं और तौर-तरीकों" को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है.

    उन्होंने कहा कि ये बातें उनके निजी मूल्यों और नैतिकता के मुताबिक़ नहीं थीं.एचडीएफ़सी बैंक ने बताया है कि अतनु चक्रवर्ती ने 17 मार्च को अपने पद से इस्तीफ़ा देते हुए एक लेटर लिखा था, जो बैंक को 18 मार्च को मिला.

    अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफ़े के बाद मीडिया में इसे लेकर काफ़ी चर्चा हो रही है. इसी बीच एचडीएफ़सी बैंक ने उनके इस्तीफ़े पर स्पष्टीकरण दिया है.

    अंग्रेज़ी अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक़ एचडीएफ़सी बैंक ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफ़े की वजहें, उनके लेटर में बताई गई वजहों के अलावा और कुछ नहीं हैं.

    अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफ़े के बाद एचडीएफ़सी बैंक के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई है.

  4. ट्रंप का विरोध करने वाले जो केंट की एफ़बीआई कर रही है जांच, जानिए क्या है मामला

    एफ़बीआई

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    बीबीसी के सहयोगी सीबीएस न्यूज़ को सूत्रों ने बताया है कि एफ़बीआई काउंटरटेररिज़्म सेंटर के पूर्व निदेशक जो केंट की जाँच कर रही है.

    कई सूत्रों ने सीबीएस को यह जानकारी दी है. सीबीएस की रिपोर्ट के अनुसार, यह जाँच गोपनीय जानकारी लीक होने के मामले से जुड़ी है.

    सूत्रों ने बताया कि यह जाँच इस हफ़्ते की शुरुआत में ईरान युद्ध को लेकर जो केंट के इस्तीफ़े से पहले ही शुरू हो गई थी.

    सीबीएस ने बताया कि रिपोर्ट लिखे जाने तक एफ़बीआई ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया.

    ईरान में युद्ध का विरोध करते हुए ट्रंप प्रशासन के काउंटरटेररिज़्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने इसी हफ़्ते अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से "अपना रुख़ बदलने" का आग्रह भी किया.

    जो केंट ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक पत्र में कहा कि ईरान अमेरिका के लिए तत्काल "कोई ख़तरा" नहीं था.

    उन्होंने दावा किया कि ट्रंप प्रशासन ने "इसराइल और उसकी शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव के कारण यह युद्ध शुरू किया."

    वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो केंट के इस्तीफ़े पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका पद छोड़ना अच्छा है.

  5. क़तर के रास लाफ़ान गैस फ़ील्ड में हुआ एक और ईरानी हमला

    ईरानी मिसाइल

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    इमेज कैप्शन, इसराइली हमलों के बाद ईरान ने भी बदले की कार्रवाई की है (सांकेतिक तस्वीर)

    ईरान के सरकारी टेलीविज़न ने दावा किया कि ईरानी मिसाइलों ने रास लाफ़ान स्थित क़तर के एनर्जी कॉम्पलेक्स पर एक बार फिर हमला किया है.

    ये हमले डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी देने से पहले किए गए हैं. ट्रंप ने क़तर के गैस फ़ील्ड पर फिर से हमला करने को लेकर ईरान को चेतावनी दी है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा है कि अमेरिका, इसराइल की मदद या सहमति के साथ या बिना उसके भी, साउथ पार्स गैस फ़ील्ड (ईरान) को पूरी ताक़त के साथ नष्ट कर देगा.

    ट्रंप ने कहा, “मैं इस स्तर की हिंसा और तबाही को मंजूरी नहीं देना चाहता, क्योंकि इसके ईरान के भविष्य पर लंबे समय तक असर होंगे. लेकिन अगर क़तर के एलएनजी ठिकाने पर फिर हमला होता है, तो मैं ऐसा करने में हिचकिचाऊंगा नहीं."

    क़तर की सरकारी ऊर्जा कंपनी ने भी पुष्टि की है कि गुरुवार सुबह उसके मुख्य केंद्र पर स्थित गैस फ़ील्ड पर रॉकेटों से हमला किया गया, जिससे आग लग गई और काफ़ी नुक़सान हुआ, लेकिन इसमें कोई घायल नहीं हुआ.

    ईरान ने इससे पहले भी क़तर के रास लाफ़ान औद्योगिक क्षेत्र पर हमला किया जिसमें उसे काफ़ी नुकसान पहुंचा है. ये हमले ईरान के साउथ पार्स पर इसराइली हमले के बाद किए गए.

