'सऊदी अरब में भी आईएस की विचारधारा का चलन'

इमेज स्रोत, Getty

शिया धर्मगुरु निम्र अल-निम्र के बेटे मोहम्मद अल-निम्र ने अमरीका और ब्रिटेन की आलोचना की है.

निम्र अल-निम्र को इस साल दो जनवरी को सऊदी अरब में फांसी दे दी गई थी. उन्होंने 2011 में सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में बड़े पैमाने पर हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों का खुलेआम समर्थन किया था.

मोहम्मद अल-निम्र का कहना है कि पश्चिमी देश सऊदी अरब की सरकार पर अधिक दबाव डालने में नाकाम रहे हैं.

उन्होंने सऊदी को समर्थन देने की अमरीका और ब्रिटेन की नीति को अल्पकालिक राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित बताया.

मोहम्मद अल-निम्र ने बीबीसी से कहा कि सऊदी अरब के साथ अमरीकी और ब्रितानी गठजोड़ वहां की जनता के दीर्घकालिक हित में नहीं हैं.

इमेज स्रोत, EPA

उन्होंने कहा, "अमरीका और ब्रिटेन की सरकार से मैं कहना चाहता हूं कि भले उनके हित एक हों, लेकिन वे सऊदी अरब पर ज़्यादा दबाव डालें. कई बार हमारे हितों का पैमाना संकुचित होता है. यदि हम अपनी जनता के हितों के बारे में सोचें, जैसे कि अमरीका की जनता और ब्रिटेन की जनता, तो पाएंगे कि अमरीका और ब्रिटेन का यह क़दम दीर्घकाल में जितना सरकार के लिए फ़ायदेमंद होगा उसकी तुलना में वहां की जनता के हितों के लिए हानिकारक साबित होगा."

मोहम्मद अल-निम्र के मुताबिक़ ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी संगठन अपनी गतिविधियों को उचित ठहराने के लिए जिस विचारधारा का इस्तेमाल करते हैं, सऊदी अरब में भी वही रूढ़िवादी, वहाबी इस्लाम चलन में है.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>