आईएस अपना रहा है 'आतंकित करने की रणनीति'

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- Author, शिराज़ महर
- पदनाम, सीनियर फ़ेलो, आईसीएसआर, किंग्स कॉलेज लंदन
चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट ने जॉर्डन के पायलट मोएज़ अल-मसासबेह को जलाकर मार डाला.
अगर इस्लामिक स्टेट के बर्बर मानकों पर भी देखा जाए तो मोएज़ की हत्या वीभत्स है. हत्या करने से पहले 27 वर्षीय मोएज़ को उस जगह पर घुमाया गया जहाँ अमरीकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के हवाई हमले हुए थे.
उसके बाद उन्हें एक धातु के पिंजड़े में रखकर जला दिया गया. यह भयावह दृश्य था.
मोएज़ को जलाए जाने के वीडियो में परपीड़ा में सुख पाने की भावना छिपी हुई है. ऐसे वीडियो दुनिया को झटका देने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं.
इनका मक़सद दुनिया का ध्यान खींचना था. जो इसने किया. वीडियो ज़ारी होने के एक घंटे के अंदर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसके बारे में एक बयान जारी किया.
जॉर्डन के किंग अब्दुल्लाह अमरीका की अपनी यात्रा बीच में छोड़कर स्वदेश लौट गए.
आईएस की मानसिकता

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इस घटना के बाद से यह सवाल हर तरफ़ पूछा जाने लगा कि आईएस ऐसा कैसे कर सकता है? आईएस की मानिसकता को समझने के लिए हमें इस्लामी या शरिया क़ानून को समझना होगा.
आईएस 'क़िसास' के क़ानून में यकीन करता है. मोटे तौर पर इसका अर्थ है बराबर का बदला. दूसरे शब्दों में कहें तो यह 'आँख के बदले आँख' वाले नियम का इस्लामी संस्करण है.
इस्लामी क़िसास ख़ासकर हत्या, नरसंहार या शारीरिक हिंसा (किसी का अंग भंग करना) इत्यादि से संबंधित है. इसके तहत पीड़ित न्याय पाने के लिए बराबर का बदला ले सकता है.
आग में जलाकर 'सज़ा देना' मुसलमानों के बीच भी विवाद का विषय है. कई मुस्लिम इसे हर हाल में अनुचित मानते हैं.
दरअसल, मुसलमानों में इसे लेकर इतनी तेज़ प्रतिक्रिया हुई कि आईएस सदस्यों को अपने कृत्य के बचाव में सामने आना पड़ा.
रिहाई की संभावना नहीं थी

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मोएज़ के पकड़े जाने के बाद ही अंदेशा था कि उन्हें मार दिया जाएगा. उन्हें भीड़ के हाथों मरवाने की भी कोशिश की गई. सोशल मीडिया पर पूछा गया कि उन्हें किस तरह मारा जाना चाहिए.
इसलिए उनके बचने की संभावना बहुत कम थी. आईएस बस जापानी बंधक केंजी गोटो को अल-क़ायदा के आत्मघाती हमलावर साजिदा अल-रिशावी के बदले छोड़ने को तैयार था. लेकिन जॉर्डन के अधिकारी चाहते थे कि आईएस मोएज़ को भी छोड़े.
जॉर्डन ने जब इस बात का सबूत माँगा कि आईएस के क़ब्ज़े में जो बंधक हैं वो सही-सलामत हैं तो इस बात की आशंका जताई गई कि उनकी शायद पहले ही हत्या की जा चुकी है.
माना जा रहा है कि आईएस ने मोएज़ की हत्या काफ़ी पहले कर दी थी और वीडियो जारी करने के लिए वो सही मौक़े का इंतज़ार कर रहा था.
भय की रणनीति

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सभी सेनाएँ विरोधियों के ऊपर बढ़त हासिल करना चाहती हैं. आम तौर पर यह बेहतर हथियार इत्यादि हासिल करके किया जाता है.
लेकिन आईएस जानता है कि वो हथियारों में मुक़ाबला नहीं कर सकता. इसलिए वो मंगलवार को जारी किए गए वीडियो जैसी चीज़ों से आतंकित और स्तब्ध करने की कोशिश कर रहा है.

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जॉर्डन में इस वीडियो को लेकर काफ़ी ग़ुस्सा है, लेकिन कई लोग यह भी पूछ रहे हैं कि जॉर्डन आईएस के ख़िलाफ़ गठबंधन देशों के हवाई हमलों में शामिल क्यों हो रहा है.
संयुक्त अरब अमीरात पहले ही अपने पायलटों की सुरक्षा का हवाला देकर गठबंधन सेना से बाहर हो चुका है.
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