कीनिया हमला: जो बच गए, उनकी दास्तां

नैरोबी

कीनिया की राजधानी नैरोबी के एक शॉपिंग मॉल में बंदूकधारियों के हमले में 69 लोग मारे गए हैं और 170 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. वहीं कुछ लोग वहां से सुरक्षित बच निकले.

कीनिया के मंत्री जोए लेन्कु के मुताबिक सोमालिया के संदिग्ध चरमपंथी संगठन अल-शबाब के बंदूकधारियों के हमले में <link type="page"><caption> 1000 लोग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130923_kenya_gunfire_update_ra.shtml" platform="highweb"/></link> बच निकलने में कामयाब हो गए हैं.

आखिर <link type="page"><caption> वैस्टगेट मॉल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130921_kenya_attack_sm.shtml" platform="highweb"/></link> में क्या हुआ? कुछ लोग चरमपंथियों की गिरफ्त से कैसे निकले? इसके अलावा कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनका परिवार अब भी शॉपिंग मॉल में फंसा हुआ है.

उन लोगों ने बीबीसी को अपनी आपबीती बताई

सुराजीत बोरकाक्योटी

हमले के वक़्त हम वैस्टगेट मॉल में ही थे. आमतौर पर लोग वीकेंड पर वहाँ जाते हैं.

हमने अपनी कॉफी की पहली ही चुस्की ली थी कि अचानक नीचे वाली मंजिल से गोलियां चलने की आवाजें आने लगीं.

लोग इधर-उधर भागने लगे. छत पर भी गोलियां चल रही थीं. फिर क्या था, बस अफरातफरी मच गई.

हम डर कर कॉफी शॉप के भीतर रखी एक आलमारी में छिप गए. बाद में स्टाफ ने हमें रसोई में छुपाया. हम 20 लोग थे.

सभी डर से कांप रहे थे. छोटी सी जगह, सहमे लोग, रोते बच्चे, यही था वहां का मंज़र.

पुलिस ने करीब दो या तीन घंटे बाद हमें वहां से निकाला.

हैना चिशोम

नैरोबी

मैं इंग्लैंड से हूं. फिलहाल मैं <link type="page"><caption> नैरोबी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130921_kenya_attack_sm.shtml" platform="highweb"/></link> में रहती हूं. मैं तब सुपरमार्केट में शॉपिंग कर रही थी. हम लोग बाहर निकलने वाले ही थे कि गोलियां चलने लगीं.

सब इधर-उधर भागने लगे थे,गोलियों की आवाज़ और तेज़ होती जा रही थी. फिर हमने, करीब 60 लोगों ने, खुद को एक बड़े स्टोर रुम में बंद कर लिया.

हमारे साथ बच्चे थे और कुछ वे लोग भी जिन्हें गोली लगी थी.

हमें यही अंदाज़ा हुआ था कि कुछ बंदूकधारी चोरी करने मॉल में घुस आए हैं. फिर अटकलें लगने लगीं कि वे बंदूकधारी शायद चरमपंथी हो सकते हैं और वे लोगों को मार रहे हैं. वह सब बहुत भयानक था.

हम घंटों बॉक्स में छुपे रहे. अंत में सादी वर्दी वाले ऑफिसरों ने हमें वहां से बाहर निकाला.

सुनील

नैरोबी

अचानक शोर-शराबा होने लगा. हमें लगा कि कहीं कोई विस्फोट हुआ है, या कोई इमारत ढह गई है. हमें तब इस बात की तनिक भी आशंका नहीं हुई कि यह सब शॉपिंग सेंटर के भीतर हो रहा है.

मैं एक ऑर्थोडोंटिस्ट हूं. मेरी पत्नी दांतों की डॉक्टर हैं. हमारी क्लीनिक वैस्टगेट सेंटर की चौथी मंजिल पर है.

हमने खिड़की से देखा कि बाहर लोग भाग रहे थे. वे छत की पार्किंग एरिया से बाहर निकल रहे थे.

कार पार्क में हमें तीन बंदूकधारी भी दिखाई दिए. फिर उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी. मैंने सोचा दो गुटों के बीच आपसी रंजिश में ये सब हो रहा है. हमें वहां जमीन पर पड़ी लाशें दिखीं. हम क्लीनिक की जमीन पर लेट गए ताकि हमें कोई देखे ना.

मेरी पत्नी दूसरी मंजिल पर फंसी हुई थीं. मैंने उन्हें फोन करके सारी बात बताई और आस-पास किसी कमरे में छिप जाने की हिदायत दी. मैं उन तक पहुंचने की कोशिश में जब सीढियों से उतर रहा था, तो रास्ते में मुझे एक गर्भवती औरत की लाश दिखी.

नैरोबी
इमेज कैप्शन, चरमपंथी संगठन अल-शबाब के हमले में 1000 लोग बच निकलने में कामयाब हो गए हैं.

तभी मेरे फोन की बैटरी खत्म हो गई. मैं अब पत्नी से संपर्क नहीं कर पा रहा था. दहशत बढ़ रही थी.

आखिरकार मेरा बेटा सादी वर्दी वाले चार ऑफिसरों को बुलाने में सफल रहा. उन लोगों ने हमें बचा लिया. मेरी पत्नी भी करीब आधे घंटे बाद बच निकलने में सफल रही.

मैं और लोगों की मदद के लिए रेड क्रॉस के साथ अंदर ही रहा. मैंने 12 लोगों के शव देखे.

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