अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति तीखी नाराज़गी जताने के बाद रूस की पहली प्रतिक्रिया आई है. रूस ने कहा कि वह अभी भी 'अमेरिका के साथ काम' कर रहा है.
ट्रंप की नाराज़गी के बाद आया रूस का ये बयान, गेब्रिएला पॉमरॉय, बीबीसी न्यूज़
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति तीखी नाराज़गी जताने के बाद रूस की पहली प्रतिक्रिया आई है. रूस ने कहा कि वह अभी भी 'अमेरिका के साथ काम' कर रहा है.
रूसी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पेसकोव ने कहा, "हम अमेरिकी पक्ष के साथ काम करना जारी रखेंगे, सबसे पहले, अपने संबंधों को बेहतर बनाने के लिए काम करेंगे."
उन्होंने कहा कि इस हफ़्ते पुतिन और ट्रंप के बीच बातचीत की कोई योजना नहीं है, लेकिन '(बातचीत) ज़रूरी होने पर' पुतिन इसके लिए तैयार हैं.
बता दें कि रविवार को ट्रंप ने एनबीसी न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा कि वो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से काफ़ी 'नाराज़' हैं.
ट्रंप ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि अगर पुतिन युद्ध विराम पर सहमत नहीं होते हैं, तो वो रूस से तेल ख़रीदने वाले देशों पर 50 फीसदी का ट्रैरिफ लगा सकते हैं.
ट्रंप की ओर से रूसी राष्ट्रपति की आलोचना पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में क्रेमलिन ने दोनों नेताओं के बीच तनाव को कम करने की कोशिश की है.
भूकंप प्रभावित म्यांमार में मरने वालों की संख्या 2 हज़ार के पार, जारी है बचाव अभियान
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इमेज कैप्शन, म्यांमार की सैन्य सरकार ने बताया कि भूकंप के कारण 2,056 लोगों की मौत हुई है
म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद सोमवार को भी बचाव कार्य जारी है. म्यांमार की सैन्य सरकार के मुताबिक़ यहां मरने वालों की संख्या 2 हज़ार के पार जा चुकी है.
म्यांमार की सैन्य सरकार ने बताया कि भूकंप के कारण 2,056 लोगों की मौत हुई है. 3,900 से अधिक लोग घायल हुए हैं और 270 लोग अभी भी लापता हैं.
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इमेज कैप्शन, मांडले में तलाशी अभियान में जुटा एक बचाव कर्मी
याद दिला दें कि म्यांमार से जानकारी पाना मुश्किल है क्योंकि यहां के सैन्य नेतृत्व का राष्ट्रीय आपदाओं से हुए नुकसान के पैमाने को दबाने का इतिहास रहा है.
वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने म्यांमार में भूकंप से निपटने के लिए 80 लाख डॉलर की सहायता की अपील की है.
संगठन के एक प्रवक्ता ने बताया है कि म्यांमार के अस्पताल भी भूकंप से प्रभावित हुए हैं, वहीं घायलों की संख्या बढ़ने के कारण अस्पतालों पर काफ़ी दबाव भी है.
फ़्रांस: दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन गबन की दोषी करार, नहीं लड़ पाएंगी राष्ट्रपति पद का चुनाव
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फ़्रांस की एक अदालत ने दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन को गबन का दोषी करार दिया है. अदालत ने ले पेन के चुनाव लड़ने पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया है. इसका मतलब है कि वह 2027 के फ़्रांसीसी राष्ट्रपति पद का चुनाव नहीं लड़ पाएंगी.
मरीन ले पेन को यूरोपीय संघ के फंड के गबन का दोषी पाया गया है. अदालत ने उन्हें चार साल की जेल की सज़ा भी सुनाई गई है, जिसमें से दो साल निलंबित रहेंगे, बाकी दो साल कस्टडी में रहने की बजाए इलेक्ट्रॉनिक टैग के साथ बिताए जा सकते हैं.
