'हमले से हरसंभव बचाव करेगा सीरिया'

सीरिया के विदेश मंत्री वालिद मुआलेम ने कहा है कि अगर उनके देश पर हमला हुआ तो हर संभव तरीक़े से अपना बचाव करेंगे.

उन्होने कहा है कि पश्चिमी देशों की तरफ़ से कथित रासायनिक हमले के आरोप झूठ हैं,जिनका उद्देश्य दरअसल इसराइल औऱ अल-क़ायदा के हितों को पूरा करना है.

इससे पहले, अमरीकी रक्षा मंत्री चक हेगेलने कहा कि अगर राष्ट्रपति बराक ओबामा हमले का आदेश देते हैं तो अमरीकी सेनाएं सीरिया पर हमले के लिए तैयार हैं.

हेगल ने बीबीसी से कहा,“हमने साजो-सामान उचित जगह पर पहुंचा दिया है ताकि जो भी फैसला राष्ट्रपति लें, उस पर अमल किया जा सके.”

उन्होंने कहा कि दमिश्क के आसपास पिछले हफ़्ते हुए कथित रासायनिक हथियारोंके इस्तेमाल के बारे में ये साफ़ होता जा रहा है कि सीरियाई सरकार ही इस हमले के लिए ज़िम्मेदार है.

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी भी कह चुके हैं कि इस बात के 'अकाट्य' सबूत हैं कि सीरिया ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया.

सीरिया के विदेश मंत्री वालिद मुआलेम ने कहा है कि पश्चिमी देशों की तरफ़ से कथित रासायनिक हमले के आरोप झूठ हैं
इमेज कैप्शन, सीरिया के विदेश मंत्री वालिद मुआलेम ने कहा है कि पश्चिमी देशों की तरफ़ से कथित रासायनिक हमले के आरोप झूठ हैं

हालांकि बाद में व्हाइट हाउस की तरफ़ से जारी एक बयान में कहा गया है कि अमरीका का दख़ल केवल कथित रासायनिक हमले के जवाब में होगा ना कि सत्ता परिवर्तन के लिए.

सुरक्षा परिषद में मतभेद

सीरिया के मुख्य सहयोगी देश रूस,ईरान और चीन ने किसी भी हस्तक्षेप के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया के मुद्दे पर स्पष्ट मतभेद बरकरार हैं.

रूस और चीन, दोनों ही सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध कर रहे हैं जबकि ब्रिटेन और फ्रांस चेतावनी दे रहे हैं कि अगर 'मानवीय जरूरत आन पड़ी' तो संयुक्त राष्ट्र की अनदेखी की जा सकती है.

लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि ऐसे कोई संकेत नहीं है कि ऐसा कोई हमला हुआ या फिर इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है.

रूस के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनदेखी करके आधारहीन बातों के बल पर की गई ऐसी किसी भी कार्रवाई के गंभीर परिणाम होंगे.

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ की ख़बर के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र जांच दलकी रिपोर्ट से पहले ही पश्चिमी देश इस नतीजे पर पहुंचने की जल्दबाज़ी दिखा रहे हैं कि सीरिया में रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किसने किया.

दुनिया भर में प्रतिक्रिया

ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने गुरुवार को दोबारा संसद बुलाई है ताकि सीरिया संकट पर ब्रिटेन की प्रतिक्रिया पर मतदान कराया जा सके.

कैमरन ने ज़ोर देकर कहा है कि किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई का मकसद मध्य-एशियाई विवादों में पड़े बिना भविष्य में रासायनिक हथियारों की दिशा तय करने पर होगा.

कैमरन और फ्रांसीसी राष्ट्रपति दोनों ने कहा है कि दुनिया मूक दर्शक बन कर खड़ी नहीं रह सकती.

अरब लीग ने कहा है कि वह सीरियाई सरकार को इस कथित रासायनिक हमले के लिए पूरी तरह से ज़िम्मेदार मानती है. वहीं सऊदी अरब और तुर्की ने सीरिया के ख़िलाफ़ निर्णायक और सख़्त क़दम उठाने की बात कही है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सीरिया में मार्च 2011 में राष्ट्रपति बशर-अल-असद के खिलाफ शुरू हुए विद्रोह में अब तक एक लाख से ज्यादा लोग मारे गए हैं.

लेकिन पिछले हफ्ते कथित रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के बाद अंतरराष्ट्रीय बिरादरी सीरिया के मुद्दे पर खास तौर से सक्रिय हो गई है. सीरियाई विपक्ष का कहना है कि इस हमले में सैकड़ों लोग मारे गए.

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