और बिक गया गाँधी का चरखा...

मोहनदास करमचंद गाँधी का इस्तेमाल किया हुआ एक चरखा लंदन में नीलाम हो गया.इसकी नीलामी एक करोड़ रूपए से ऊपर की क़ीमत पर हुई है.
इस चरखे को गाँधी ने पुणे स्थित येरवडा जेल में प्रयोग किया था. नीलामी में इस चरखे के लिए न्यूनतम कीमत 60,000 पाउंड रखी गई.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार <link type="page"><caption> गाँधी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130215_gandhi_letters_auction_ia.shtml" platform="highweb"/></link> ने इस चरखे का प्रयोग उस समय किया था जब वो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पुणे स्थित येरवडा जेल में बंद थे. बाद में उन्होंने इस चरखे को अमरीकी फ्री मेथडिस्ट मिशनरी रेवरेंड फ्लॉयड ए पफ़र को उपहार में दे दिया था.
पफ़र को भारत में शैक्षणिक और औद्योगिक क्षेत्र की सहकारी संस्थाओं के प्रवर्तक माना जाता है.
गाँधी ने पफ़र को भारत में किए गए उनके कार्यों के लिए यह चरखा उपहारस्वरूप दे दिया था.
नीलामी घर के मलॉक के विशेषज्ञ रिचर्ड वेस्टवुड ब्रुक ने कहा, "यह गाँधी की सबसे प्यारी चीजों में रहा होगा क्योंकि इसे खुद गाँधी ने तैयार किया था. इसका महत्व निर्विवाद है और हमने गाँधी से जुड़ी जिन चीजों की भी अब तक नीलामी की है उनमें यह सबसे ज़्यादा मूल्यवान है."
टीपू की तस्वीर

मलॉक द्वारा की जाने वाली नीलामी में चरखे के अलावा गाँधी एवं भारत से जुड़ी 60 अन्य चीज़ें भी नीलामी में शामिल हैं.
इनमें महत्वपूर्ण दस्तावेज, तस्वीरें और किताबें शामिल हैं. इनमें वह पत्र भी शामिल है जिसमें यहूदी नरसंहार के दौरान <link type="page"><caption> गाँधी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130110_gandhi_gradson_aa.shtml" platform="highweb"/></link> ने उनसे 'सत्याग्रह' करने की अपील की थी..
ब्रितानी साम्राज्य का विरोध करने के लिए गाँधी ने हिन्दूस्तानियों से चरखे पर सूत कात कर अपना कपड़ा खुद बनाने के लिए प्रेरित किया था.
पारंपरिक चरखा बहुत भारी और चलाने में कठिन था इसलिए एक ऐसे चरखे की ज़रूरत थी जिसका परिवहन आसान हो. जब गाँधी येरवडा जेल में थे तब उन्होंने इस सुविधाजनक चरखे का विकास किया जिसे मोड़कर अपने साथ लेकर चला जा सके.
<link type="page"><caption> गाँधी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130215_gandhi_letters_auction_ia.shtml" platform="highweb"/></link> ने कई बार कहा था चरखा कातना उनके लिए ध्यान करने के समान है.
सिख और मैसूर राज्य
इस नीलामी में सिख और मैसूर राज्य से जुड़ी हुई कई ऐतिहासिक कई वस्तुओं की नीलामी की जाएगी.
इस सामाग्री में टीपू सुल्तान की उन्नीसवीं सदी का एक चित्र, उनकी बेटी का वर्ष 1837 में बना एक चित्र, महाराजा रणजीत सिंह के आरंभिक काल की जानकी वाला वर्ष 1805 का दस्तावेज और क़ुरान की एक अनोखी लघु प्रति जिसे पहले विश्वयुद्ध में मित्र देशों की तरफ से लड़ने वाले मुस्लिम सिपाहियों के लिए प्रकाशित की गई थी.
वेस्टवुड ब्रूक के अनुसार, "हमने नीलामी के लिए गाँधी और भारत से जुड़ी विभिन्न तरह की सामाग्री का चयन किया है. इस सामाग्री को विशेष रूप से अनोखेपन, गुणवत्ता और ऐतिहासिक महत्व के आधार पर चुना गया है. मुझे नहीं लगात कि हम फिर कभी इतने बड़े स्तर पर इस तरह की नीलामी देख पाएँगे."
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml " platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi " platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi " platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