हालांकि, ले पेन के वकील का कहना है कि वो इस सज़ा के खिलाफ़ अपील करेंगी.
फ्रांस की अदालत ने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मरीन ले पेन और 20 अन्य लोगों को फ़्रेंच नेशनल रैली (आरएन) पार्टी के लिए पैसों के गबन का दोषी पाया है. इनमें से 8 लोग उस समय (गबन करने के दौरान) यूरोपीय संघ के सांसद थे और 12 लोग संसदीय सहायक थे.
जज बेनेडिक्ट डी पर्थुइस ने कहा, "यह साबित हो गया है कि ये सभी लोग असल में पार्टी के लिए काम कर रहे थे. जांच से यह भी पता चला कि ये प्रशासनिक त्रुटियाँ नहीं थीं बल्कि गबन था."
राजस्थानः मालपुरा में ईद पर सौहार्द, पुलिस और नमाज़ियों ने किया भ्रामक ख़बरों का खंडन, मोहर सिंह मीणा, बीबीसी हिंदी के लिए
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राजस्थान पुलिस ने टोंक ज़िले के मालपुरा में नमाज़ के बाद 'पुलिस और नमाज़ियों के बीच विवाद' की ख़बरों का खंडन किया है.
दरअसल, राजस्थान में टोंक ज़िले के मालपुरा में सोमवार सुबह ईद की नमाज़ के बाद हज़ारों की संख्या में नमाज़ी एकसाथ निकले थे.
इलाक़े के बस स्टैंड चौराहे के पास अपने धार्मिक नारे लगाते हुए नमाज़ी निकल रहे थे, जिससे जाम जैसी स्थिति बन गई थी.
सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो गया, कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि नमाज़ के बाद पुलिस और नमाज़ी आमने-सामने आ गए.
इन ख़बरों का पुलिस और नमाज़ियों ने खंडन किया है.
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इमेज कैप्शन, मालपुरा में नमाज़ अदा करते लोग
टोंक पुलिस अधीक्षक (एसपी) विकास सांगवान ने बीबीसी से कहा, "नमाज़ खत्म होने के बाद एकसाथ बड़ी संख्या में लोग निकलते हैं, भीड़ नारे लगाते हुए जा रही थी और उनके एक जगह रुकने के कारण जाम जैसे हालात बन गए थे."
इसके बाद पुलिस ने लोगों को उनके घरों की ओर रवाना किया. एसपी विकास सांगवान ने स्पष्ट किया कि यहां किसी तरह का कोई विवाद नहीं हुआ है.
उन्होंने बताया, "एक टीवी चैनल ने गलत ख़बर प्रकाशित की है, जिसके बाद सभी अन्य मीडिया संस्थान ने ख़बर चला दी. जबकि, यहां सब कुछ सामान्य है. हमारे वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि गलत ख़बर प्रकाशित करने वालों को नोटिस जारी करें."
इस दौरान मौक़े पर रहे मालपुरा के एडवोकेट अब्दुल वाहिद नक़वी ने बीबीसी को बताया, "नमाज़ पढ़ने के बाद हम क़रीब 20 से 25 हज़ार आदमी एकसाथ निकलते हैं. निकलने के लिए एक ही रोड है और जब तक नमाज़ी निकलते नहीं, वह रोड जाम ही रहती है."
वो आगे कहते हैं, "एक रोड से होते हुए ही सब अपने मोहल्लों में जाते हैं. बस स्टैंड चौराहे पर कुछ बच्चों ने कुछ देर अपने नारे लगाए, प्रशासन ने मना किया तो नारेबाजी बंद कर वे घर चले गए."
एडवोकेट नक़वी इस मामले पर हुई मीडिया रिपोर्ट्स पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, "वहां कुछ भी नहीं हुआ, मीडिया न जाने क्यों इस तरह की भ्रामक ख़बरें प्रकाशित कर रही है. यह बेहद दुःखद है."
