क्या पाकिस्तान में सेना भेजेगा ईरान?

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ईरान के गृह मंत्री ने चेतावनी दी है कि ईरान अपने पांच सीमा सुरक्षाकर्मियों को छुड़ाने के लिए पाकिस्तान में सेना भेज सकता है, इन्हें इस महीने की शुरुआत में अगवा किया गया था.
माना जाता है कि इन्हें ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान इलाके में पकड़ने के बाद पाकिस्तान ले जाया गया था.
ईरान के गृह मंत्री अब्दोलरज़ा रहमानी-फज़ली ने मांग की कि पाकिस्तान इस मामले को "मज़बूती और गंभीरता से ले" और सुरक्षाकर्मियों की रिहाई के लिए "ज़रूरी कदम" उठाए.
सुन्नी चरमपंथी संगठन जैश अल-अद्ल ने कहा है कि उसने इन सुरक्षाकर्मियों को पकड़ा है. इस संगठन ने सुरक्षाकर्मियों के फ़ोटोग्राफ़ पोस्ट किए हैं जिसमें इन सुरक्षाकर्मियों को अज्ञात जगह पर बंधक दिखाया गया है.
'सुरक्षाकर्मी सुरक्षित'

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अल-अरबिया टीवी के प्रसारण में सार्जेंट जमशेद दनाइफ़र्द नाम के एक व्यक्ति को दिखाया गया है जो कह रहे हैं कि सभी सुरक्षाकर्मी "सुरक्षित" हैं.
उन्होंने आगे कहा कि जैश अल-अद्ल चाहता है कि ईरान और उसका सहयोगी देश सीरिया इन सुरक्षाकर्मियों के बदले 300 सुन्नी कैदियों को रिहा करें.
आठ फ़रवरी को इन सुरक्षाकर्मियों के बंधक बनाए जाने के अगले दिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी प्रतिनिधि को बुलाकर ये मांग की थी कि "पाकिस्तान उस आतंकी संगठन के नेताओं और सदस्यों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करे जो पाकिस्तान भाग गए हैं."
सोमवार को मेहर समाचार एजेंसी ने ईरान के गृह मंत्री अब्दोलरज़ा रहमानी फज़ली के हवाले से कहा है कि "अगर पाकिस्तान इन आतंकी गुटों के ख़िलाफ़ आवश्यक कदम नहीं उठाता तो हम पाकिस्तानी ज़मीन पर अपने सैन्य बल भेजेंगे. हम इंतज़ार नहीं करेंगे."
उन्होंने आगे कहा कि "अपनी सुरक्षा के लिए दखल देना और सुरक्षा का नया घेरा तैयार करना" ईरान का अधिकार है.
'लगातार झड़पें'
इसना समाचार एजेंसी ने अलग से ख़बर दी है कि सुरक्षाकर्मियों की रिहाई के लिए सोमवार को ईरान का एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान गया था.
इस बीच ईरान के सैन्य बलों के उप प्रमुख ने फ़ार्स समाचार एजेंसी को बताया कि "इन सुरक्षाकर्मियों को छुड़ाने के लिए राजनीतिक और सैन्य कदम उठाए जा रहे हैं."
ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान इलाके की सीमाएं अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से लगी हुई हैं. इस इलाके में बीते कुछे सालों में नशीली दवाओं के तस्करों और सुन्नी विद्रोही गुटों के साथ ईरान के सुरक्षाबलों की झड़पें होती रही हैं.
अक्तूबर में जैश अल-अद्ल ने दावा किया था कि उसने सिस्तान बलूचिस्तान में ईरान के 14 सीमा सुरक्षाकर्मियों की हत्या की है और तीन को पकड़ा है.
सिस्तान बलूचिस्तान की राजधानी ज़हेदान में अधिकारियों ने इसके जवाब में 16 लोगों को फांसी दी थी, उनका दावा था कि ये लोग "उन गुटों से जुड़े हैं जो सरकार के ख़िलाफ़ हैं."
नवंबर में जैश अल-अद्ल ने एक स्थानीय अभियोजक और उनके ड्राइवर की गोली मारकर हत्या कर दी थी. दिसंबर में एक धमाके में ईरान के तीन रिवोल्यूशनरी गार्ड मारे गए थे.
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