ख़ास हैं लेनिन की ये पाँच प्रतिमाएँ

लेनिन

यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ में प्रदर्शनकारियों ने व्लादमिर ई लेनिन की प्रतिमा तोड़ दी. वर्ष 1917 की सोवियत क्रांति के नायक रहे लेनिन का अब इस शहर में कोई स्मारक नहीं रह गया है. लेकिन कई दूसरी जगहों पर उनकी प्रतिमाएं मौजूद हैं. उनमें से ये पांच कुछ ख़ास ही हैं.

1. सिएटल, अमरीका

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सिएटल के उपनगर फ्रीमोंट में स्थापित लेनिन की यह मूर्ति 1990 के दशक की शुरुआत में लाई गई थी. अंग्रेजी के अध्यापक लुई कारपेंटर ने इस प्रतिमा को स्लोवाकिया से यहां लाने के लिए अपना घर तक गिरवी रख दिया था. यह कई फास्ट फूड दुकानों के बाहर स्थापित है और विशेष अवसरों पर इसकी साज-सज्जा की जाती है.

2. अंटार्कटिका

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सोवियत वैज्ञानिकों ने अमरीका के दक्षिणी ध्रुव पर एमंडसन-स्कॉट स्टेशन के निर्माण के जबाव में दिसंबर 1958 में अंटार्कटिका के सबसे दूरस्थ क्षेत्र में पोल ऑफ़ इनएक्सेसिबिलिटी में एक शोध केन्द्र की स्थापना की.

दो सप्ताह बाद वहां से जाने से पहले उन्होंने इस केन्द्र की छत पर प्लास्टिक से बने लेनिन के बुत को स्थापित किया. आज इस केन्द्र में केवल लेनिन का बुत ही दिखाई देता है. बाक़ी हिस्सा बर्फ में दब चुका है.

3. इज़्लिंग्टन, लंदन, ब्रिटेन

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द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नाज़ी जर्मनी के ख़िलाफ़ ब्रिटेन और सोवियत संघ की दोस्ती के उपलक्ष्य में लेनिन के बुत को लंदन के फिंसबरी काउंसिल में स्थापित किया गया था.

इसे रूसी मूल के वास्तुकार बर्थोल्ड लुबेत्किन ने बनाया था. कुछ दिन तक इसे होल्फोर्ड चौक में भी स्थापित किया गया था. लेनिन अपने लंदन प्रवास के दौरान होल्फोर्ड चौक के क़रीब ही रहा करते थे. इस मूर्ति के साथ अक्सर तोड़फोड़ होती थी इसलिए इसे वहां से हटा दिया गया. अब यह प्रतिमा इस्लिंग्टन संग्रहालय में देखी जा सकती है.

4. तारहनकुट, यूक्रेन

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यह स्थान कीव से ज़्यादा दूर नहीं है लेकिन यहां तक पहुंचना सोवियत विरोधी प्रदर्शनकारियों के लिए आसान नहीं है. लेनिन का यह बुत क्रीमिया के तारहनकुट में पानी के भीतर बने संग्रहालय में है. इस संग्रहालय में कई पूर्व सोवियत नेताओं से जुड़े स्मारक, मूर्तियां और बुत हैं.

5. कावरियागो, इटली

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इटली का कावरियागो पश्चिमी यूरोप के उन चंद शहरों में शामिल है जहां लेनिन के बुत को स्थापित किया गया है. बोलोंगा के क़रीब स्थित इस शहर की नगर परिषद की वेबसाइट के मुताबिक़ वर्ष 1918 में सोशलिस्ट पार्टी में उदारवादियों और रुढ़िवादियों के बीच तगड़ी बहस छिड़ी हुई थी.

आख़िरकार रुढ़िवादियों की जीत हुई और 1920 में लेनिन को शहर के पहले मानद नागरिक का दर्जा दिया गया.

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