'महीनों तक घास खाने को मजबूर सीरियाई जनता'

दमिश्क के उपनगरीय इलाक़े मोदामिया में फंसे हज़ारों सीरियाई लोगों को आख़िरकार वहां से निकलने की इजाज़त दे दी गई है. मौक़े पर मौजूद बीबीसी संवाददाता लीज़ डूसेट का कहना है कि बदहवास लोगों की भीड़ इलाक़े को छोड़ रही है जहां वे मार्च के महीने से फंसे हुए थे.
मोदामिया में बुनियादी चीज़ों की आपूर्ति बहुत कम हो पा रही थी जिसके चलते निवासियों ने उन्हें भूख से बचाने की अपील की. सरकारी सेनाओं की नाकेबंदी में ढील दिए जाने के बाद नागरिकों का इस इलाक़े से निकलना मुमकिन हुआ है.
इससे पहले सीरियाई सेना ने कहा था कि दमिश्क में मोदामिया जैसे विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले इलाक़ों को या तो आत्मसमर्पण करना होगा या भूख से मरना होगा.
सरकारी सेनाओं ने दमिश्क के कम से कम तीन उपनगरीय इलाक़े यारमोक, उत्तरी घौटा, और मोदामिया की पिछले कई महीनों से नाकेबंदी कर रखी है. स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि इस महीने की शुरूआत में मुस्लिम धर्मगुरूओं ने एक आदेश में लोगों को जिंदा रहने के लिए कुत्ते, बिल्ली और गधे का गोश्त खाने की <link type="page"><caption> इजाज़त</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131015_syria_clerics_fatwa_on_meat_dil.shtml" platform="highweb"/></link> दी थी.
इस्लाम में आमतौर पर इन जानवरों को खाने की इजाज़त नहीं है.
घास खाने को मजबूर

मोदामिया में स्थिति और बिगड़ने की आशंका के मद्देनज़र कई महीनों से संयुक्त राष्ट्र और दूसरी सहायता एजेंसियां लगातार <link type="page"><caption> मदद</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131019_syria_starving_aa.shtml" platform="highweb"/></link> की अपील करती रही हैं. एक महिला ने बीबीसी को बताया, ''हमने पिछले नौ महीने से रोटी का एक टुकड़ा नहीं देखा है. हम घास और पत्तियां खा रहे थे.''
लोगों की निकालने की ज़िम्मेदारी संभालने वाली सामाजिक मामलों की मंत्री किंडा अल शमामत ने हथियारबंद विद्रोहियों पर मोदामिया में घुसपैठ का आरोप लगाया है, जिन्हें उन्होंने चरमपंथियों की संज्ञा दी है.
लेकिन <link type="page"><caption> विद्रोहियों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131011_syria_civilians_rt.shtml" platform="highweb"/></link> का कहना है कि उन्होने उपनगरीय इलाक़े में क़दम नहीं रखा है और सरकार उन्हें भूखा रखकर आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना चाहती है.
पोलियो का ख़तरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सीरिया में पोलियो के 10 मामलों की पुष्टि की है जो पिछले 14 सालों में पहली बार हुआ है. संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी का कहना है कि 12 और मामलों की जांच चल रही है.
2011 में सीरियाई गृह युद्ध की शुरुआत से पहले 95 फ़ीसदी बच्चों को पोलियो की वैक्सीन दी गई थी लेकिन अब अनुमान है कि क़रीब 5 लाख बच्चों को वैक्सीन नहीं दी गई है.
इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि पोलियो को फैलाने में शायद सीरिया में लड़ रहे <link type="page"><caption> विदेशी गुटों </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130925_balochistan_cm_on_sirya_pk.shtml" platform="highweb"/></link>का हाथ है.
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