सीरिया पर सीमित और समुचित हमला:ओबामा

सीरिया पर 'सीमित और समुचित' हमले के लिए संसद की मुहर पर आशान्वित अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि वो सीरिया में सैनिक नहीं उतारेंगे.
व्हाइट हाउस में अमरीकी सांसदों से मुलाक़ात में ओबामा ने कहा है कि वो केवल सीरिया की "रासानिक हथियार इस्तेमाल करने की क्षमताओं" को ख़त्म करना चाहते हैं.
ओबामा ने कहा कि इस हमले में अमरीकी सैनिकों को सीरिया की ज़मीन पर उतरने की कोई योजना नहीं है.
ओबामा ने यह बातें यूरोप रवाना होने के पहले कहीं हैं. अमरीकी राष्ट्रपति यूरोप में जी 20 की बैठक में भाग लेने के लिए जा रहे हैं.
वैश्विक हलचल
ओबामा और उप-राष्ट्रपति जो बाइडन ने रिपब्लिकन नेता जॉन बोएनर से मुलाकात की. बोएनर ने संकेत दिया है कि वो ओबामा को सीरिया पर सैन्य कार्रवाई करने की अनुमति देने के पक्ष में हैं.

इस बीच फ़्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलांड ने सीरिया पर संयुक्त यूरोपीय कार्रवाई की मांग की है. फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांड ने सीरिया में सैन्य कार्रवाई का पुरज़ोर समर्थन किया है लेकिन अमरीका और ब्रिटेन की तरह फ्रांस में भी इस बात का दबाव बढ़ रहा है कि इसके लिए संसद से अनुमति ली जाए.
फ्रांस में इस मुद्दे पर राष्ट्रीय असेंबली में बुधवार को बहस होनी है लेकिन मतदान होगा या नहीं, ये अभी तय नहीं है.
दूसरी तरफ इसराइल ने अमरीका के साथ मिलकर भूमध्य सागर में मिसाइल का परीक्षण किया है. एक वरिष्ठ इसराइली अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि लड़ाकू विमान से इस मिसाइल को दागा गया.
हालांकि रूस और चीन बराबर सीरिया में किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप का विरोध कर रहे हैं.
सीरिया अमरीका के इन आरोपों को ठुकराता है कि उसने अपने नागरिकों पर रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया, जबकि अमरीकी बारबार कह रहा है कि उसके पास इस हमले के सबूत के पक्के सबूत हैं और इनमें 1429 लोग मारे गए.
तिहाई आबादी बेघर

इस बीच संयुक्त राष्ट्र संघ ने कहा है कि सीरिया में चल रहे संघर्ष के कारण अब तक बीस लाख लोगों को घरबार छोड़कर शरणार्थी बनना पड़ा है.
शरणार्थियों की यह तादाद छह महीने पहले दर्ज लोगों के मुक़ाबले दोगुनी है. बहुत से सीरियाई तुर्की, जॉर्डन और लेबनान जैसे पड़ोसी देशों में शरण ले रहे हैं.
लगभग सात लाख सीरियाई अब तक अकेले लेबनान में शरण ले चुके हैं.
संयुक्त राष्ट्र संघ के मुताबिक़ सीरिया में 50 लाख लोग विस्थापन का शिकार हैं. इसका मतलब यह है कि देश की कुल आबादी का तिहाई हिस्सा बेघर है.
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