  6. 'अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर से ज़्यादा की मांग रखी': रिपोर्ट

    पेंटागन

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    इमेज कैप्शन, ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका के हथियारों का बड़ी संख्या में इस्तेमाल हुआ है (सांकेतिक तस्वीर)

    अंग्रेज़ी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट की ख़बर के मुताबिक़ अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने राष्ट्रपति भवन से ईरान युद्ध के लिए बड़ी रकम की मांग की है.

    वॉशिंगटन पोस्ट ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के हवाले से बताया है कि पेंटागन ने व्हाइट हाउस से ईरान में युद्ध की वजह से 200 अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा की मंज़ूरी देने को कहा है.

    अख़बार का कहना है कि यह रकम अब तक ईरान में हुए अभियान की लागत से कहीं ज़्यादा होगी, और इसका मक़सद ख़र्च हो चुके ज़रूरी हथियारों का उत्पादन "फौरन" बढ़ाना है.

    पिछले दो हफ़्तों में पेंटागन की तरफ़ से फंडिंग के लिए कई अलग-अलग अनुरोध "पेश" किए गए हैं.

    वॉशिंगटन पोस्ट का मानना ​​है कि सबसे ताज़ा अनुरोध "कांग्रेस में एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई की वजह बन सकता है."

    रिपोर्ट लिखे जाने के समय, अमेरिकी रक्षा विभाग और व्हाइट हाउस दोनों ने ही इस मुद्दे पर अख़बार की तरफ से टिप्पणी के अनुरोध को ठुकरा दिया था.

  7. ट्रंप प्रशासन के काउंटरटेररिज़्म सेंटर के पूर्व निदेशक जो केंट ने कहा, 'ईरानी सुप्रीम लीडर को नहीं मारना चाहिए था'

    जो केंट

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    इमेज कैप्शन, जो केंट ने ईरान युद्ध को लेकर अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था (फ़ाइल फ़ोटो)

    ट्रंप प्रशासन के काउंटरटेररिज़्म सेंटर के पूर्व निदेशक जो केंट ने कहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर को नहीं मारा जाना चाहिए था.

    जो केंट ने इसी हफ़्ते ईरान युद्ध को लेकर अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. उन्होंने कंज़र्वेटिव राजनीतिक टिप्पणीकार टकर कार्लसन के साथ इंटरव्यू में यह बात कही है.

    जो केंट का कहना है कि अमेरिका-इसराइल का वह ऑपरेशन जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई मारे गए थे, "वह सबसे आख़िरी चीज़ थी, जो हमें करनी चाहिए थी."

    केंट ने कहा, "अगर आप उन्हें हटा देते हैं, अगर आप उन्हें आक्रामक तरीके से मार देते हैं, तो लोग शासन और अगले आयतुल्लाह के इर्द-गिर्द एकजुट हो जाएँगे, और मुझे लगता है कि हमारे पास मौजूद सभी आंकड़ों के हिसाब से उनके बेटे (मोजतबा ख़ामेनेई) के मामले में भी यही हो रहा है."

    केंट ने कहा, "ख़ामेनेई की देखरेख में ईरान का परमाणु कार्यक्रम चल रहा था. वो ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक रहे थे."

    इससे पहले काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक पत्र में कहा था कि ईरान अमेरिका के लिए तत्काल "कोई ख़तरा" नहीं था.

    उन्होंने दावा किया कि ट्रंप प्रशासन ने "इसराइल और उसकी शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव के कारण यह युद्ध शुरू किया."

  8. डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों कहा कि 'इसराइल अब ऐसा नहीं करेगा'

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर हमले के बाद बुधवार को क़तर के सबसे बड़े एनर्जी प्लांट पर ईरान ने हमला किया था

    दुनिया के सबसे बड़े ग़ैस फ़ील्ड में शुमार ईरान के साउथ पार्स पर हमले को लेकर अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी है.

    इस हमले के जवाब में ईरान ने बुधवार रात क़तर के सबसे बड़े एनर्जी क्षेत्र रास लाफ़ान पर हमला किया जिसमें काफ़ी नुक़सान की ख़बरें हैं.

    ट्रंप ने अपने सोशल ट्रुथ अकाउंट पर लिखा, "मध्य पूर्व में हुई घटनाओं को लेकर ग़ुस्से में इसराइल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड नामक एक बड़े ठिकाने पर हमला किया. पूरे क्षेत्र का केवल एक छोटा हिस्सा ही प्रभावित हुआ है. अमेरिका को इस ख़ास हमले की कोई जानकारी नहीं थी और क़तर का इससे किसी भी तरह का कोई लेना देना नहीं था, न ही उसे इस हमले की पहले से कोई जानकारी थी."

