ब्रिटेनः प्रवासियों के लिए स्वास्थ्य सेवा मुफ़्त नहीं

ब्रिटेन, एनएचएस

ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इंग्लैंड में प्रवासियों और विदेशी सैलानियों को एनएचएस (ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना) की कुछ खास सेवाओं के लिए अब पैसे खर्च करने होंगे.

<link type="page"><caption> प्रवासियों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131010_uk_migration_nn.shtml" platform="highweb"/></link> को अब डॉक्टर की फीस, कुछ आपातकालीन सेवाओं और ऑप्टिकल और डेंटल सेवाओं के लिए पैसे देने होंगे.

लेकिन जीपी (सामान्य चिकित्सा ) और नर्स से जुड़ी <link type="page"><caption> सेवाएं मुफ्त</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/06/120611_britian_immigration_sa.shtml" platform="highweb"/></link> रहेंगी, और आपातकाल में इन सेवाओं के लिए किसी को मना नहीं किया जाएगा.

सरकार ने पहले तय किया था कि सामान्य चिकित्सा सेवाओं पर शुल्क लगाया जाए लेकिन बाद में ये निर्णय वापस ले लिया.

ब्रितानी सरकार ने माना कि एचआईवी, टीबी और यौन संक्रमण से जुड़ी जानलेवा बीमारियों से लड़ने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक आम लोगों की पहुंच बेहद ज़रूरी है. इसलिए सरकार ने इन सेवाओं को किसी भी तरह के शुल्क से मुक्त रखा है.

एनएचएस का दुरुपयोग

ब्रिटेन में कुछ ऐसी प्राथमिक सेवाएं हैं जिन पर सरकार शुल्क लगाने की सोच रही है. इन सेवाओं में किसी सामान्य चिकित्सक और फिजियोथेरेपिस्ट के ज़रिए सुझाई गई छोट-मोटी सर्जरी भी शामिल होगी.

एनएचएस सेवाओं के तहत किन मरीज़ों को पैसे देने होंगे और किन्हें नहीं, उनकी पहचान के लिए एक नई व्यवस्था बनाने की योजना है.

सरकार का कहना है कि इन सेवाओं पर शुल्क लगाने से एनएचएस को अब तक जो नुकसान हुआ है उसकी क्षतिपूर्ति की जा सकेगी. साथ ही, उन लोगों को सुविधा होगी जिन्हें तत्काल और आपातकालीन सेवा की ज़रूरत है.

स्वास्थ्य मंत्री लॉर्ड हाउ ने कहा, "हमने वैश्विक स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं को सबके लिए सुलभ बनाया है. हमारी इस उपलब्धि से दुनिया जलती है. लेकिन हमें ब्रिटेन के उन मेहनतकश करदाताओं के लिए भी सोचना है जो एनएचएस को धन देते हैं."

वो आगे कहते हैं, "हमें बाहर से आए लोगों और प्रवासियों की पहचान कर उनसे स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पैसे लेने होंगे. इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्राथमिक सेवाओं को शुल्क के दायरे में लाना हमारा पहला कदम होगा.

ब्रिटेन, एनएचएस

'अनचाहा तनाव'

इधर ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार के इस फैसले पर अपना अलग रुख़ रखा है.

एसोसिएशन का मानना है कि इस योजना को अमल में लाने के लिए वैसे चिकित्सकों और जीपी की ज़रूरत पड़ेगी जो ज़रूरी पेपरवर्क के लिए समय निकालें. इस बात की भी आशंका है कि इन सब तैयारियों में शुल्क लगाने से जितनी क्षतिपूर्ति होगी उससे ज्यादा का खर्च आ सकता है.

ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन काउंसिल के अध्यक्ष डॉक्टर मार्क पोर्टर ने कहा, "सरकार का मौजूदा प्रस्ताव एनएचएस और मरीज़ों के लिए अनचाही परेशानियां पैदा कर सकता है."

दूसरी तरफ ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन में जीपी कमेटी की अगुआई करने वाले डॉक्टर चांद नागपाल का कहना है, "अगर कोई मरीज किसी नाज़ुक स्थिति में है तो हम उसे जीपी के पास जाने से रोक नहीं सकते."

हक़दार

स्वास्थ्य मंत्री लार्ड हाउ ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हकीकत जाने बिना शोर मचाया जा रहा है.

उन्होंने कहा, "स्वास्थ्य विभाग बस इतना चाहता है कि वैसे लोगों से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रकम ली जाए जो एनएचएस की सेवा पाने के हकदार नहीं हैं."

सरकार का यह फैसला उस घोषणा के बाद आया है जिसमें स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण आकलन पेश किया. इस आकलन में कहा गया कि यदि हर साल प्रवासियों और बाहर से आने वाले लोगों पर शुल्क लगाया जाए तो सरकार को 50 करोड़ पाउंड की बचत हो सकती है.

ज़्यादातर बदलाव आने वाले साल में शुरू किए जाएंगे.

सरकार पहले ही ब्रिटेन में उन प्रवासियों पर कर लगाने की घोषणा कर चुकी है जो ब्रिटेन में छह महीने से 5 साल तक रह चुके हों और यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र से आते हों.

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