यहूदियों का नरसंहार 'सबसे जघन्य अपराध'

महमूद अब्बास

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फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने यहूदियों के नरसंहार को आधुनिक इतिहास का 'सबसे जघन्य अपराध' क़रार दिया है.

यह टिप्पणी इसराइल की ओर से मारे गए यहूदियों की याद में मनाए जाने वाले स्मृति दिवस के मौक़े पर आया है.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने कहा, "अब्बास यहूदियों के नरसंहार को भयानक नहीं कह सकते हैं क्योंकि ऐसा करने वालों को वो गले लगाते हैं."

इसराइल ने हाल ही में अब्बास के संगठन फ़तह और इस्लामिक प्रतिद्वंदी संगठन <link type="page"><caption> हमास</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/04/140424_netanyahu_hamas_abbas_an.shtml" platform="highweb"/></link> के बीच हुए समझौते का विरोध किया है.

हमास वैचारिक रूप से यहूदी नरसंहार की आलोचना से परहेज़ करता रहा है और 2009 में उसने ग़ज़ा में संयुक्त राष्ट्र की ओर से चलाए जा रहे एक स्कूल में इसे पढ़ाए जाने का विरोध किया था.

वार्ता

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाज़ियों ने लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी थी.

अपने बयान में अब्बास ने पीड़ितों के परिवारों और नाज़ियों के हाथों मारे गए कई अन्य बेगुनाह लोगों के साथ अपनी सहानुभूति व्यक्त की.

उन्होंने कहा, "यहूदियों का नरसंहार जातीय भेदभाव और नस्लवाद की अवधारणा पर आधारित था जिसे फ़लस्तीन दृढ़ता से अस्वीकार करता है."

उन्होंने इसराइल सरकार से "स्मृति दिवस के आयोजन" को दोनों पक्षों के बीच "व्यापक शांति" के समाधान तलाशने के रूप में मनाने का आग्रह किया.

येरूशलम से बीबीसी के योलांडे नेल की रिपोर्ट के मुताबिक़ अब्बास का बयान यहूदियों के नरसंहार पर अब तक का सबसे मज़बूत सार्वजनिक बयान है और इसराइल के लोगों के अविश्वास को दूर करने की कोशिश लगती है.

गुरूवार को इसराइल की सुरक्षा कैबिनेट ने फ़तह और हमास के बीच हुए समझौते के मद्देनज़र फ़लस्तीनियों से शांति वार्ता को स्थगित करने का निर्णय लिया था.

अमरीका और यूरोपीय संघ की तरह इसराइल भी हमास को एक चरमपंथी संगठन मानता है.

नेतनयाहू ने रविवार को सीएनएन से कहा, "इसराइल, हमास समर्थित सरकार के साथ बातचीत नहीं करेगा."

हालांकि अब्बास ने कहा कि वह अब भी शांति वार्ता करने के पक्ष में है.

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