जब परमाणु बम से तबाह हो जाता अमरीका...

साल 1961 में अमरीका में वक़्त की सबसे बड़ी तबाही आ सकती थी जब चार मेगाटन का एक परमाणु बम फटने से बस एक बटन दूर था.
हाल ही में सार्वजनिक हुए गुप्त दस्तावेज़ों से यह बात सामने आई है.
इनके अनुसार उत्तरी कैरोलिना के ऊपर से गुज़रते हुए एक बी-52 विमान अचानक अनियंत्रित होकर चक्कर खाने लगा. इसमें रखे दो परमाणु बम गिर गए और उनमें से एक में डिटोनेशन प्रक्रिया शुरू हो गई.
यह दस्तावेज़ पहली बार ब्रिटेन के गार्डियन अख़बार में छपे थे.
अमरीकी सरकार ने इस मामले को पहले भी स्वीकार किया है लेकिन कभी भी यह सार्वजनिक रूप से नहीं बताया गया कि <link type="page"><caption> परमाणु बम विस्फ़ोट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130824_1st_nuclear_test_pokhran_rd.shtml" platform="highweb"/></link> के कितने क़रीब था.
लो-वोल्टेज स्विच
ये दस्तावेज़ पत्रकार एरिक श्लोशर ने सूचना की स्वतंत्रता क़ानून के तहत हासिल किए थे.
श्लोशर ने बीबीसी को बताया कि ऐसे किसी भी धमाके से "वस्तुतः इतिहास का रुख़ हमेशा के लिए बदल जाता."
यह विमान 23 जनवरी, 1961 को एक नियमित उड़ान पर था जब यह उत्तरी कैरोलिना के ऊपर अचानक ख़राब होने लगा.
विमान अनियंत्रित होने लगा और कॉकपिट के अंदर एक नियंत्रण प्रणाली ने दो मार्क 39 हाइड्रोजन बमों को गोल्ड्सबोरो के ऊपर गिरा दिया.

श्लोशर ने बीबीसी संवाददाता कैटी के को बताया कि एक बम तो ज़मीन पर बिना चालू हुए गिर गया लेकिन दूसरा "ऐसा प्रतीत होता है कि इसे जान बूझकर दुश्मन के ठिकाने के ऊपर गिराया गया था- एक को छोड़कर इसकी सभी प्रणालियां चालू थीं और यह उत्तरी कैरोलिना के ऊपर फटने के बहुत क़रीब था."
उन्होंने बताया कि सिर्फ़ एक कम-वोल्टेज के स्विच के नाकाम हो जाने की वजह से यह दुर्घटना टल पाई थी.
यह बम <link type="page"><caption> हिरोशिमा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2010/08/100806_hiroshima_anniv_dps.shtml" platform="highweb"/></link> और नागासाकी पर गिराए गए बमों से 260 गुना ज़्यादा शक्तिशाली था.
यह घटना उस समय हुई थी जब अमरीका और रूस के बीच शीतयुद्ध चरम पर था. इसके एक साल बाद क्यूबा मिसाइल संकट सामने आया था जिसके चलते परमाणु हमले का ख़तरा अमरीका पर मंडराने लगा था.
उसके बाद ही से इस बारे में अटकलें लगाई जाती रही हैं. इनमें 1961 में पूर्व सरकारी वैज्ञानिक डॉ राल्फ़ लैप की लिखी गई किताब भी शामिल है.
हाल ही में सार्वजनिक किए गए इन दस्तावेज़ों को हादसे के आठ साल बाद अमरीकी सरकारी के वैज्ञानिक पार्कर जोन्स ने तैयार किया था. वही परमाणु उपकरणों की मैकेनिकल सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार थे.
इसमें घटना के बारे में लैप के ब्यौरे को दुरुस्त करते हुए कहते हैं कि पांच में से चार नाकाम न होने योग्य प्रणालियां नाकाम हुई थीं न की छह में से पांच- जैसा कि लैप ने कहा था.
जोन्स ने लिखा है, "एक सामान्य डाइनेमो-टेक्नोलॉजी कम वोल्टेज स्विच अमरीका और प्रलय के बीच खड़ा रहा."
इन दस्तावेज़ों के बारे में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है.
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