ब्रिटेन में भारतीय छात्र 50 फ़ीसदी घटे

- Author, अमरेश द्विवेदी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन
भारत से विदेश जाकर पढ़नेवालों के लिए ब्रिटेन एक आकर्षक डेस्टिनेशन रहा है. इसकी वजह रही है यहां की विश्व स्तरीय शिक्षा व्यवस्था और डिग्री हासिल करने के बाद यहां मिलने वाला संभावित रोज़गार.
लेकिन पिछले चार पांच सालों में उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन आने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में क़रीब 50 फ़ीसदी की गिरावट आई है.
छात्रों की संख्या में आई इस गिरावट की पड़ताल करने के लिए मैं लंदन के सोआस यानी स्कूल ऑफ़ ओरिएंटल एंड ऐफ्रीकन स्टडीज़ के कैंपस में पहुंचा जहां दशकों से भारतीय छात्रों की एक ख़ासी तादाद है.
भारतीय छात्र यहां मोटी फ़ीस देकर शिक्षा हासिल करने आते हैं. इनका मानना है कि ब्रिटेन में उच्च शिक्षा का स्तर बहुत अच्छा है, लेकिन हाल के वर्षों में फ़ीस में हुई बढ़ोतरी और वीज़ा नियमों में बदलाव के संकेत ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
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छात्र परेशान
सोआस में क़ानून की पढ़ाई कर रहे आदित्य पाठक का कहना है, “मैं यहां आता हूं कि मैं पढ़ाई कर सकूं और कुछ साल प्रैक्टिस करके वापस जाऊं. कम से कम कुछ साल प्रैक्टिस कर सकूं क्योंकि यहां पोटेंशियल है. अगर आप वो पोटेंशियल ही ख़त्म कर रहे हो तो इससे तो कोई भी हतोत्साहित हो सकता है.”
वहीं एक छात्रा निमिषा सारा फ़िलिप कहती हैं, “फीस में बढ़ोतरी हुई है और पाउंड और रुपए के एक्सचेंज रेट की वजह से भी ज़्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं. अब डिग्री हासिल करने के बाद काम करने के लिए वीज़ा में भी दिक्कत हो रही है जो एक बड़ी समस्या है.”

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अगर आंकड़ों की बात करें तो ब्रितानी संस्था हायर एजुकेशन स्टैटिस्टिक्स एजेंसी (एचईएसए) के मुताबिक पिछले कुछ सालों में ब्रिटेन में आनेवाले भारतीय छात्रों की संख्या में तेज़ी से गिरावट देखने को मिली है. संस्था के अध्ययन के मुताबिक साल 2009-2010 में यहां 38,500 भारतीय छात्र पढ़ने आए थे. साल 2011-12 में यहां 29,900 भारतीय छात्र पढ़ने आए, वहीं 2013-14 में इसमें और गिरावट हुई और छात्रों की संख्या 19,750 रह गई.
ब्रिटेन में चिंता
ब्रितानी विश्वविद्यालयों पर नज़र रखनेवाली संस्था यूनिवर्सिटीज़ यूके की मुख्य कार्यकारी निकोला डेंड्रिज इस गिरावट से चिंतित हैं और कहती हैं, “संभवत: ये गिरावट फ़ीस की वजह से उतनी नहीं जितनी कि वीज़ा से जुड़े परसेप्शन से है जो सरकार दे रही है. हम जानते हैं कि फ़ीस को लेकर भारतीय छात्र परेशान हैं, लेकिन हम उनसे कहना चाहते हैं कि उनके यहां आने में कोई अड़चन नहीं है.”
निकोला बताती हैं कि ब्रिटेन आनेवाले भारतीय छात्र यहां की पढ़ाई से 90 फ़ीसदी तक संतुष्ट पाए गए हैं. ऐसे में अगर ये छात्र ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूरोप जैसे दूसरे देशों का रुख कर रहे हैं तो ब्रिटेन के लिए ये वाक़ई गंभीर चिंता का विषय है.

यूनिवर्सिटीज़ यूके के मुताबिक ब्रितानी सरकार के कुछ वक्तव्यों को भी भारत में ग़लत समझा गया और ये अर्थ लगाया गया कि ब्रिटेन शायद अंतरराष्ट्रीय छात्रों का अब पहले की तरह स्वागत नहीं करना चाहता है और इसी वजह से वीज़ा नियमों को सख्त बनाने जैसे क़दम उठाए गए हैं.
ब्रिटेन छोड़कर दूसरे देशों का रुख कर रहे भारतीय छात्रों की वजह से ब्रिटेन को आर्थिक नुक़सान भी हो रहा है. यूनिवर्सिटीज़ यूके के एक आकलन के मुताबिक भारतीय छात्रों की वजह से केवल साल 2011-12 में ब्रिटेन को क़रीब 22 करोड़ पाउंड का नुक़सान हुआ.
ख़ज़ाने को हो रहे नुक़सान को देखते हुए ब्रितानी सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वो वीज़ा नियमों को उदार बनाए ताकि भारतीय छात्रों के भरोसे को लौटाया जा सके और शिक्षा जगत में ब्रिटेन का दबदबा बरकरार रहे.
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