भारत को 'ललकारते' पाकिस्तान के अख़बार

- Author, अशोक कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत और पाकिस्तान को साझा तौर पर शांति का नोबेल मिलना हफ़्ते की एक बड़ी ख़बर रही, लेकिन दोनों देशों के उर्दू मीडिया में सरहद पर जारी तनाव छाया है.
पाकिस्तानी अख़बार इंसाफ़ का संपादकीय है-दुश्मनों के ख़िलाफ़ एकता और सहमति की ज़रूरत.
अख़बार ने एक तरफ़ भारत-पाक सीमा पर गोलाबारी में 13 पाकिस्तानियों के मारे जाने की बात की है तो क़बायली इलाक़ों में ईद की छुट्टियों के दौरान अमरीकी ड्रोन हमलों में 18 लोगों की मौत का मुद्दा भी उठाया है.
अख़बार कहता है कि अमरीका और भारत पाकिस्तान की जंगी क्षमताओं को परखना चाहते हैं. ऐसे में अगर उसके ख़िलाफ़ युद्ध शुरू किया गया तो परमाणु शक्ति के इस्तेमाल को नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता.
'उल्टा चोर...'
नवाए वक़्त ने लिखा है कि मोदी और उनके रक्षा मंत्री पाकिस्तान पर दहाड़ रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ पूरी तरह ख़ामोश हैं.
अख़बार ने जहां भारत को 'मुंह तोड़ जवाब देने' के लिए पाकिस्तानी फ़ौज की तारीफ़ की है वहीं सरकार को भारत से हर तरह के संपर्क तोड़ने की नसीहत दी है.

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रोज़नामा वक़्त ने पाकिस्तान पर संघर्षविराम के उल्लंघन के भारत के आरोपों पर लिखा है- उल्टा चोर कोतवाल को डांटे.
अख़बार कहता है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो भारत को रोके, वरना भारत को ही इसके अप्रत्याशित नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं.
औसाफ़ ने अपने संपादकीय में खुले तौर पर भारत को युद्ध की चेतावनी दी गई है और शीर्षक दिया है –मोदी जिस स्तर पर चाहे जंग करके देख लें, वहीं दैनिक उम्मत का संपादकीय भारत भारी तबाही को दावत न दे.
रंग लाती है मेहनत
जंग ने मलाला यूसुफ़ज़ई को नोबेल मिलने को पाकिस्तान के लिए राष्ट्रीय गौरव बताया है.
अख़बार कहता है कि 17 साल की मलाला को इतनी छोटी उम्र में नोबेल मिलना साबित करता है कि बदतरीन हालात में भी मेहनत और नाइंसाफियों के ख़िलाफ़ संघर्ष ज़रूर रंग लाता है.

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रोज़नामा एक्सप्रेस लिखता है कि ये सही है कि पाकिस्तान में एक ऐसा वर्ग है जो मलाला की आलोचना करता है, लेकिन ज़्यादातर लोग मलाला को पसंद करते हैं और लड़कियों को शिक्षा देने की उनकी मुहिम के समर्थक हैं.
'गेम प्लान'
रुख़ भारत का करें तो मलाला के साथ साझा तौर पर नोबेल जीतने वाले कैलाश सत्यार्थी सभी अख़बारों के पहले पन्ने पर मुस्कराते नजर आए, लेकिन यहां भी ज़्यादा चर्चा सीमा पर तनाव की है.

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हिंदोस्तान एक्सप्रेस ने सीमा पर तनाव के लिए पाकिस्तान की तरफ़ से गोलाबारी को ज़िम्मेदार बताया है और इसके चलते सरहद के पास रहने वाले लोगों की मुश्किलों का ज़िक्र किया है.
अख़बार कहता है कि पाकिस्तान में सरकार कुछ सोचती है तो फ़ौज कुछ और जबकि आईएसआई का कुछ तीसरा ही गेम प्लान होता है.
अख़बार कहता है कि संघर्षविराम का उल्लंघन कर घुसपैठ कराना पाकिस्तान की पुराना तरीक़ा है.
वहीं हमारा समाज कहता है कि पहले भी ऐसा कई बार हुआ है जब पाकिस्तान की सरकार भारत के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाने की कोशिश करती है तो वहां की सेना सरहद पर अमानवीय कार्रवाइयों को अंजाम देती है.
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