ईरान: मां ने बेटे के क़ातिल को किया माफ़

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- Author, बोज़ोरगमेर शराफेदीन
- पदनाम, बीबीसी फारसी
बुधवार की सुबह ईरान के उत्तरी शहर नूर में बेलाल फांसी के फंदे पर चढ़ने के लिए तख़्ते की ओर बढ़ रहे हैं. हालांकि अभी सूर्योदय नहीं हुआ है. इसके बाद भी इस घटना को देखने के लिए जेल के बाहर सैकड़ों लोग जमा हैं.
बेलाल की माँ और बहनें दहाड़ें मारकर रो रही हैं. लेकिन जब वह लकड़ी के स्टूल की ओर बढ़ रहे होते हैं तो आँख पर पट्टी बंधी होने की वजह से वो उन्हें देख नहीं पाते हैं.
भीड़ में से कुछ लोग चिल्लाने लगते हैं, ''उसे माफ़ कर दो, उसे माफ़ कर दो.'' वे लोग पीड़ित के परिवार से उसे माफ़ कर देने की अपील करते हैं.
क़त्ल की वारदात
सात साल पहले एक झगड़े में बेलाल ने अब्दुल्लाह होस्नीज़ादेह की छूरा घोंपकर हत्या कर दी थी. उस समय वह 19 साल और अब्दुल्लाह की उम्र 17 साल थी.
सुरक्षा गार्ड फांसी के फंदे को बेलाल के गले में लगाते हैं. अब वह ज़ोर-ज़ोर से रोने लगते हैं. तभी अब्दुल्लाह की माँ बेलाल की ओर बढ़ती हैं और उनके चेहरे पर एक तमाचा जड़ देती हैं.

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यह देखकर वहाँ मौजूद लोग हैरान हो जाते हैं. वह लोगों के सामने बेलाल के गले ले फांसी का फंदा निकाल देती हैं. वह अपने बेटे के हत्यारे को माफ़ कर के उसका जीवन बचा लेती हैं. यह देखकर वहाँ मौजूद पुलिस वाले भी सुबकने लगते हैं.
वो कहती हैं कि उन्होंने एक सपना देखा था, जिसमें उनके मृत बेटे ने उनसे बदला न लेने के लिए कहा था.
ईरान के शरिया क़ानून में क़त्ल और कुछ अन्य अपराधों के लिए मौत की सज़ा का प्रावधान है. लेकिन पीड़ित परिवार के पास 'ब्लड मनी' यानि पैसा लेकर दोषी को माफ़ करने का अधिकार है.
पिछले कई महीनों से कई प्रतिष्ठित लोग बेलाल को बचाने के अभियान में शामिल रहे हैं. उन्होंने पीड़ित के परिजनों को मुआवज़ा देने के लिए पैसे जुटाना शुरू किया था.
अदेल फरदौसीपुर खेलों के एक मशहूर टीवी प्रस्तोता हैं, बेलाल की फांसी से ठीक पहले ही उन्होंने अपने शो में यह मुद्दा उठाया था.
दर्शकों से अपील
उन्होंने दर्शकों से अपील की थी कि वो अब्दुल्लाह होस्नीज़ादेह के परिवार से बेलाल को माफ़ कर देने के लिए कहें. इसके बाद क़रीब दस लाख लोगों ने इस शो में एसएमएस भेजकर अभियान को समर्थन दिया.