रेड क्रॉस का आरोप- इसराइली सेना ने ग़ज़ा में उसकी मेडिकल टीम को बनाया निशाना, 8 सदस्यों के शव बरामद
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इमेज कैप्शन, फ़लस्तीनी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के कर्मचारी
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ (आईएफआरसी) ने इसराइली सेना की निंदा की है.
आईएफआरसी की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़ इसराइली सेना के हमले में ग़ज़ा में ड्यूटी कर रहे फ़लस्तीनी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के आठ सदस्यों की मौत हो गई.
आईएफआरसी के मुताबिक़ 23 मार्च को नौ लोगों की एक इमरजेंसी मेडिकल टीम अल-हशाशिन में इसराइली सेना की भारी गोलीबारी का शिकार हुई. इसके बाद टीम के सदस्यों और उनकी एंबुलेंस का कुछ पता नहीं चल पाया.
आईएफआरसी ने बताया कि 30 मार्च को इस टीम के 8 सदस्यों के शव बरामद हुए, वहीं एक सदस्य अभी भी लापता है.
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक़ इसराइली सेना ने कहा कि उसके सैनिकों ने ऐसे कई वाहनों पर गोलीबारी की, जो बिना हेडलाइट या इमरजेंसी सिग्नल के 'संदिग्ध रूप से' आगे बढ़ रहे थे.
इसराइली सेना का कहना है कि मारे गए लोगों में एक हमास कार्यकर्ता और 'आठ अन्य आतंकवादी' शामिल हैं.
कौन हैं निधि तिवारी, जिन्हें पीएम मोदी का निजी सचिव नियुक्त किया गया है?
भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी निधि तिवारी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निजी सचिव नियुक्त किया गया है. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने इस नियुक्ति की सूचना जारी की है.
डीओपीटी की ओर से जारी मेमोरेंडम में बताया गया है कि निधि तिवारी साल 2014 बैच की भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी हैं. वो वर्तमान में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में उप सचिव के तौर पर कार्यरत हैं.
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इमेज कैप्शन, डीओपीटी की ओर से जारी मेमोरेंडम
29 मार्च को जारी किए गए मेमोरेंडम में बताया गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने निधि तिवारी की नियुक्ति को मंजूरी दी है.
उत्तराखंड: खराब कुट्टू के आटे से 200 लोगों की तबीयत बिगड़ी, मरीज़ों से मिलने अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री, आसिफ़ अली, बीबीसी हिंदी के लिए
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इमेज कैप्शन, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कोरोनेशन अस्पताल पहुंचे
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कुट्टू का आटा खाने से फ़ूड पॉइज़निंग के मामले सामने आए हैं. जानकारी के मुताबिक़ कुट्टू का आटा खाने के बाद करीब 200 लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई.
सभी मरीज़ों को शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी एक्स पर पोस्ट कर इस घटना की जानकारी दी है.
मुख्यमंत्री ने जानकरी दी कि देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल जाकर उन्होंने फ़ूड पॉइज़निंग से बीमार हुए लोगों का हाल जाना.
उन्होंने आगे लिखा, "जांच में यह स्पष्ट हुआ कि खराब कुट्टू के आटे के सेवन से फ़ूड पॉइज़निंग की घटना हुई. इस पर संबंधित एजेंसी को सील करने और जिन दुकानों में यह आटा वितरित किया गया था, वहां से इसे तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं."
"स्वास्थ्य सचिव को भी घटना के कारणों की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए."
घटना के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की टीमें शहर भर में सक्रिय हो गई हैं. संदिग्ध खाद्य उत्पादों के सैंपल इकट्ठा कर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं.
मरीज़ों से मिलने दून मेडिकल कॉलेज पहुंचे, स्वास्थ्य सचिव आर राजेश कुमार ने कहा, “मुझे बताया गया है कि यहाँ करीब 110 मरीज़ एडमिट हुए थे, जिनमें से 51 मरीज़ों को डिस्चार्ज कर दिया गया है.”
