कैसा होगा मंडेला के बिना दक्षिण अफ्रीका?

- Author, एंड्र्यू हार्डिंग
- पदनाम, अफ्रीका संवाददाता
बीता हफ्ता दक्षिण अफ्रीका के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा- मातम, उत्सव, अव्यवस्था, धैर्य, चिंतन ये तमाम चीजें देखने को मिलीं.
लेकिन अब क्या होगा? नेल्सन मंडेला के निधन और पिछले कुछ दिनों से जो कुछ हो रहा है उसका क्या प्रभाव पड़ेगा. उस देश पर नेल्सन मंडेला के निधन का क्या असर होगा जो कि पिछले काफी दिनों से मंडेला के बगैर दौड़ने का अभ्यास कर रहा था.
मंडेला के वकील जॉर्ज बिज़ोस का कहना था, "किसी बड़े और मूलभूत बदलाव के बारे में अभी से कुछ कहना बहुत जल्दबाज़ी होगी."
लेकिन फिलहाल इस हफ्ते की घटनाओं पर एक नज़र डालना ज़रूरी है. जो कुछ भी हुआ वो ठीक नहीं था.
वहां कई तरह की प्रशासनिक कमज़ोरियां थीं.
एक दुभाषिए की गलतियों की वजह से मंगलवार को हुए समारोह के ज़रिए मदीबा की कहानी को दूर-दूर तक पहुंचाने के मौके को गंवा दिया गया.
फिर भी देश के लोग एक साथ आए और उन्होंने कार्यक्रम में भाग लिया. मुझे संदेह है कि ज्यादातर दक्षिण अफ्रीकी लोग बीते हफ्ते की घटना को याद करके गौरवान्वित महसूस करेंगे.
समारोह

मंगलवार को स्टेडियम में हुए कार्यक्रम में राष्ट्रपति जैकब ज़ुमा की बदनामी शासकों के नए चरित्र की बानगी है जहां आधुनिक दक्षिण अफ्रीकी लोगों की दबी हुई कुंठा कुछ हद तक ये बता रही थी कि मंडेला का जादू खत्म हो रहा है.
ज़ुमा की विदेश मामलों की सलाहकार लिंडिवे ज़ुलु का कहना था कि वो क्षण बेहद अपमानजनक था.
लेकिन वो इस बात पर ज़ोर देती हैं कि सत्तारूढ़ अफ्रीकी नेशनल कॉन्ग्रेस को ये नहीं भूलना चाहिए कि ज़बर्दस्त चुनावी जनादेश के ज़रिए मंडेला की विरासत को आगे बढ़ाना होगा.
वो कहती हैं, "हम लोग हर तरह से इस कोशिश में लगे हैं कि ऐसा कुछ न होने पाए जिससे कि वो दुखी होते."
लेकिन दक्षिण अफ्रीका में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है जो इस बात से इत्तेफ़ाक नहीं रखते.
अफ्रीकी नेशनल कॉन्ग्रेस के आलोचक एक बड़े व्यवसायी मोएलेत्सी म्बेकी कहते हैं, "राजनीतिक नेताओं के लिए ये एक चेतावनी थी. इसका ये मतलब नहीं है कि ये लोग इस बारे में कुछ भी कर सकते हैं लेकिन कम से कम उन्हें ये तो पता ही होना चाहिए कि लोग उनकी अकर्मण्यता और भ्रष्टाचार को कितनी गंभीरता से लेते हैं."
म्बेकी कहते हैं, "एएनसी ने ये सोचने की बड़ी गलती की है कि वो मौजूदा नेतृत्व को मंडेला युग को आगे बढ़ाने वाली पीढ़ी के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं."
उम्मीदें अभी भी हैं
लेकिन म्बेकी जब एएनसी के बारे में दीवारों पर लिखी इबारतों को देखते हैं तो देश के बारे में ज़्यादा आशावादी दिखने लगते हैं.
वो कहते हैं, "हमने बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं. लेकिन मुझे नहीं लगता कि दक्षिण अफ्रीका पर कोई संकट आने वाला है. हमारे पास मज़बूत संस्थाएं हैं."
स्टीव बीको मशहूर काले नेता थे जिनकी हत्या कर दी गई थी. उनकी पूर्व सहयोगी डॉक्टर मैम्फील राम्फील भी मंगलवार को स्टेडियम में मौजूद थीं.
वो कहती हैं कि एएनसी ने उस समारोह को अपने कब्जे में ले लिया जिसे कि ग़ैर राजनीतिक होना चाहिए था. वो कहती हैं, "इसीलिए ये प्रतिक्रिया हुई और लोगों को लगा कि मंडेला के नेतृत्व के तरीके के साथ धोखा किया जा रहा है."
डॉक्टर राम्फील के बयान के पीछे राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं. हाल ही में उन्होंने अगांग नाम से खुद की एक राजनीतिक पार्टी बनाई है और उन्हें उम्मीद है कि अगले साल होने वाले चुनाव में उनकी पार्टी एएनसी को चुनौती दे सकती है.

वैसे इस बात पर आश्चर्य भी नहीं किया जाना चाहिए कि नेल्सन मंडेला की मृत्यु के बाद वो इसे एक राजनीतिक अवसर के रूप में देख रही हैं.
वो कहती हैं, "बहुत से लोग ऐसे हैं जो कि एएनसी के ख़राब शासन के बारे में अपनी राय देने के लिए स्वतंत्र महसूस करेंगे."
मंडेला की विरासत
दक्षिण अफ्रीका जैसे नए लोकतंत्र के लिए इस हफ्ते और मंडेला की विरासत के लिए शायद सबसे महत्वपूर्ण चीज ये थी कि उनकी मौत का कोई हानिकारक प्रभाव नहीं होगा या यों कहें कि नहीं होना चाहिए.
नेल्सन मंडेला जब तक जीवित रहे उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी नेताओं को संगठित रखा, यहां तक कि लंबे समय तक अस्पताल में रहने के बावजूद उन्होंने ऐसा किया.
यही नहीं, उनकी मौत से किसी तरह का कोई ख़ून-ख़राबा भी नहीं हुआ और न ही होगा.
बावजूद इसके, एक महत्वपूर्ण बात है. जेल से निकलने के बाद मंडेला लगातार सहिष्णुता की बात करते रहे और बातचीत की प्रमुखता पर जोर देते रहे.
ऐसा लगता है कि दक्षिण अफ्रीका ने उनकी इन बातों को नहीं भुलाया है.
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