आसान नहीं है सत्या नडेला की राह

स्टीव बॉल्मर, सत्या नडेला, बिल गेट्स

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    • Author, डेव ली
    • पदनाम, बीबीसी टेक्नालाजी रिपोर्टर

बिल गेट्स और स्टीव बॉल्मर के बाद माइक्रोसॉफ़्ट के तीसरे सीईओ बने भारतीय मूल के अमरीकी सत्या नडेला को चारों तरफ से बधाइयाँ मिल रही हैं लेकिन इस पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद नडेला को कई चुनौतियों का भी सामना करना होगा.

आख़िरकार उन्हें अब वह ज़िम्मेदारी निभानी है जिसे कई लोग 'दुनिया की सबसे ख़राब नौकरी' मानते हैं.

ऐसा क्यों है, अगर आप इसे समझना चाहें तो माइक्रोसॉफ़्ट की तुलना इंग्लैंड की फ़ुटबॉल टीम से कर सकते हैं. एक ऐसी टीम जिसके स्टार खिलाड़ियों का जादू अब उतार पर है और नए खिलाड़ी अभी तक उस स्तर तक नहीं पहुंचे हैं जहां टीम उन पर भरोसा कर सके.

ऐसी स्थिति में अगर सत्या नडेला अपने कामों की सूची बनाएंगे तो उससे कई एनसाइक्लोपीडिया के कई खंड तैयार हो जाएंगे. ये सिरदर्द का एनसाइक्लोपीडिया जैसा होगा.

सत्या नडेला के सामने किस तरह की चुनौतियां हैं?

नोकिया से क़रार

नडेला के सामने सबसे पहली चुनौती है नोकिया के साथ हुआ क़रार. पिछले साल माइक्रोसॉफ़्ट ने नोकिया के साथ क़रार किया था.

नोकिया का लूमिया स्मार्टफ़ोन बेहद कामयाब रहा. ऐसे में माना जा रहा है कि माइक्रोसॉफ़्ट परिवार में नोकिया का शामिल होना एक बेहतर क़दम रहा है, भले इसके लिए कंपनी को 7.2 अरब डॉलर क्यों ना चुकाने पड़े.

लेकिन अब आगे क्या होगा?

डेविस मर्फी कंसलटेंसी समूह के मुख्य तकनीकी विशेषज्ञ क्रिस ग्रीन कहते हैं, "अधिग्रहित कंपनियों को पूरी तरह एकीकृत करने में माइक्रोसॉफ़्ट को काफ़ी मुश्किल होती है और इसमें काफ़ी वक्त भी लगता है, इसका लंबा इतिहास रहा है."

ग्रीन के मुताबिक नोकिया एक बड़ी कंपनी है और माइक्रोसॉफ्ट के लिए महत्वपूर्ण है.

ऐसे में एक रणनीति ये हो सकती है कि माइक्रोसॉफ़्ट लूमिया ब्रांड का उपयोग कर सकता है क्योंकि उपभोक्ताओं की नज़र में यह एक ख़ास उत्पाद बन चुका है.

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ग्रीन कहते हैं, "लूमिया फोन के साथ नोकिया ने काफ़ी हद तक अपनी विश्वसनीयता हासिल की है."

स्टीव बॉल्मर की एक बड़ी आलोचना इस बात के लिए होती रही कि वे मोबाइल के पहलू पर काम करने के लिहाज से धीमे थे. ऐसे में नष्ट हुए समय की भरपाई के लिए नडेला को तेजी से काम करना होगा.

लेकिन जिस तरह से गूगल को मोटोरोला मोबाइल कारोबार को बेचना पड़ा, उससे यह संदेह बना हुआ है कि प्रमुख फोन उत्पादक को खरीदना कारगर हो सकता है या नहीं.

माइक्रोसॉफ़्ट को बहुत उम्मीद विंडोज के नए इंटरफेस मेट्रो से है. इस इंटरफेस को डेस्कटॉप पर टेस्ट किया जा चुका है. इसका टच स्क्रीन बेहद ख़ास है जो डेस्कटॉप पीसी, टेबलेट और स्मार्टफोन पर एक जैसा नज़र आता है.

