क्यों गिर गए ऐपल के शेयर?

सस्ता आईफ़ोन लॉन्च कर बाज़ार में पैठ बनाने की कोशिश के एक दिन के अंदर ही ऐपल के शेयरों में पाँच फ़ीसदी की गिरावट आई है.
निवेशकों की चिंता है कि कंपनी ने जो दो नए मॉडल उतारे हैं, वो उभरते बाज़ारों में ऐपल की हिस्सेदारी बढ़ाने में कामयाब नहीं हो पाएंगे.
मंगलवार को ही कंपनी ने दो नए आईफ़ोन लॉन्च किए थे, आईफ़ोन 5एस और आईफ़ोन 5 सी.
5 सी को आईफ़ोन के सस्ते मॉडल के तौर पर पेश किया जा रहा है लेकिन 16 गीगाबाइट मेमोरी वाला ये बेसिक मॉडल 740 डॉलर की क़ीमत पर उतारा गया है. विश्लेषकों का कहना है कि उभरते बाज़ारों के हिसाब से ये फ़ोन अब भी महंगा है.
<link type="page"><caption> ऐपल </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/09/130911_apple_5c_5s_features_aj.shtml" platform="highweb"/></link>को इन बाज़ारों में अपनी बाज़ार हिस्सेदारी बढ़ाने में सैमसंग और हुआवेई जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ा है.
जैनी मॉन्टगोमरी स्कॉट में मुख्य निवेश रणनीतिकार मार्क ल्युशिनी का कहना है, ‘‘ निवेशक इस बात से निराश हैं कि ऐपल ने अपने नए मॉडल के दाम इतने नीचे नहीं किए कि ये नए बाज़ारों के लिए आकर्षक साबित हों. इसके दाम ऐपल की प्रतिस्पर्धी कंपनियों के मुक़ाबले में कहीं नहीं ठहरते.’’
ऐपल के शेयर बुधवार को 5.4 फ़ीसदी गिर कर 467.7 डॉलर के मूल्य पर बंद हुए.
विकास में रोड़े

अपने आईफ़ोन मॉडल के दम पर ऐपल ने विकसित बाज़ारों में बेशुमार सफलता हासिल की है लेकिन चीन और भारत जैसे उभरते बाज़ारों में यह कंपनी उस सफलता को दोहराने में कामयाब नहीं हो पाई है.
इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही है कि <link type="page"><caption> मोबाइल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/07/130728_pak_mobile_court_dil.shtml" platform="highweb"/></link> सेवा देने वाली कंपनियां इन बाज़ारों के लिए फ़ोन की क़ीमत कम नहीं करती हैं जिसकी वजह से सस्ते फ़ोन उपभोक्ताओं के लिए बेहतर पसंद साबित होते हैं.
ऐसी उम्मीदें थीं कि ऐपल इस बाज़ार को रिझाने के लिए कोई सस्ता सा फ़ोन उतारेगी.
बीटीआईजी रिसर्च में विश्लेषक वॉल्टर पीचिक कहते हैं. ‘‘आईफ़ोन 5 सी की क़ीमत उतनी कम नहीं रखी गई है जो एक महंगा प्रीपेड ख़रीदने वाले उस उपभोक्ता को खींच सके जिसके पास फ़िलहाल <link type="page"><caption> स्मार्टफ़ोन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/08/130816_india_smartphone_rd.shtml" platform="highweb"/></link> नहीं है. असल सवाल ये है कि क्या ऐपल इन बाज़ारों की तरफ़ क़दम बढ़ाती भी है या सिर्फ़ एक महंगा फ़ोन बनाने वाली कंपनी ही बनी रहती है.’’
निवेशकों की उम्मीद ये भी थी कि कंपनी चायना मोबाइल के साथ एक सौदे की घोषणा भी करेगी. 70 करोड़ उपभोक्ताओं वाली चायना मोबाइल दुनिया की सबसे बड़ी फोन कंपनी है जिन्हे ऐपल के संभावित ग्राहकों के तौर पर देखा जा रहा है.
विश्लेषक मानते हैं कि ऐसी किसी घोषणा के ना होने से भी निवेशकों को धक्का पहुंचा है.
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