पाकिस्तानः आसमान में पहुंचाने वाली बारूदी कूरियर सर्विस

- Author, वुसतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान
पेशावर में कोहाट गेट चर्च के दर्जनों इबादत करने वाले भी उन पाकिस्तानियों में शामिल हो गए जो पिछले 12 सालों के दौरान बारूदी लिफ़ाफ़े में आसमानी पते पर कूरियर कर दिए गए.
यूं तो सातवें आसमान पर इस समय लगभग 50 हजार पाकिस्तानी, अंतरधार्मिक और अंतरजातीय बातचीत में मसरूफ़ हैं. रोज़ाना के हिसाब से 25 नए प्रतिनिधि शरीर की गंदगी से आजाद होकर इस जलसे में शिरकत करने के लिए पाक जमीन से रवाना हो रहे हैं.
<link type="page"><caption> पढ़िए: पेशावर में चर्च पर हमला</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130922_peshawar_attack_aa.shtml" platform="highweb"/></link>
अब आसमान ही वो जगह है जहां लॉ एंड ऑर्डर यहाँ के मुकाबले थोड़ा बेहतर है. कम से कम वहाँ सभी मजहबों और विचारों की रूहें एक साथ बैठकर बारूद से मुक्त वातावरण में मौत के डर से बेखौफ़ होकर खुल के बातचीत कर सकती हैं.
लेकिन जो ज़मीन पर परलोक की यात्रा का इंतज़ार कर रहे हैं, उन्हें बिल्कुल निराश नहीं होना चाहिए क्योंकि सरकार ने उनकी बारी आने तक सरकारी ट्रांज़िट कैम्पों में अच्छे इंतजाम किए हैं.
मिसाल के तौर पर हर मुसाफ़िर को उसकी सामाजिक पद और हैसियत के मुताबिक़ एक लाख से 20 लाख रुपये बतौर सफ़र का ख़र्च देने की योजना जारी रहेगी.
'आखिरी मंजिल'

हर उम्र के मुसाफ़िरों का दिल बहलाने के लिए कैम्प में मुफ़्त लैपटॉप, नए बांध, बुलेट ट्रेन और मोटर गाड़ियों के मॉडल, रोज़गार योजनाओं के गुब्बारे, इनकम सपोर्ट प्रोग्राम के मशीनी झूले, रियायती कर्ज़ों के लूडो और अपराधियों के खिलाफ़ कार्रवाई की गुलेलों जैसे छोटे-बड़े चमकदार खिलौने मौजूद हैं.
इन दिनों जब भीड़-भाड़ का मौसम है, फ़्लाइट आगे पीछे हो सकती है लेकिन ये निश्चित है कि आखिर में सभी की बारी आ जाएगी. जहां इतने दिन काट लिए वहीं कुछ दिन और सही.
<link type="page"><caption> पढ़िए: तालिबान कमांडर रिहा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130921_pak_taleban_ia.shtml" platform="highweb"/></link>
पहले के लोगों ने जिस कूरियर कंपनी को पेशेवर और अपना समझ कर सफ़र का ये ठेका दिया था, आज कल उनका दिमाग जाने क्यों आसमान पर हैं.
इसलिए सरकार इस बदतमीज़ कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से मेज पर आमने सामने नई शर्तें तय करने के लिए बिचौलियों की मदद से गंभीर कोशिश कर रही है ताकि रह जाने वाले मुसाफ़िर बिना किसी अतिरिक्त तक़लीफ़ के अपनी आखिरी मंजिल तक पहुंच सकें.
किसी भी दिन कोई अच्छी खबर आ सकती है. तब तक एक दूसरे के दुख सुख में इसी तरह बराबर के शरीक होकर समय बिताते रहिए.

अभी कुछ देर में
अभी कुछ देर बाकी है यहाँ पर शाम ढलने में
अभी कुछ देर बाकी है यहाँ मौसम बदलने में
अभी कुछ देर में
ये रोशनी दम तोड़ जाएगी
अभी कुछ देर में
मिल जाएंगे सब ख़्वाब मिट्टी में
अभी कुछ देर में
सारी सलोनी सूरतों का अक्स
इन बेनूर आंखों से जुदा होगा
अभी कुछ देर में
ये गुफ़्तगू का महल सारा बेसदा होगा
अभी कुछ देर में
याद आएंगे सब काम दुनिया के
जिन्हें तकमील (पूरा करने) के रास्ते में मौत आई
अभी कुछ देर में
कितने फ़साने याद आएंगे
जिन्हें लिखना था लेकिन उसकी मोहलत मिल नहीं पाई
अभी कुछ चिलमनों से झांकती आँखों में पोशिदा (छिपी हुई) उदासी याद आएगी
अभी कुछ देर में
जो भूल बैठे थे, वही भोली कहानी
किसी टूटे सितारे की तरह पल भर फ़लक पर जगमगाएगी
ज़रा सी याद आएगी
अभी कुछ देर में
इस जिंदगी के सब मनाजिर (दृश्य)
आंख के दरबार में यूँ होंगे सफ़-आरा (पंक्तिबद्ध)
जैसे जंग के हंगाम में इक फ़ातहे आलम
शिकस्ते फ़ाश से पहले
करें अपने वफ़ादारों का नज़ारा
अभी कुछ देर में
मनमोहने लोगों की महफ़िल से इजाज़त मांगनी होगी
अभी कुछ देर में बाकी रहेगा हाल, न फ़रदा
अभी कुछ देर में
सारा तमाशा खत्म होगा, बिलयकीं गिर जाएगा पर्दा
(अख़लाक़ अहमद)
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