'ईरान के परमाणु कार्यक्रम के दरवाज़े बंद'

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अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आगाह किया है कि ईरान के साथ परमाणु समझौते के बगैर मध्य पूर्व में और युद्ध होने का ख़तरा ज़्यादा होगा.
उन्होंने अपने विरोधियों से कहा कि अगर उनके पास बेहतर विकल्प है तो वो उसे पेश करें.
उनके इस बयान को अमरीकी कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी के कुछ प्रतिनिधियों की ओर किया गया इशारा समझा जा रहा है.
वाशिंगटन में हुई एक पत्रकार वार्ता में ओबामा ने कहा है कि अगर ईरान से समझौता नहीं होता तो मध्य पूर्व में अन्य देश भी अपने परमाणु हथियार बनाने के बारे में सोचने पर मजबूर होते.
ओबामा ने कहा, "इस समझौते के साथ ही हमने परमाणु कार्यक्रम के ईरान के दरवाज़े बंद कर दिए हैं, कई सालों तक ईरान का परमाणु कार्यक्रम सीमित रहेगा. अगर समझौता नहीं होता तो ईरान परमाणु बम बनाने के नज़दीक पहुँच सकता है. अब हम ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जाँच कर सकेंगे."
सकारात्मक बातचीत कारगर

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ईरान ने अमरीका के साथ मंगलवार को परमाणु समझौता किया है. ईरान ने कहा है कि इस समझौते को मंज़ूरी देने संबंधी प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अगले हफ्ते वोटिंग होगी.
समझौते के तहत ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को सीमित करेगा और बदले में ईरान पर लगे प्रतिबंध हटा दिए जाएँगे.
छह अन्य देशों के साथ मिलकर हुए इस समझौते पर अमल नवंबर से शुरू होगा. ये जानकारी ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद ज़रीफ ने दी.
ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि ये समझौता साबित करता है कि सकारात्मक तरीके से बातचीत की जाए तो वो कारगर होती है.
हालांकि इसराइल के प्रधानमंत्री इसे ऐतिहासिक भूल करार दे चुके हैं.
ओबामा ने उम्मीद जताई है कि समझौते के बाद ईरान के रवैये में बदलाव आएगा.
उन्होंने चरमपंथ को समर्थन और मध्य पूर्व में स्थायित्व को खतरा पैदा करने की ईरान की कथित कोशिशों का हवाला दिया.
'राजनीति नहीं तथ्य देखें'

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ओबामा ने अमरीकी कांग्रेस के सदस्यों से कहा है कि वे राजनीति के आधार पर नहीं बल्कि तथ्यों के आधार पर फ़ैसला करें.
कांग्रेस के कई सदस्यों ने ईरान के साथ परमाणु समझौते का विरोध किया है.
इस समझौते पर विचार करने के लिए कांग्रेस के पास दो महीने का वक़्त है.
कूटनीतिज्ञों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि अमरीका एक मसौदा तैयार करेगा जिसमें ईरान पर प्रतिबंध का प्रावधान हटा दिया जाएगा लेेकिन अगर ईरान ने वादाखिलाफ़ी की तो प्रतिबंध फिर से लागू हो जाएँगे.
सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य देश अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन इस वार्ता में शामिल रहे.
ये देश सुरक्षा परिषद में पेश किए जाने वाले प्रस्ताव पर वीटो कर सकते हैं. इनके अलावा जर्मनी भी वार्ता में शामिल है.
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