“बाकी बचे 61 मरीज़ों से मैंने बात भी की है. वह सभी अब ख़तरे से बाहर हैं.इसके अलावा क़रीब 78 मरीज़ कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती हैं. वहाँ भी सभी लोग खतरे के बाहर बताए जा रहे हैं.”
अस्पताल में भर्ती मरीज़ों का कहना है कि उन्होंने नवरात्रि व्रत के दौरान कुट्टू के आटे से बने पकवान खाए थे, जिसके कुछ समय बाद ही उन्हें उल्टी, दस्त, पेट दर्द और चक्कर आने जैसी दिक्कतें होने लगीं.
एसएसपी देहरादून अजय सिंह ने बताया, “हमें सूचना मिली थी कि दून मेडिकल कॉलेज और राजकीय ज़िला अस्पताल कोरोनेशन में काफ़ी लोग ऐसे आ रहे हैं, जिनको पेट दर्द और उल्टी की शिकायत है.”
"जाँच करने पर पता चला कि व्रत के दौरान लोगों ने जो कुट्टू के आटे का सेवन किया था. उसके बाद से कुछ लोगों की रात में और कुछ लोगों की सुबह-सुबह तबीयत खराब हो गई.”
“यह सूचना मिलते ही तुरंत सभी विभागों से संपर्क किया गया और लगभग दो घंटे के अंदर ही पुलिस ने 22 दुकानों/स्टोरों को चिन्हित कर उन पर रेड कर सील कर दिया गया, जहाँ से लोगों ने कुट्टू का आटा खरीदा था.”
भूकंप प्रभावित म्यांमार में एक हफ़्ते का राष्ट्रीय शोक घोषित, कई अस्पताल हुए क्षतिग्रस्त
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इमेज कैप्शन, म्यांमार के सैन्य प्रमुख मिन ऑन्ग ह्लाइंग (बीच में)
म्यांमार की सत्तारूढ़ सैन्य सरकार ने देश में एक हफ़्ते का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है.
म्यांमार में 28 मार्च को आए तेज़ भूकंप के कारण यहां 1700 से अधिक लोगों की मौत हुई है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी की रिपोर्ट के मुताबिक़ म्यांमार में घोषित राष्ट्रीय शोक छह अप्रैल तक चलेगा. इस दौरान झंडे आधे झुके रहेंगे.
इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मार्गरेट हैरिस ने बीबीसी को बताया कि म्यांमार के अस्पताल घायल लोगों से भरे हुए हैं, कई अस्पताल भूकंप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं.
उन्होंने बताया कि कम से कम तीन अस्पताल पूरी तरह से बंद हो चुके हैं, जबकि अन्य 22 अस्पताल 'आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं और अच्छी तरह से नहीं चल सकते हैं'.
उन्होंने कहा कि एक अन्य चुनौती म्यांमार की सत्तारूढ़ सैन्य सरकार से निपटना है, जिस पर पहले भी कुछ क्षेत्रों तक अंतर्राष्ट्रीय सहायता रोकने का आरोप लग चुका है.
अभी तक बीबीसी संवाददाता कीर्ति रावत आप तक ख़बरें पहुंचा रही थीं.
अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता सुरभि गुप्ता आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगी.
बीबीसी हिंदी के पन्ने पर लगी कुछ अहम ख़बरें नीचे दिए लिंक्स पर क्लिक करके आप पढ़ सकते हैं.
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ट्रंप के पुतिन से गुस्सा होने वाले बयान पर ज़ेलेंस्की क्या बोले
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने रविवार रात को अपने देश के लोगों को संबोधित किया.
इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी.
ज़ेलेंस्की ने कहा कि पुतिन को कूटनीति की कोई परवाह नहीं है और युद्ध रोकने के लिए रूस पर और ज़्यादा दबाव डालने की ज़रूरत है.
ज़ेलेंस्की ने कहा, “पिछले कुछ हफ़्तों से, अमेरिका की ओर से बिना शर्त युद्ध विराम का प्रस्ताव पेश किया गया है और लगभग इन प्रस्तावों के जवाब में रूसी ड्रोन, बम, तोपखाने की गोलाबारी और बैलिस्टिक हमले होते हैं.”
ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस पर ज़्यादा दबाव डालना चाहिए.
उन्होंने ये भी कहा कि रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए, ताकि उसकी युद्ध करने की ताकत और उसकी युद्ध चाहने वाली व्यवस्था को ख़त्म किया जा सके.
ट्रंप ने एनबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से काफ़ी गुस्सा और परेशान हैं.
ट्रंप ने कहा कि पुतिन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की विश्वसनीयता पर हमला किया है.
लखनऊ: ईदगाह मस्जिद पहुंचे अखिलेश यादव क्यों बोले- किसी अधिकारी के पास इसका जवाब नहीं था
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उत्तर प्रदेश के लखनऊ में ऐशबाग ईदगाह मस्जिद पर ईद के मौके पर की गई पुलिस बैरिकेडिंग पर समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने अपना बयान दिया है.
उन्होंने कहा, “जब मैं आज आ रहा था, तो पुलिस ने मुझे जानबूझकर रोका. मैंने जब आधे घंटे बात की, तब मुझे बड़ी मुश्किल से जाने दिया. जब मैंने जानना चाहा कि आखिरकार क्यों ऐसा किया जा रहा है, तो किसी अधिकारी के पास जवाब नहीं था.”
“मैं इस बात को ये समझूं कि ये दवाब बनाना चाहते हैं कि दूसरे के धर्मों में शामिल ना हों. दूसरों के कार्यक्रम में शामिल ना हों.”
समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने ये भी बताया कि जब उनके पिता पहली बार उन्हें ऐशबाग ईदगाह मस्जिद लाए थे तब से वो हर साल ईद के मौके पर वहां आते है लेकिन उन्होंने इतनी बैरिकेडिंग पहली बार देखी.
अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वो संविधान के अनुरूप देश को नहीं चला रही है.
योगी सरकार के चैत्र नवरात्रि के दौरान अवैध बूचड़खानों पर लगाए प्रतिबंध पर क्या बोले कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित
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उत्तर प्रदेश सरकार ने चैत्र नवरात्रि के दौरान धार्मिक स्थलों से 500 मीटर की दूरी पर अवैध बूचड़खानों पर प्रतिबंध लगाया है.
इस फ़ैसले पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "मांस की दुकानों पर लगाया गया प्रतिबंध एक तरह से उचित नहीं है. इस देश में कोई क्या खाए, क्या बोले, क्या पहने, वह व्यक्ति की अपनी निजी राय होती है. मैं मान सकता हूं कि कभी मंदिरों के, मस्जिदों के, गुरुद्वारों के आस-पास कुछ ऐसी दुकानें हैं जिन पर कुछ दूरी का प्रतिबंध लगाया जाता है."
"लेकिन ये जो नई बात है भारतीय जनता पार्टी की सरकारों में जबरदस्ती अपने तौर-तरीकों को थोपना. ज्यादातर उन्हीं चीज़ों पर केंद्रित रखना जो एक समाज या समुदाय के ख़िलाफ़ बनती है. हर चीज में सांप्रदायिकता दिखना, ये अपने आप में बहुत अनुचित है."
शनिवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 मार्च से 6 अप्रैल तक धार्मिक स्थलों पर 500 मीटर की दूरी पर अवैध बूचड़खानों पर प्रतिबंध लगाया है.
6 अप्रैल को रामनवमी के अवसर पर विशेष प्रतिबंध लगाए जाएंगे, जिस दिन मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.
तस्वीरों में देखिए भारत में ऐसे मनाई जा रही है ईद
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ट्रंप बोले- सभी देशों पर लागू होंगे टैरिफ, एयरफोर्स वन में पत्रकारों से और क्या कहा, फ़ैसल इस्लाम, इकोनॉमिक्स एडिटर & पीटर हॉकिन्स, बिजेनस रिपोर्टर
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस हफ़्ते से लगाए जाने वाले नए टैरिफ़ सभी देशों पर लागू होंगे.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप बुधवार को बड़े पैमाने पर नए आयात शुल्क लगाने वाले हैं, जिसे उन्होंने अमेरिका का "लिबरेशन डे" कहा है.
