बनावटी पांव, फिर भी बनीं चैंपियन

कहते हैं हौसला और मज़बूत इच्छा शक्ति हो तो शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति भी कामयाबी की बुलंदियों को छू सकता है.
अमरीका की 'स्पोर्ट्स वूमन' एलिज़ाबेथ स्टोन के दाहिने पांव का निचला हिस्सा जन्म से ही नहीं है. उन्होंने लंदन पारालंपिक 2012 में 100मी बैकस्ट्रोक में कांस्य पदक जीता. मगर उनकी कहानी दूसरे <link type="page"><caption> विकलांगों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/12/121205_tamerlane_disabled_pk.shtml" platform="highweb"/></link> से जरा हट के है.
<link type="page"><caption> शारीरिक अक्षमता</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130522_1st_disable_woman_on_everest_rd.shtml" platform="highweb"/></link> के कारण उनके अपने परिवार ने ही बचपन में उनका त्याग कर दिया.
पारालंपिक चैंपियन बनते ही नाम और पहचान के साथ साथ बरसों पीछे छूटा परिवार भी मिला. एलिज़ाबेथ स्टोन बचपन से लेकर अब तक के अपने <link type="page"><caption> संघर्ष को</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/04/120405_disable_dating_ak.shtml" platform="highweb"/></link> याद करते हुए बेहद भावुक हो उठती हैं.
एलिज़ाबेथ का बचपन जार्जिया के एक मामूली अनाथालय में बीता. तब सोवियत संघ का विघटन अपने अंतिम चरण में था.
अनाथालय की कड़वी यादें
एलिज़ाबेथ स्टोन का जब जन्म होता है तो माता पिता पाते हैं कि उनके दाहिने पांव का निचला हिस्सा नहीं है. वे उन्हें अनाथालय भेज देते हैं.
एलिजाबेथ अनाथालय के दिन याद करती हैं. "ख़ाली ख़ाली कमरे, लाल बाल्टी, गंदा बिस्तर. सब कुछ बिखरा हुआ. टॉयलेट तक नहीं था."
कुछ दिनों बाद मास्को की एक महिला उन्हें गोद ले लेती हैं. उस बच्ची की नई मां एलिज़ाबेथ को फ़िज़िकल थेरेपिस्ट के पास ले जाती हैं. वो थीं लिंडा स्टोन. एलिज़ाबेथ की नई मां.
आख़िर लिंडा ने एक विकलांग बच्ची को ही गोद क्यों लिया? एलिज़ाबेथ बताती हैं, "मेरी मां ख़ुद फ़िज़िकल थेरेपिस्ट थीं. उन्होंने यही सीखा-जाना था कि किसी ज़रूरतमंद की मदद कैसे की जा सकती है. जब उन्होंने मुझे अनाथालय में गहरी उदासी में डूबे देखा, तो झट बांहों में भर लिया और घर ले आईं."
अमरीका में रहते हुए एलिज़ाबेथ को कई तरह की मेडिकल ट्रीटमेंट दी गई.
'पानी बहुत भाता था'

