'9/11 क़ानून' पर सऊदी अरब की चेतावनी

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सऊदी अरब ने ओबामा और अमरीका प्रशासन को ख़बरदार किया है कि अगर उन्होंने कोई ऐसा क़ानून या बिल मंज़ूर किया जिसके तहत कोई अमरीकी अदालत सऊदी अरब को 11 सितंबर के हमलों के लिए ज़िम्मेदार क़रार दे सकती है तो सऊदी अरब अमरीका में मौजूद अपने अरबों डॉलर की संपत्ति को बेच देगा.
अमरीकी अख़बार न्यूयार्क टाइम्स के मुताबिक़ ओबामा प्रशासन डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों को ये समझाने में लगा है कि वो सदन में इस तरह के बिल को रोकें.
अख़बार का कहना है कि इसके अलावा कुछ अरसे से सऊदी अरब के विदेश और क़ानून मंत्रालय और अमरीकी कांग्रेस में बहुत कहा सुनी हो रही है.
सऊदी अरब की तरफ़ से ये पैग़ाम व्यक्तिगत तौर पर विदेश मंत्री आदिल जबीर ने उस समय पहुंचाया था जब वो पिछले माह वाशिंगटन गए थे.
उन्होंने अमरीकी कांग्रेस को ये बताया था कि अगर सऊदी अरब को महसूस हुआ कि किसी नए क़ानून के तहत अमरीका में उसकी संपत्ति को फ़्रीज़ किया जा सकता है तो सऊदी अरब उसे बेचने पर मजबूर हो जाएगा.
इस समय सऊदी अरब के 750 अरब डॉलर अमरीकी ख़ज़ाने की सिक्यूरीटीज़ की शक्ल में मौजूद हैं.

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हालांकि वित्तीय मामलों के जानकारों का ख़्याल है कि सऊदी अरब इस तरह का कोई क़दम नहीं उठाएगा क्योंकि ऐसा करना उसके लिए आसान नहीं होगा. अगर वो ऐसा करता है तो इसका असर सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
लेकिन सऊदी अरब की इस तरह की धमकी से साफ़ है कि अमरीका और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ रहा है.
ओबामा प्रशासन को लगता है कि अगर इस तरह का कोई क़ानून पारित होता है तो इससे उन अमरीकियों के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है जो देश से बाहर हैं. इसलिए ओबामा प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है कि सऊदी अरब के ख़िलाफ़ जाने वाला बिल न बने.
ओबामा प्रशासन इस मामले पर कुछ इस क़दर जुटा है कि 11 सिंतबर 2001 में अमरीका पर हुए हमलों में मारे गए लोगों के परिवार वालों ने इसपर ग़म और ग़ुस्से का इज़हार किया है.
इन लोगों का मानना है कि ओबामा प्रशासन बराबर सऊदी अरब की तरफ़दारी कर रहा है. इन लोगों का मानना है कि 11 सिंतबर के हमलों में सऊदी अरब हुकूमत के कुछ लोगों ने अहम भूमिका निभाई थी.
अमरीकी राष्ट्रपति बुधवार को सऊदी अरब के दौरे पर जा रहे हैं जहां उनकी मुलाक़ात शाह सुलेमान और दूसरे अहम लोगों से होगी. हालांकि ये साफ़ नहीं है कि इन मुलाक़ातों में 11 सितंबर के संबंध में जिस क़ानून की बात हो रही है उसपर चर्चा होगी या नहीं.

न्ययार्क टाइम्स का कहना है कि इस संबंध में जब उन्होंने अमरीका में मौजूद सऊदी अरब के दूतावास से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने इसपर कुछ कहने से मना कर दिया.
सऊदी अरब बार-बार ये कहता रहा है कि 11 सिंतबर के हमलों से उसका कोई लेना देना नहीं था.
इसके अलावा अमरीका में सिंतबर 11 पर बनी जांच कमीशन ने भी कहा था कि उन्हें इस बात के कोई सीधे सबूत नहीं मिले हैं कि सऊदी हुकूमत ने किसी शख़्स ने व्यक्तिगत तौर पर कोई भूमिका निभाई थी.
लेकिन कुछ लोगों का कहना है कमीशन की रिपोर्ट में जिन शब्दों का प्रयोग किया गया है उनसे लगता है कि शायद सऊदी अरब हुकूमत के कुछ कम सीनियर लोगों ने इसमें कुछ भूमिका निभाई थी.
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