घरों को वापस लौट रहे हैं फलस्तीनी

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अमरीका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने बीबीसी से बातचीत में इसराइल और फ़लस्तीन से आग्रह किया है कि वो गज़ा में जारी 72 घंटों के संघर्षविराम का फ़ायदा उठाएं और किसी स्थायी समझौते की ओर कदम बढ़ाएं.
जॉन केरी ने कहा कि गज़ा में स्थिति को देखते हुए 'दो देशों' के हल के बारे में बातचीत की जा सकती है. आठ जुलाई से शुरू हुए इस जंग में अभी तक 1900 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
उधर इसराइल और फलस्तीनी चरमपंथी गुटों के बीच 72 घंटे के संघर्ष विराम के पहले दिन ग़ज़ा में हज़ारों फलस्तीनी संयुक्त राष्ट्र के शिविरों से वापस अपने घरों को लौट रहे हैं.
इसराइली सेना का कहना है कि सारे सुरक्षाबल हटा लिए गए हैं और ग़ज़ा में सुरंगें तबाह करने का उसका मुख्य मक़सद पूरा हो गया है.
लेकिन हमास ने इसराइली सैन्य कार्रवाई को सौ फ़ीसदी नाकाम बताया है.

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संघर्ष विराम की मध्यस्थता करने वाला मिस्र दोनों पक्षों के बीच बातचीत आयोजित करवाना चाहता है जिससे हिंसा स्थायी तौर पर ख़त्म हो जाए.
मंगलवार को स्थानीय समयानुसार सुबह आठ बजे संघर्ष विराम शुरु होने तक इसराइल और फलस्तीनियों के हमले जारी रहे.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संघर्ष विराम का स्वागत किया है.

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ग़ज़ा शहर में मौजूद बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशंस का कहना है कि वहां अब शांति है, लोग अपने घरों को लौट रहे हैं और चार हफ़्ते में हुई तबाही का जायज़ा ले रहे हैं.
उत्तरी शहर बेत लाहिया के निवासी ज़ुहैर हजालिया ने रॉयटर्स को बताया कि उनका घर तबाह हो गया है. उन्होंने कहा, "यहां सब तबाह हो गया है. मैंने कभी नहीं सोचा था कि वापस लौटने पर मुझे भूकंप क्षेत्र मिलेगा."

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वहीं सीमा के उस पार इसराइल के कफ़ार अज़ा किबुट्ज़ में 50 साल से रह रहीं इसरायला योएद का कहना है कि उन्हें हमास पर यक़ीन नहीं है लेकिन उन्हें विश्वास था कि संघर्ष विराम जारी रहेगा.
योएद ने एएफ़पी को बताया, "मैं मानती हूं कि हम बातचीत से हालात बेहतर बना सकते हैं. मैं यहां से नहीं जाऊंगी, मैं डरती नहीं हूं."

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एक महीने से चल रहे संघर्ष में अब तक 1800 से ज़्यादा फ़लस्तीनी और 67 इसराइली सैनिक मारे जा चुके हैं.
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