स्टोन ने बताया, "मैं शायद दुनिया की सबसे <link type="page"><caption> खुशकिस्मत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/09/130920_stephen_hawking_nn.shtml" platform="highweb"/></link> बच्ची थी. अमरीका में शुरू के पहले साल में ही मैं 16 इंच बढ़ी. ये सब अच्छे खान-पान और मेडिकल केयर का कमाल था. चार साल की उम्र में मेरे कृत्रिम पांव भी लगाए गए."
<link type="page"><caption> पैरों से लाचार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130803_ramzan_nn.shtml" platform="highweb"/></link> होते हुए भी तैराकी में रुचि आख़िर कैसे हुई? स्टोन बताती हैं, "मुझे पानी बहुत भाता था. पानी के भीतर मैं ख़ुद को ज्यादा सहज और खुला-खुला महसूस करती थी. शायद इसलिए कि बनावटी पैर होने के बावजूद मैं पानी में आम लोगों जैसा नार्मल महसूस करती थी."
अमरीका की 'स्पोर्ट्स वूमन' नौ साल में ही तैराकी टीम में शामिल हो गईं थीं. ग्यारह साल की होते होते तैराकी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हो चुका था. वे दूसरे अग्रणी एथलीटों के साथ मुक़ाबले में भाग लेने लगी.
जब एलिज़ाबेथ को पता चला कि उनको जन्म देने वाली मां और परिवार उनसे मिलना चाहता है तो उन्हें अच्छा नहीं लगा.
वे कहती हैं, "बचपन में ख़ुद से अलग कर देने के कारण परिवार वालों के प्रति मेरे मन में ग़ुस्सा था. मगर जिस कमज़ोर शरीर के कारण परिवार वालों ने मेरा त्याग कर दिया था उसी शरीर ने मुझे उनसे फिर से मिलवा दिया. इसी शरीर के कारण मैंने पारालंपिक मुक़ाबले में हिस्सा लिया. लंदन आई और उनसे मिली."
तस्वीर का दूसरा पहलू
जार्जिया में रह रही उनकी सगी बहन टियोना खुर्सिज याद करती हैं, "मुझे याद नहीं कि मेरी कोई बहन थी. मुझे बस इतना याद है कि जब मैं पांच साल की थी तो मां गर्भवती थीं."
वे आगे कहती हैं, "कैथेवान (एलिजाबेथ का बचपन का नाम) जब जन्मी तो मां 47 और पिता लगभग 60 साल के थें. किसी ने मेरे माता पिता से सवाल नहीं किया जब उन्हें पता चला कि उस बच्ची को अनाथालय में छोड़ा गया है."
फिर एक दिन एलिज़ाबेथ की बड़ी बहन को बताया गया कि उनकी मृत्यु हो गई है. टियोना कहती हैं कि तब हम बहुत ग़रीब थें.
"मैं 10 साल की थी, तभी पिता गुज़र गए. स्थितियां बदतर होती चली गईं. मैं तब इतनी छोटी थी कि मां की कोई मदद नहीं कर सकती थी. दो साल पहले मेरे भाई ने कैथेवान के बारे में पता करने की कोशिश की. मगर अफसोस."
परिवार की वे 'मजबूरियां'

टियोना खुर्सिज के मुताबिक़ पिछले साल उनके रिश्तेदारों ने पारालंपिक चैंपियन एलिजाबेथ स्टोन का इंटरव्यू सुना. उसमें बताया गया था कि जार्जिया के एक अनाथालय से एलिज़ाबेथ को गोद लिया गया. तारीख़ और जन्म स्थान एक ही थें.
तब एलिज़ाबेथ के परिवार ने अमरीकी चैंपियन एलिज़ाबेथ के बारे में पता करना शुरू किया.
टियोना ने एलिज़ाबेथ का पता खोजा और संदेश भेजे. लिखा, "एलिज़ाबेथ आपका परिवार जार्जिया में है. वे आपसे मिलना चाहते हैं."
ई-मेल और बचपन की तस्वीरें जब एलिज़ाबेथ को मिलीं तो वे ख़ुशी से पागल हो उठीं. स्टोन कहती हैं, "मैंने मां, भाई-बहन, दूसरे रिश्तेदारों के साथ की बचपन की तस्वीरें देखी. तस्वीर में लड़की का चेहरा मुझसे काफ़ी मिलता जुलता था. तब यक़ीन करना सचमुच मुश्किल हो रहा था."
फिर वे अपने भाई-बहन और मां से मिलने जार्जिया गईं. वहां जाकर अपने परिवार की उन मजबूरियों को समझा जिसके कारण उन्हें अनाथालय छोड़ दिया गया था.
अब एलिज़ाबेथ ने खेल से सन्यास लेने की घोषणा कर दी है. हां. वे नई पीढ़ी को प्रशिक्षित ज़रूर करना चाहती हैं. (बीबीसी आउटलुक सीरिज से)
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












