ईरान ने अपना यूरेनियम भंडार आधा किया

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विश्व का परमाणु प्रहरी माने जाने वाली अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) का कहना है कि साल 2014 की शुरूआत में हुए एक समझौते का पालन करते हुए ईरान ने अपने आधे यूरेनियम भंडार को निष्क्रिय कर दिया है.
आईएईए ने विश्व की छह शक्तियों के साथ हुए समझौते के अनुसार ईरान के यूरेनियम संवर्द्धन की जांच के दौरान ऐसा पाया.
विश्व की छह शक्तियों- अमरीका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फांस और जर्मनी- को इस बात की आशंका है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्द्धन का इस्तेमाल परमाणु बम बनाने के लिए कर सकता है इसलिए वे चाहती हैं कि ईरान इसमें कटौती लाए.
परमाणु बम कार्यक्रम
ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम एक शांतिपूर्ण कार्यक्रम है. ईरान यूरोपीय संघ और अमरीकी प्रतिबंधों में आंशिक छूट मिलने के बदले समझौता करने के लिए तैयार हो गया था.
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने एक गोपनीय रिपोर्ट में ये खुलासा किया है कि ईरान ने यूरेनियम के उच्च स्तरीय संवर्द्धित संचित भंडार के आधे हिस्से को निष्क्रिय कर दिया है.

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वियना में बीबीसी के बेथनी बेल का कहना है कि ईरान के इस कदम को पश्चिम के देश सकारात्मक संकेत के रूप में देखेंगे क्योंकि इससे ईरान का परमाणु बम बनाने का कार्यक्रम लंबा खींच सकता है.
राजनयिकों ने बीबीसी के साथ बातचीत में रिपोर्ट के नतीजों की पुष्टि की है. आईएईए की पूरी रिपोर्ट अगले हफ्ते प्रकाशित होनी है.
रॉयटर्स की जानकारी के अनुसार आईएईए की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अंतरिम समझौते के एक हिस्से के रूप में परमाणु रूपांतरण संयंत्र को देर से शुरू करने की योजना सफल हुई है.
संयुक्त राष्ट्र निरीक्षक

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ईरान विश्व की छह शक्तियों से हुए अंतरिम समझौते का पालन करता है, या नहीं, इसके बारे में आईएईए, जो ईरान में एक निरीक्षक को बतौर नियुक्त किया गया है, हर महीने अपडेट जारी करता है.
ये एक अस्थाई समझौता है और इस पर जनवरी में हस्ताक्षर किए गए थे. इस समझौते की अवधि जून में खत्म हो रही है.
ईरान और इसमें शामिल छह शक्तियां मई से एक नए समझौते की शर्तों का मसौदा तैयार करने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि अभी उनके बीच अभी भी कुछ मतभेद बचे हुए हैं.
विश्व की ये शक्तियां चाहती हैं कि ईरान अपने परमाणु संवर्द्धन कार्यक्रम के विस्तार को स्थाई रूप से कम करने को तैयार हो जाए और संयुक्त राष्ट्र निरीक्षक को ज्यादा चौकसी के मौके दे.

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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनी ने विश्व की इन छह शक्तियों के साथ हुई इस वार्ता का समर्थन किया था लेकिन साथ ही, उन्होंने ये चेतावनी भी दी थी कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम कभी वापस नहीं लेगा.
अब तक इन छह शक्तियां अपने वार्ताओं में एकजुट रही हैं लेकिन पिछले महीने क्राईमिया के यूक्रेन से अलग होकर रूस में विलय होने के कारण मास्कों और पश्चिमी देशों के बीच तनाव का पैदा हो गया है.
बताया जा रहा है कि रूस और ईरान 20 अरब डॉलर की कीमत का सामान के बदले तेल समझौते पर बातचीत कर रहे हैं. इसके बारे में संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि इससे परमाणु वार्ता पर उल्टा असर पड़ेगा.
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