मिस्रः 183 ब्रदरहुड समर्थकों की फ़ांसी पर मुहर

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मिस्र की एक अदालत ने मुस्लिम ब्रदरहुड के 183 समर्थकों की मौत की सज़ा क़ायम रखी है. वकीलों के अनुसार, इन पर 2013 में एक पुलिस स्टेशन पर हमला करने का आरोप है.
गत अप्रैल में एक न्यायाधीश ने 683 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई थी, जिसकी बड़े पैमाने पर आलोचना हुई थी.
जिन लोगों की सज़ा को बरकरार रखा गया है, उनमें इस प्रतिबंधित संगठन के नेता मोहम्मद बादेई भी शामिल हैं. इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ जल्द ही अपील किए जाने की संभावना है.
गत दिसंबर से अब तक सैन्य समर्थित सरकार सैकड़ों विरोधियों को मौत की सज़ा दे चुकी है.
<link type="page"><caption> व्यापक प्रदर्शनों के</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131006_egypt_clashes_sm.shtml" platform="highweb"/></link> बाद जब जुलाई 2013 में पूर्व <link type="page"><caption> राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/12/131218_morsi_egypt_charges_ap.shtml" platform="highweb"/></link> को सेना द्वारा हटाया गया तो प्रशासन ने इस्लामी समर्थकों पर कड़ी कार्रवाई की थी. मोर्सी ब्रदरहुड से जुड़े हुए हैं.
काहिरा के दक्षिण में स्थित मिन्या क़स्बे की एक अदालत ने शनिवार को यह फ़ैसला दिया.
अपील की संभावना

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चार अभियुक्तों को 15 से लेकर 25 वर्ष की जेल की सज़ा सुनाई गई और बाकियों को दोषमुक्त क़रार दिया गया.
इन अभियुक्तों पर मिन्या प्रांत में 14 अगस्त 2013 को पुलिसकर्मियों की हत्या और हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया था. उसी दिन पुलिस ने काहिरा में हुए एक संघर्ष में मुस्लिम ब्रदरहुड के सैकड़ों समर्थकों को मार डाला था.
अभियुक्तों पर तोड़फोड़ और लोगों को आतंकित करने जैसे कई आरोप लगे थे. 110 लोगों की अनुपस्थिति के बावजूद सभी 683 लोगों पर मुक़दमा चलाया गया.
बचाव पक्ष के वकीलों ने इस सामूहिक मुक़दमे को 'हास्यास्पद' बताया था और कहा था कि अभियुक्तों में अधिकांशतः संघर्ष के दौरान मौजूद नहीं थे.
<link type="page"><caption> मिस्र: मोर्सी समर्थक फिर सड़कों पर उतरे </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130831_egypt_friday_protest_ml.shtml" platform="highweb"/></link>

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अप्रैल में चले इस मुक़दमे में मौत की सज़ा को मिस्र के सबसे वरिष्ठ इस्लामी धर्मगुरु, ग्रैंड मुफ़्ती के पास भेजा गया था.
अंतिम निर्णय लेने से पहले अदालत को उनके नज़रिए का संज्ञान लेना था.
हालांकि संवाददाताओं का कहना है कि मुक़दमे के मिस्र की अपील अदालत में ले जाए जाने की संभावना है.
पिछले साल हुए जानलेवा संघर्षों के एक अलग मामले में, गुरुवार को बादेई और 13 अन्य लोगों की मौत की सज़ा की संस्तुति की गई थी.
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