परमाणु कार्यक्रम पर आज समझौता संभवः ईरान

वार्ता
इमेज कैप्शन, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जेनेवा में विश्व के छह प्रमुख देशों और ईरान के बीच वार्ता चल रही है.

ईरान के विदेश मंत्री का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विश्व के प्रमुख देशों और ईरान के बीच शुक्रवार को समझौता मुमकिन है.

विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद ज़रीफ़ ने सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ''ईरान परमाणु संवर्धन के अपने कार्यक्रम को पूरी तरह बंद नहीं करेगा लेकिन बातचीत के दौरान आने वाले विभिन्न मुद्दों पर समझौता कर सकता है.''

जिनेवा में चल रही वार्ता में शामिल अन्य प्रमुख देशों ने इस बारे में अभी कोई टिप्पणी नहीं की है.

मध्य पूर्व एशिया और उत्तरी अफ़्रीक़ा के दौरे पर गए अमरीका के विदेश मंत्री जॉन केरी भी शुक्रवार को वार्ता में शामिल होने के लिए जिनेवा पहुँचेंगे.

जॉन केरी के साथ यात्रा कर रहे बीबीसी संवादादाता किम घटास का कहना है कि केरी का अपने यात्रा कार्यक्रम में नाटकीय बदलाव करके जिनेवा जाने का फ़ैसला लेना इस बात का संकेत है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता नज़दीक है.

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सीमित राहत

गुरुवार को अमरीका ने 'ठोस एवं सत्यापित की जा सकने वाली कार्रवाई' के बदले में ईरान को प्रतिबंधों में छूट का प्रस्ताव देने की पुष्टि की.

लेकिन इस मामले में इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू का कहना है कि, ''परमाणु कार्यक्रम पर समझौता एक ऐतिहासिक ग़लती होगी.''

उन्होंने ईरान पर नक़ली रियायतें प्रस्तावित करने का आरोप भी लगाया.

जावेद ज़रीफ़
इमेज कैप्शन, ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ का कहना है कि शुक्रवार को परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता हो सकता है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य देशों (अमरीका, ब्रिटेन, चीन, रूस और फ्रांस) तथा जर्मनी (पी5+1) ने ईरान के पर्माणु कार्यक्रम पर ईरान के साथ जिनेवा में गुरुवार को वार्ता शुरू की.

पश्चिमी देशों को शक है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम परमाणु बम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जबकि ईरान इन आरोपों को नकारता रहा है.

ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ का कहना है कि शुक्रवार सुबह (जेनेवा के समयानुसान) वार्ता में शामिल पक्ष साथ बैठेंगे और संयुक्त बयान तैयार करेंगे जिसमें एक आम उद्देश्य, एक साल के भीतर मामला ख़त्म करने और आपसी विश्वास बहाली के उपायों जैसे तीन अहम मुद्दों को संबोधित किया जाएगा.

इससे पहले उन्होंने 'तीन चरण की योजना' के बारे में बात की थी.

ईरान के वार्ताकार और उपविदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा था वैश्विक शक्तियों ने ईरान की ओर से प्रस्तावित रूप रेखा को स्वीकार कर लिया है और अब इस पर विस्तार से चर्चा की जा रही है. हालाँकि सुरक्षा परिषद के किसी सदस्य ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

<link type="page"><caption> ईरान से वार्ता पर इसारइल का विरोध</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131015_iran_nuke_talks_sb.shtml" platform="highweb"/></link>

प्रतिबंध

वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जे कार्नी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, ''पी5+1 देश ईरान को सीमित राहत देने पर विचार करेंगे जिनसे ईरान पर लगे प्रतिबंध का मूल ढांचा प्रभावित न हो.''

ईरान परमाणु कार्यक्रम
इमेज कैप्शन, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर 2006 में संयुक्त राष्ट्र ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे.

उन्होंने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय चिंताओं का समाधान करने वाले 'अंतिम, व्यापक एवं सत्यापित करने योग्य' समझौता तक व्यापक प्रतिबंधों को बरक़रार रखा जाएगा.''

उन्होंने कहा कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं करवाएगा तो फिर से कठोर प्रतिबंध लागू कर दिए जाएंगे.

हसन रूहानी के ईरान का नया राष्ट्रपति बनने के बाद से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से जारी गतिरोध के समाप्त होने की उम्मीदें बँधने लगी थीं.

संयुक्त राष्ट्र ने 2006 के बाद से ईरान पर बेहद कठोर प्रतिबंध लगा रखे हैं जिनमें परमाणु कार्यक्रम में शामिल लोगों एवं संगठनों की यात्रा पर प्रतिबंध और संपत्ति को ज़ब्त किया जाना भी शामिल है.

अमरीका और यूरोपीय संघ ने ईरान पर अलग से प्रतिबंध लगा रखे हैं जिनका ईरान की बैंकिंग व्यवस्था एवं तेल आधारित अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर हुआ है.

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'ऐतिसाहिक ग़लती'

दूसरी ओर येरुशलम में एक पत्रकार वार्ता में इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने कहा है कि वार्ता के प्रस्ताव ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता हासिल करने में मदद कर सकते हैं.

उन्होंने कहा, ''इसराइल इस बात को समझता है कि आज जिनेवा में हो रही वार्ता में ऐसे प्रस्ताव पेश किए जा सकते हैं जो ईरान पर उन रियायतों के बदले में दबाव कम करेंगे जो असल में रियायतें हैं ही नहीं.''

नेतनयाहू ने आगे कहा कि यह प्रस्ताव ईरान को परमाणु बम विकसित करने की क्षमता हासिल करने में मदद करेगा.

उनका कहना था, ''इसराइल पूरी तरह इन प्रस्तावों का विरोध करता है. यह एक ऐतिहासिक ग़लती होगी. इन्हें सिरे से ख़ारिज कर दिया जाना चाहिए. कोई भी अन्य क़दम शांतिपूर्ण समाधान की संभावना को और कम कर देगा. इसराइल अपने दम पर अपनी रक्षा करने के अधिकार को सुरक्षित रखता है.''

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