ये नए टैरिफ़ पहले से लागू टैरिफ़ के अलावा लगाए जाएंगे. जिनके तहत अमेरिका पहले ही एल्यूमीनियम, स्टील और गाड़ियों पर टैरिफ़ लगा चुका है.
इसके अलावा, चीन से आने वाले सभी उत्पादों पर भी अधिक टैरिफ़ लगाया जा रहा है.
ट्रंप के इस एलान के बाद से सोमवार को एशिया के शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई.
एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से ट्रंप ने कहा, "हम सभी देशों से शुरुआत करेंगे. असल में उन सभी से, जिनकी हम बात कर रहे हैं."
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार ट्रेड के मामले में दूसरे देशों के मुकाबले "ज्यादा उदार" और "दयालु" होगी.
पिछले हफ्ते ट्रंप ने यह संकेत दिया था कि वे अपने टैरिफ़ को थोड़ा कम कर सकते हैं.
ट्रंप प्रशासन के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने हाल ही में बताया कि ये टैरिफ़ मुख्य रूप से उन 10 से 15 देशों पर लागू होंगे, जिनका अमेरिका के साथ व्यापार घाटा सबसे ज्यादा है, लेकिन उन्होंने देशों के नाम नहीं बताए.
ट्रंप का मानना है कि ये टैरिफ़ अमेरिका को अनुचित व्यापार प्रतिस्पर्धा से बचाने के साथ-साथ बेहतर व्यापार समझौते हासिल करने में मदद करेंगे.
म्यांमार: भूकंप के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तुरंत मांगे इतने करोड़ रुपये, वजह भी बताई
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने म्यांमार में भूकंप से प्रभावित लोगों की मदद के लिए तुरंत आठ मिलियन डॉलर (करीब 66 करोड़ रुपये) की सहायता मांगी है.
इस भूकंप में लगभग 1,700 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हैं या बीमारियों के ख़तरे में हैं.
यूएन एजेंसी का कहना है कि अगले 30 दिनों में ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करने, घायलों का इलाज करने और बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए मदद की ज़रूरत है.
28 मार्च को म्यांमार में आए भूकंप के कारण लगभग 1700 लोगों की मौत हो चुकी है और 3,400 लोग घायल बताए जा रहे हैं.
म्यांमार में आए भूकंप के झटके उसके पड़ोसी देश थाईलैंड में भी महसूस किए गए थे. थाईलैंड में भूकंप के कारण मरने वालों की संख्या 18 बताई जा रही है.
अवैध प्रवासन से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, 40 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल, मार्क ईस्टन & हैरिसन जॉन्स, होम एडिटर, बीबीसी
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अवैध प्रवासन के ख़तरे से निपटने के लिए ब्रिटेन में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है. इस सम्मेलन में 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर इस मौके़ पर लोगों की तस्करी करने वाले गिरोहों को रोकने और देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर देंगे.
सोमवार से शुरू हो रहा यह सम्मेलन अपनी तरह का ऐसा पहला सम्मेलन माना जा रहा है.
इस सम्मेलन का मकसद अवैध प्रवासन का समाधान निकालना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है.
प्रवासन का मुद्दा ब्रिटेन सरकार के लिए बहुत अहम है.
विपक्षी पार्टियां कंज़र्वेटिव और रिफॉर्म यूके इस समस्या से सही तरीके से निपटने में नाकाम रहने का आरोप सत्ताधारी लेबर पार्टी पर लगा रही हैं.
बैठक से पहले, ब्रितानी सरकार ने घोषणा की है कि मानव तस्करी को रोकने और इस अपराध में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए 33 मिलियन पाउंड खर्च किए जाएंगे.
