रूस ने प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ चेतावनी दी

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रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमरीका को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह यूक्रेन के क्राईमिया में जारी संकट के जवाब में 'जल्दबाजी' में कोई लापरवाही भरा कदम ना उठाए.
अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी के साथ फोन पर बातचीत में लावरोव ने कहा कि मॉस्को पर प्रतिबंध लगाना अमरीका को भारी पड़ सकता है.
<link type="page"><caption> क्राईमिया</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/03/140303_crimea_ukraine_background_an.shtml" platform="highweb"/></link> पिछले हफ्ते से रूस समर्थित सैन्य दल के नियंत्रण में है.
क्राईमिया में रूस समर्थक सैनिकों की उपस्थिति को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच तनाव चल रहा है. गुरुवार को क्राईमिया की संसद ने रूस में शामिल होने के पक्ष में मतदान किया था.
चेतावनी
क्राईमिया की संसद ने घोषणा की है कि वह 16 मार्च को <link type="page"><caption> जनमत संग्रह</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/03/140306_ukraine_mp_russia_pp.shtml" platform="highweb"/></link> के जरिए पता लगाएगी कि कौन रूस के साथ जुड़ना चाहता है और कौन क्राईमिया में ही रहना चाहता है.
रूसी संसद ने क्राईमिया से वादा किया है कि यदि वह रूस का हिस्सा बनने का मत देती है तो वह क्राईमिया के लोगों की मदद करेगा.

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अर्सेनी यत्सेन्यूक समेत <link type="page"><caption> यूक्रेन सरकार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/03/140306_ukraine_talks_ar.shtml" platform="highweb"/></link> के कई अन्य नेताओं ने जनमतसंग्रह को असंवैधानिक और अवैध क़रार दिया लेकिन रूस की संसद ने जनमत संग्रह का समर्थन किया है.
रूसी विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि शुक्रवार को जॉन कैरी के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान लावरोव ने चेतावनी दी कि वे बिना सोचे-समझे कोई कदम ना उठाएं. यदि ऐसा किया गया तो इससे रूस-अमेरिका के संबंधों पर बुरा असर पड़ सकता है.
लावरोव ने कहा कि यूक्रेन संकट से जुड़े होने के कारण अगर रूस पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं तो उनका ख़ुद अमरीका पर उल्टा असर पड़ेगा.
पत्रकार को पीटा
शुक्रवार की शाम को यूक्रेन की समाचार एजेंसी इंटरफैक्स ने रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया, "क्राईमिया के शहर सेवेस्तोपोल के बाहर ए2355 मिसाइल डिफेंस बेस के गेट को ठोकर मारते हुए एक लॉरी ने अंदर प्रवेश किया. पीछे से लगभग 20 'हमलावर' भी घुसे और बेहोश कर देने वाले हथगोले फेंके."
समाचार एजेंसी ने आगे बताया कि यूक्रेन के सैन्य दलों ने इमारत में घुसकर ख़ुद को बचाया और इससे पहले कि गोलीबारी होती उनके सेनाध्यक्ष ने बातचीत के जरिए स्थिति पर काबू किया.
स्थल का मुआयना करने वाले बीबीसी के क्रिश्चियन फ्रेज़र ने बताया कि सैन्य अड्डे पर नियंत्रण किए जाने या गेट को जबरन खोलने के कोई संकेत नहीं मिले हैं.

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<link type="page"><caption> बीबीसी संवाददाता</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/03/140307_ukraine_call_crimea_referendum_illegal_dil.shtml" platform="highweb"/></link> ने आगे बताया कि गेट के बाहर दो रूसी लॉरी खड़ी थीं जिन पर रूसी नंबर प्लेट लगे हुए थे. लॉरियों को सैनिकों ने घेर रखा था. रूस समर्थित प्रदर्शनकारियों की भीड़ काफी गुस्से में दिख रही थी.
दो पत्रकारों को बुरी तरह पीटा गया. वे घटनास्थल की तस्वीर लेने की कोशिश कर रहे थें.
बाद में यूक्रेन के एक अधिकारी ने 'डेली टेलीग्राफ' को बताया कि 'बातचीत' के बाद गतिरोध खत्म हुआ. इसके बाद रूसी लॉरियों और वहां मौजूद 30 से 60 रूसी सैन्य दलों को वापस बुला लिया गया.
इस बीच किसी तरह की गोलीबारी नहीं हुई.
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