बर्मा में 30 रोहिंग्या मुसलमानों की मौत

इमेज स्रोत, BBC World Service
बर्मा के रखाइन प्रांत में 30 से भी ज्यादा रोहिंग्या मुसलमानों के मारे जाने का मामला प्रकाश में आया है.
बीबीसी को मिली ख़बर के मुताबिक़ इन रोहिंग्या मुसलमानों की मौत बीते हफ़्ते बौद्ध मतावलंबियों के हमले में हुई है.
<link type="page"><caption> (रोहिंग्या मुसलमान हैदराबाद पहुँचे)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/08/120818_rohingya_muslims_hyderabad_ar.shtml" platform="highweb"/></link>
अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों के दो अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस इलाक़े में नरसंहार के साक्ष्य मिले हैं.
इन अधिकारियों को देश के सुदूर पश्चिमी इलाक़ों में जाने की इजाज़त दी गई थी. मानवाधिकार संगठन 'फ़ोर्टिफ़ाई राइट्स' ने दावा किया है कि पिछले हफ़्ते पाँच दिनों तक कई हमले हुए.
हालांकि सरकार और स्थानीय अधिकारियों ने किसी तरह के नरसंहार के आरोपों का ज़ोरदार खंडन किया है.
पिछले महीने मॉन्गडॉ शहर में रोहिंग्या मुसलमानों और पुलिस के बीच झड़पों की ख़बरें आई थी जिसके बाद रखाइन की घटना का पता चला है.
बदले की कार्रवाई
ऐसा माना जाता है कि बांग्लादेश सीमा में प्रेवश करने की कोशिशों के दौरान पैदा तनाव के बीच कई रोहिंग्या मुसलमान मारे गए हैं.
वहाँ हालात एक पुलिस वाले के गुमशुदा होने के बाद बिगड़ गए. जिसके बारे में लोगों को ये अंदाज़ा था कि उसकी हत्या कर दी गई.
<link type="page"><caption> (रोहिंग्या मुसलमानों के हालात पर बढ़ती चिंता)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/08/120813_rohingyas_history_background_sy.shtml" platform="highweb"/></link>
ख़बरों के मुताबिक़ रखाइन के स्थानीय बौद्ध लोगों ने बदले की कार्रवाई में सुरक्षा बलों की सहायता से 'डु चार यार तान' गाँव पर हमला किया.
बर्मा में मौजूद बीबीसी के जोनाह फ़िशर का कहना है कि मौत के आँकड़ों (30) को कम आँका जा रहा है. बर्मा को म्यांमार के नाम से भी जाना जाता है.
कुछ रिपोर्टों में 70 लोगों के मारे जाने की बात भी कही गई है. इसमें औरत और मर्द दोनों शामिल हैं.
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वलेरी अमोस ने सरकार से माँग की है कि सहायता कर्मियों को उस इलाक़े में जाने की इजाज़त दी जाए और मामले की तत्काल निष्पक्ष जाँच कराई जाए.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि रोहिंग्या मुसलमानों का हाल बेवतन लोगों जैसा है जिन्हें उनके मुल्क बर्मा ने ख़ारिज कर दिया है और बांग्लादेश ने भी अपनाने से इनकार कर दिया है.
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