    "दुर्भाग्य से, ईरान को इन तथ्यों की जानकारी नहीं थी और उसने बिना उचित कारण के क़तर के एलएनजी गैस ठिकाने के एक हिस्से पर हमला कर दिया. अब इस बेहद अहम और क़ीमती साउथ पार्स फ़ील्ड पर इसराइल की ओर से कोई और हमला नहीं किया जाएगा, जब तक कि ईरान कोई अविवेकपूर्ण क़दम उठाते हुए एक निर्दोष देश क़तर पर हमला नहीं करता."

    ट्रंप ने लिखा, "ऐसी स्थिति में, अमेरिका, इसराइल की मदद या सहमति के साथ या बिना उसके भी, साउथ पार्स गैस फ़ील्ड को पूरी ताक़त के साथ नष्ट कर देगा, ऐसी ताक़त के साथ जिसे ईरान ने पहले कभी नहीं देखा होगा."

    "मैं इस स्तर की हिंसा और तबाही को मंजूरी नहीं देना चाहता, क्योंकि इसके ईरान के भविष्य पर लंबे समय तक असर होंगे. लेकिन अगर क़तर के एलएनजी ठिकाने पर फिर हमला होता है, तो मैं ऐसा करने में हिचकिचाऊंगा नहीं."

  9. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान युद्ध को लेकर अब क्या कहा?

    इमैनुएल मैक्रों

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    इमेज कैप्शन, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने तेल और गैस के ठिकानों पर हमले रोकने की अपील की है

    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने वाले हमलों पर "रोक" लगनी चाहिए.

    उन्होंने ईरान और क़तर में गैस उत्पादन वाले इलाक़ों पर कई हमलों की ख़बर आने के बाद ऐसा कहा.

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, मैक्रों ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और क़तर के अमीर से बात की.

    उन्होंने कहा, “यह साझा हित में है कि हमलों को बिना किसी देरी के रोका जाए, ख़ासकर ऊर्जा और पानी की सप्लाई वाली सुविधाओं पर."

    उन्होंने कहा, "नागरिक आबादी और उनकी बुनियादी ज़रूरतें, साथ ही ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा को सैन्य संघर्ष से बचाया जाना चाहिए."

    इससे पहले क़तर ने ईरान को इलाक़े के लिए प्रत्यक्ष ख़तरा बताया. क़तर का कहना है कि रास लफ़ान औद्योगिक शहर पर हुए मिसाइल हमले देश की सुरक्षा और क्षेत्र की स्थिरता के लिए ख़तरा है.

    क़तर की पेट्रोलियम कंपनी ने कहा है कि मिसाइल हमलों से उसे काफ़ी नुक़सान हुआ है.

  10. तुलसी गबार्ड ने पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम को 'अमेरिका के लिए ख़तरा बताया'

    तुलसी गबार्ड

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    अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कहा है कि ख़ुफ़िया व्यवस्था से जुड़े लोगों के आकलन के मुताबिक़ रूस, चीन, नॉर्थ कोरिया, ईरान और पाकिस्तान कई तरह के नए, एडवांस या पारंपरिक मिसाइल डिलीवरी सिस्टम पर रिसर्च और डेवलपमेंट कर रहे हैं.

    गबार्ड ने कहा, "इन मिसाइलों में न्यूक्लियर और पारंपरिक पेलोड लगे होते हैं, जो हमारे देश को अपनी ज़द में ले सकते हैं. ख़ुफ़िया तंत्र का आकलन है कि इससे देश के लिए ख़तरा सामूहिक रूप से बढ़ेगा और साल 2035 तक ऐसी मिसाइलों की संख्या मौजूदा अनुमानित 3 हज़ार से बढ़कर 16 हज़ार से ज़्यादा तक पहुँच जाएगी."

    तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी सीनेट की सिलेक्ट इंटेलीजेंस कमेटी में सुनवाई के दौरान ये बयान दिया.

    उन्होंने आगे कहा, "पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल डेवलपमेंट में संभावित रूप से ऐसी आईसीबीएम भी शामिल हो सकती है, जिसकी मारक क्षमता हमारे देश (अमेरिका) तक भी हो सकती है."

    उन्होंने कहा, "ईरान ने पहले भी स्पेस लॉन्च और दूसरी ऐसी तकनीक का प्रदर्शन किया है, जिसका इस्तेमाल करके वह साल 2035 से पहले एक सैन्य रूप से सक्षम आईसीबीएम बनाना शुरू कर सकता है. बशर्ते वह इस दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश करे."

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