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अब्दुल्लाह के पिता ग़नी होस्नीज़ादेह एक पूर्व फ़ुटबॉल खिलाड़ी हैं. ईरान के कई फ़ुटबॉल खिलाड़ियों ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फ़ोन किया.
अंतत: वो और उनकी पत्नी बेलाल को माफ़ कर देने के लिए सहमत हो गए. उन्होंने कहा कि मुआवज़े में मिले पैसे से वो अपने बेटे के नाम पर एक फ़ुटबॉल स्कूल खोलेंगे.
लेकिन ईरान में मौत की सज़ा पाए अन्य लोग बेलाल की तरह ख़ुशक़िस्मत नहीं हैं.
बेहनूद शोजई को 2009 में इविन जेल में फांसी दे दी गई थी, जब वो 21 साल के थे. हालांकि उनका जीवन बचाने के लिए कई ईरानी अभिनेत्रियों ने अभियान चलाया था.
बेहनूद जब 17 साल के थे तो उन्हें एक लड़के की हत्या का दोषी पाया गया था. लेकिन पीड़ित परिवार ने उन्हें माफ़ करने से इनकार कर दिया था.
फांसी की सज़ा देने के मामले में ईरान दुनिया में दूसरे स्थान पर है.
वहाँ सार्वजनिक रूप से फांसी की सज़ा देना आम बात है, क्योंकि सरकार मानती है कि यह दूसरों के लिए उदाहरण है.
क़ानून की आलोचना

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ईरान के वकील अफ़रोज़ मागजी कहते हैं कि इतनी अधिक फांसी की सज़ाएं 'किसास' नाम की एक क़ानूनी अवधारणा की वजह से हैं. यह क़ानून आँख के बदले आँख पर आधारित है. यह पीड़ितों को बदला लेने का अधिकार देता है.
वो कहते हैं, ''ईरान का क़ानून पीड़ित के परिवार को किसी और व्यक्ति की हत्या करने का अधिकार देता है.''
वो कहते हैं, ''व्यक्ति को जीने का अधिकार है. किसी भी नागरिक को किसी और व्यक्ति का जीवन लेने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए.''
बेलाल का जीवन बचाने के बाद उनके लिए अभियान चलाने वालों को उम्मीद है कि वो और लोगों का जीवन बचा पाएंगे.
अब उनका ध्यान रियानेह जब्बारी के मामले पर है, उन्हें भी फांसी की सज़ा सुनाई गई है. उन्होंने 2007 में एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी. उनका कहना है कि वह व्यक्ति उनका बलात्कार करना चाहता था और उन्होंने आत्मरक्षा में यह क़दम उठाया.
सज़ा के ख़िलाफ़
ऑस्कर विजेता ईरानी फ़िल्मकार असग़र फ़रहदी ने पीड़ित परिवार से 26 साल की इस महिला को मानवता के आधार पर माफ़ कर देने की अपील की है.
अपने पत्र में फ़रहदी ने लिखा है कि रियानेह जब बच्ची थी तो उन्होंने उनकी फ़िल्म में एक छोटा सी भूमिका की थी.

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ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत अहमद शाहिद ने इस हफ़्ते रियानेह की फांसी की सज़ा को रोकने की अपील की है.
इस साल 13 मार्च को प्रकाशित एक रिपोर्ट में उन्होंने ईरान में बच्चों को फांसी की सज़ा देने की आलोचना करने के साथ ही साथ उन मामलों में फांसी की सज़ा देने की आलोचना की जिन्हें अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के तहत गंभीर अपराध नहीं मना जात है.
बेलाल और रियानेह के मामलों ने फांसी की सज़ा को लेकर पूरे ईरान में बहस छेड़ दी है, ख़ासकर सोशल मीडिया पर.
ईरानी पत्रकार साइमक बाहरी ने अपने ब्लॉग में बलाल को मिली माफ़ी की सरहाना की है. समाज की एकजुटता की तारीफ़ करते हुए उन्होंने फांसी की सज़ा के ख़िलाफ़ और चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा है.
ईरान के मशहूर फ़िल्मकार तहमिनेह मिलानी बहुत सालों से अपनी फ़िल्मों से हुई कमाई से पीड़ित परिवारों को ब्लड मनी का एक हिस्सा देते रहे हैं जिससे की दोषियों को बचाया जा सके.
उन्होंने बीबीसी से कहा कि बेलाल के मामले में मिली सफलता से क़ानून में बदलाव लाने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा, ''लोगों को अपने प्रभाव को गंभीरता से लेना चाहिए. हर दस्तख़त एक व्यक्ति की क़िस्मत को बदल सकता है.''
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