सैन्य कार्रवाई से मज़बूत होंगी चरमपंथी ताक़तें: पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सीरिया मामले में अमरीका के लोगों से व्यक्तिगत अपील की है.
समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में रूसी राष्ट्रपति ने कहा है कि सीरिया के ख़िलाफ़ अमरीका की सैन्य कार्रवाई से चरमपंथी ताक़तों को बढ़ावा मिलेगा.
उन्होंने कहा कि दुनियाभर में लाखों लोग अमरीका को एक आदर्श लोकतंत्र के रूप में नहीं देखते हैं बल्कि उसे अपनी ताक़त का इस्तेमाल करने वाला देश मानते हैं.
इस बीच, सीरिया के रासायनिक हथियारों को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रखने के रूस के सुझाव पर विचार विमर्श करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांचों स्थाई सदस्यों (पी-5) की न्यूयॉर्क में हुई विशेष बैठक समाप्त हो गई है.
बैठक
यह बैठक एक घंटे भी नहीं चली. ब्रिटेन, अमरीका और फ़्रांस चाहते हैं कि सीरिया के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में ऐसा प्रस्ताव लाया जाए जो सीरिया पर बाध्यकारी हो, लेकिन रूस ऐसे किसी भी प्रस्ताव के विरोध में है.
फ्रांस एक प्रस्ताव पर काम कर रहा है जो संयुक्त राष्ट्र की धारा 7 के तहत लागू किया जाएगा. इसके तहत सीरिया अगर अपने दायित्व से मुकरता है तो उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जाएगी.
एक राजनयिक ने बीबीसी से कहा कि पी-5 देशों के प्रतिनिधियों की बैठक केवल सांकेतिक है और गंभीर मुद्दों को जेनेवा बैठक के लिए छोड़ दिया गया है.
रूसी विदेश मंत्री सरगेई लावरॉव और उनके अमरीकी समकक्ष जॉन केरी के बीच इन्हीं मुद्दों पर जेनेवा में गुरूवार को द्विपक्षीय वार्ता होगी.
लड़ाई जारी

उधर, सीरिया में मौजूद बीबीसी संवाददाता जेरेमी बोवेन के मुताबिक सेना और विद्रोहियों के बीच बुधवार को जबर्दस्त लड़ाई जारी थी.
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने बुधवार को कहा था कि सीरिया में अत्याचार रोकने में संयुक्त राष्ट्र और सदस्य देशों की विफलता उन पर भारी बोझ साबित होगी.
सोमवार को रूस ने एक योजना की पेशकश की थी कि सीरिया के रासायनिक हथियारों को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रख दिया जाए. रूस की इस योजना का सीरिया ने स्वागत किया था.
साल 2011 में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ विद्रोह शुरू होने के बाद से अब तक क़रीब एक लाख लोगों की मौत हो चुकी है.
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