इस सम्मेलन में वियतनाम, अल्बानिया और इराक जैसे देशों के अधिकारी भाग लेंगे, जहां से बड़ी संख्या में प्रवासी ब्रिटेन आते हैं.
इसके अलावा, फ्रांस, चीन और अमेरिका के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे.
पाकिस्तान: पेशावर में कथित तौर पर इस्लाम धर्म अपनाने से मना करने पर हिंदू नागरिक की हत्या, बिलाल अहमद, बीबीसी उर्दू, पेशावर
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पाकिस्तान के पेशावर शहर में एक हिंदू नागरिक नदीम की गोली मारकर हत्या कर दी गई.
कथित तौर पर नदीम ने इस्लाम धर्म को अपनाने की मांग मानने से इनकार कर दिया था.
यह घटना पेशावर के पोस्टल कॉलोनी इलाके में हुई. शनिवार को जब नदीम अपना काम ख़त्म करके घर लौट रहे थे, उस दौरान उन पर हमला किया गया.
56 वर्षीय नदीम पेशे से एक सरकारी संस्थान में सफाई कर्मचारी थे. गोलीबारी के बाद संदिग्ध भागने में सफल रहा लेकिन बाद में पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया.
नदीम के भाई सागर अमीन ने अपनी एफ़आईआर में कहा है उनका भाई अपनी कॉलोनी में मौजूद था जब अभियुक्त मुश्ताक ने उस पर गोलियां चलाईं.
उन्होंने आगे कहा कि गोली लगने के बाद उनका भाई नदीम घायल हो गया था, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई.
एफ़आईआर के मुताबिक, आरोपी दो-तीन महीने से नदीम को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए कह रहा था और नदीम के मना करने के बाद उसने नदीम के सिर में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी.
भाना मारी पुलिस स्टेशन के एसएचओ अजमल हयात ने बीबीसी उर्दू को बताया कि हत्या के तुरंत बाद अभियुक्त फरार हो गया था. घटना के बाद डीएसपी सिटी यख तुत सर्किल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने 24 घंटे के भीतर मुश्ताक को चारसड्डा से गिरफ़्तार कर लिया.
एसएचओ के मुताबिक, प्रारंभिक जांच के दौरान अभियुक्त ने नदीम अमीन की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया है.
ट्रंप क्यों बोले- मैं पुतिन से बहुत गुस्सा हूं
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एनबीसी न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा कि वो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से काफ़ी गुस्सा और परेशान हैं.
ट्रंप ने कहा कि पुतिन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की विश्वसनीयता पर हमला किया है.
इस इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर पुतिन युद्ध विराम पर सहमत नहीं होते हैं तो वो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 50 फीसदी का ट्रैरिफ लगा सकते हैं.
ट्रंप बोले, “अगर रूस और मैं यूक्रेन में खूनखराबा रोकने पर समझौता नहीं कर पाते हैं और मुझे लगता है कि यह रूस की गलती है, तो मैं रूस से आने वाले सभी तेल पर अतिरिक्त ट्रैरिफ लगा दूंगा.”
ट्रंप के इस बयान पर अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
यूरोपीय नेताओं को चिंता थी कि ट्रंप यूक्रेन में युद्ध विराम पर बातचीत करते वक्त पुतिन के करीब जा रहे हैं.
हालांकि पिछले छह हफ्तों में, ट्रंप ने ज़ेलेंस्की से कई बार कड़ी मांगें कीं और पुतिन के पक्ष में कई बातें रखीं.
एनबीसी न्यूज़ के मुताबिक, ट्रंप ने 10 मिनट के एक फोन इंटरव्यू में कहा कि वह बहुत गुस्से में थे और परेशान थे, क्योंकि पुतिन ने ज़ेलेंस्की की विश्वसनीयता पर हमला किया.
हालांकि खुद ट्रंप ने ज़ेलेंस्की को तानाशाह कहा था और उनसे चुनाव कराने की मांग की थी.
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