लेकिन यह अब तक योजना के मुताबिक काम करता नहीं दिख रहा है.

ग्रीन कहते हैं, "विंडोज़ 8 को लेकर कामकाजी और पब्लिसिटी समस्याएं बनी हुई हैं."

उत्पादों पर होगी नज़र

ग्रीन के मुताबिक उपभोक्ताओं को अभी भी यह विडोंज़ नहीं हासिल हो रहा है और मुख्य कारोबारी उपभोक्ताओं के पास भी यह अपग्रेड नहीं हुआ है.

ऐसे में बहुत संभव है कि कंपनी को उस लीप ओवर प्रॉडक्ट वाली समस्या का सामना करना पड़े, जिसके तहत कंपनी विंडोज 7 के साथ काम करती रहेगी और इंतजार करेंगी कि विंडोज 8 के बाद नया वर्जन क्या आ रहा है.

आप चाहे तो इसे विंडोज़ 9 कह सकते हैं, इसके बारे में कहा जा रहा है कि ये अप्रैल से शुरू हो जाएगा. लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है.

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माइक्रोसॉफ़्ट के गेमिंग डिविजन में चुनौती बनी हुई है. बीता एक दशक शानदार रहा है. पहले तो कई लोगों ने कंसोल लाँच करने पर सवाल उठाए थे लेकिन बाद में यह मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ.

लेकिन कंसोल की दुनिया में वॉर शुरू होने पर क्या अगले कुछ सालों तक एक्स बॉक्स की कामयाबी बनी रहेगी, यह बड़ा सवाल है.

इसको लेकर अभी से आशंकाएं शुरू हो गई है क्योंकि सोनी के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक उसके प्ले-स्टेशन 4 ने माइक्रोसॉफ़्ट के एक्सबॉक्स को पीछे छोड़ दिया है.

सत्या नडेला ने कंपनी के क्लाउड कंप्यूटिंग ऑपरेशन को कामयाब बनाया है.

क्लाउड कंप्यूटिंग का मतलब ऐसा सॉफ्टवेयर है जो इंटरनेट पर निर्भर है, इसे आपकी लोकल सिस्टम की ज़रूरत नहीं होती है. इसमें काफ़ी वृद्धि की संभावना मौजूद है.

ऐसे में माइक्रोसॉफ़्ट अपने क्लाउड सेवाओं मसलन ड्रॉप बॉक्स की जगह वनड्राइव क्लाउड स्टोरेज सर्विस, गूगल ड्राइव और अमेज़न क्लाउड ड्राइव को प्रमोट कर सकता है.

प्रबंधन की चुनौती

लेकिन सत्या नडेला के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने टीम के हर सदस्य में उत्साह भरने की है.

विंडोज़ मैगज़ीन की मैनेजिंग एडिटर कैथरीन इलिस ने कहा, "मेरे ख्याल से नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के सामने बड़ी चुनौती माइक्रोसॉफ़्ट की पहचान को फिर से स्थापित करना होगा."

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यह सही है कि स्टीव बॉल्मर के समय में कंपनी के कर्मचारियों का मनोबल कम हुआ था.

क्रिस ग्रीन बताते हैं, "माइक्रोसॉफ़्ट के कमर्चारियों का भरोसा कभी बॉल्मर और उनके कारोबारी नजरिए पर नहीं रहा. कई लोग उन्हे दूरदर्शी नहीं मानते थे."

इतना ही नहीं सत्या नडेला को अपने पूरे बैकरूम स्टॉफ़ की टीम को तैयार करना होगा, यानी कम से कम 20 एक़दम योग्य और भरोसेमंद लोगों की टीम बनानी होगी. यह बेहद चुनौतीपूर्ण होगा.

इतना ही नहीं उन्हें तेजी से अपनी योजनाओं के बारे में बताना होगा. क्रिस ग्रीन मानते हैं कि अगले पांच सालों की योजनाओं का खाका उन्हें पहले 90 दिनों में ही खींचना होगा.

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