भारत और भूटान: बिजली से मज़बूत होते रिश्ते

- Author, अनबरासन एथिराजन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, भूटान
भूटान में हिमालय के ग्लेशियर से निकलने वाली नदियों को आत्मनिर्भरता के लिए देखा जा रहा है. कुछ लोग इन नदियों को सफ़ेद सोना भी बताते हैं.
भूटान इन नदियों पर बड़े बांध बनाकर पनबिजली पैदा करना चाहता है. क्योंकि भूटान की अपनी ज़रूरतों के अलावा भूटान के पास भारत के रूप में बिजली का एक बड़ा ग्राहक भी है.
मध्य भूटान में पुनासांचू नदी पर एक बड़ा बांध बन रहा है. इस इलाके में इसके अलावा दो और परियोजनाओं पर काम चल रहा है.
इन बांधों से 1,200 मेगावॉट बिजली पैदा होगी. इसमें से ज़्यादातर बिजली पड़ोसी भारत को निर्यात कर दी जाएगी.
यही भूटान की ताकत है. भूटान के पास बड़ी मात्रा में जल संसाधन हैं, जिससे बिजली बनाई जा सकती है और भारत बिजली पाने के लिए बेताब है.
अर्थव्यवस्था में अहम योगदान

बीते साल भूटान ने भारत को 5,500 मिलियन यूनिट यानी 550 करोड़ यूनिट से ज़्यादा बिजली का निर्यात किया था.
इससे भूटान को जो रकम मिली वो इस देश के सकल घरेलू उत्पाद के एक तिहाई से ज़्यादा है.
अनुमान के मुताबिक भूटान में 30 हज़ार मेगावॉट से ज़्यादा बिजली पैदा करने की संभावित क्षमता है. भूटान और बांध बनाना चाहता है. भारत इन परियोजनाओं के लिए अरबों डॉलर मदद के तौर पर दे रहा है.
पुनासांचू परियोजना के आर एन खज़ांची कहते हैं, “दोनों सरकारें साल 2020 तक 10 हज़ार मेगावॉट बिजली पैदा करने के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं. जैसा मैंने बताया कि इसमें से 3,000 मेगावॉट पैदा करने की तीन परियोजनाएं हैं और बाकी की 7,000 मेगावॉट बिजली पैदा करने की सात परियोजनाएं हैं. जिन पर काम शुरू होना बाकी है.”
व्यापार असंतुलन

भारत को भूटान बिजली निर्यात करता है और रोज़मर्रा की ज़रूरत की करीब-करीब हर चीज़ भारत से आयात करता है.
इसमें कपड़े, खाने-पीने की चीज़ें, निर्माण सामग्री और कार तक शामिल है.
भूटान का मानना है कि ज़्यादा बिजली का निर्यात कर वो व्यापार असंतुलन को सुधार सकता है.
भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोग्बे ने बीबीसी से कहा, “बिजली क्षेत्र का विकास भारत और भूटान के दोस्ताना संबंधों का प्रतीक बन गया है. दोनों देशों ने मिलकर बिजली परियोजनाएं तैयार की हैं. जिससे दोनों देशों को फ़ायदा होगा.”
वो आगे कहते हैं, “भारत में बिजली की मांग बहुत ज़्यादा है और हम खुशकिस्मत हैं कि हम इसे कम करने में थोड़ा योगदान दे सकते हैं”
साफ़ है कि ज़्यादा बिजली पैदा कर भूटान न सिर्फ़ अपने विकास को गति दे सकता है बल्कि भारत से भी रिश्ते मज़बूत कर सकता है.
भारत एनर्जी डिप्लोमेसी का इस्तेमाल कर दक्षिण एशिया में संबंध सुधारना चाहता है और हिमालय में बसा नन्हा सा भूटान इसका उदाहरण है कि कैसे सभी देश इससे फ़ायदा उठा सकते हैं.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> क्लिक करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












