'भारत-ऑस्ट्रेलिया परमाणु समझौता सही दिशा में'

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भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त पैट्रिक सकलिंग ने गुरुवार को कहा कि दोनों देशों के बीच असैनिक परमाणु समझौते के लेकर हो रही बातचीत 'काफ़ी अच्छी' चल रही है.
ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच यूरेनियम की आपूर्ति को लेकर बातचीत हो रही है. उच्चायुक्त ने कहा कि दोनों देश इस बारे में जल्द से जल्द समझौता करना चाहते हैं.
पैट्रिक सकलिंग ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की टोनी ऐबट सरकार भारत के साथ समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि उसे इसके लिए व्यापक राजनीतिक सहयोग प्राप्त है. ऑस्ट्रेलिया भारत को सबसे ज्यादा यूरेनियम देने वाले देशों में से एक है.
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दोनों देशों के बीच चौथे दौर की बातचीत पिछले हफ़्ते कैनबरा में सम्पन्न हुई. सकलिंग ने बताया कि बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "बातचीत बहुत अच्छी हुई है. हमने उल्लेखनीय प्रगति की है. हमें उम्मीद है कि हम जल्द से जल्द समझौते पर पहुँच जाएंगे."
उन्होंने कहा कि भारत को यह यकीन दिलाना होगा कि वह यूरेनियम का प्रयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए नहीं बल्कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों को लिए करेगा.
कोई समय सीमा नहीं
इस समझौते के लिए कोई समय सीमा तय करने से इनकार करते हुए उच्चायुक्त ने कहा, "हमने किसी नतीजे तक पहुँचने के लिए कोई समय सीमा नहीं तय की है, लेकिन दोनों देशों की सरकारें इस समझौते को जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."
भारत परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम ईंधन आयात करना चाहता है. उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भारत में ऐसे संयंत्रों की संख्या काफ़ी बढ़ जाएगी.
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ऑस्ट्रेलिया परमाणु आपूर्ति समूह का एक प्रमुख सदस्य है. ऑस्ट्रेलिया पहले भारत को यूरेनियम ईंधन बेचने से यह कहकर विरोध करता रहा था कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. लेकिन साल 2011 में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी नीति में बदलाव किया.
ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त से जब यह पूछा गया कि क्या भारत इस मसले पर ऑस्ट्रेलिया की चिंताओं के मद्देनज़र उसे संतुष्ट करने में सफल रहा है तो उन्होंने कहा कि इस पर बातचीत चल रही है.
भारत के परमाणु उत्तरदायित्व क़ानून के बारे में पूछने पर सकलिंग ने कहा कि यह क़ानून ऑस्ट्रेलिया पर लागू नहीं होगा क्योंकि ऑस्ट्रेलिया किसी परमाणु रिएक्टर बनाने में मदद नहीं कर रहा है.
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