धमकी से नहीं सुलझेगा परमाणु मुद्दा: रूहानी

ईरान के राष्ट्रपति <link type="page"><caption> हसन रूहानी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130803_iran_president_oath_ia.shtml" platform="highweb"/></link> ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उसके आणविक कार्यक्रम पर “गंभीर और स्थायी” बातचीत करने को कहा है.
रविवार को राष्ट्रपति पद संभालने के बाद अपनी पहली पत्रकारवार्ता में <link type="page"><caption> हसन रूहानी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130804_iran_prez_sanction_sm.shtml" platform="highweb"/></link> ने कहा कि उन्हें इस बात का विश्वास है कि दोनो पक्षों की चिंताओं को थोड़े ही समय में सुलझा लिया जाएगा.
लेकिन उन्होंने कहा कि कोई भी समाधान सिर्फ़ बातचीत के माध्यम से ही निकाला जा सकता है न कि धमकी देकर.
अमरीका ने कहा है कि हसन रूहानी का कार्यकाल <link type="page"><caption> ईरान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130802_iran_president_israel_an.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए एक मौका है कि वो दुनिया की चिंताओं का हल निकाल सके.
अमरीका की तरफ़ से जारी बयान के अनुसार, “अगर ये नई सरकार अपने अंतरराष्ट्रीय कर्तव्यों को गंभीरता से निपटाने का इरादा रखती है और इस मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालना चाहती है तो अमरीका उसका सहयोग करेगा.”
पश्चिमी देशों को संदेह है कि ईरान आणविक हथियार विकसित करना चाहता है लेकिन ईरान कहता है कि उसका आणविक कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.
ईरान ने बार-बार उन मांगों को ठुकरा दिया है जिसमें उसे यूरेनियम के संवर्धन को रोकने के लिए कहा गया है.
अमरीका का व्यवहार
मंगलवार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों से बात करते हुए हसन रूहानी ने कहा कि ईरान का आणविक कार्यक्रम कानून के अंतर्गत है और वो जारी रहेगा. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि वो लंबे समय से चले आ रहे झगड़े को खत्म करना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, “हम तैयार हैं. हम गंभीर हैं और वक्त बरबाद करना नहीं चाहते. हम दूसरे पक्षों से गंभीरता के साथ बातचीत करना चाहते हैं. मुझे विश्वास है कि थोड़े समय की बातचीत के बाद दोनो तरफ़ की चिंताएँ खत्म हो जाएंगी.”
लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ईरान के अधिकारों की रक्षा की जाएगी.
हसन रूहानी ने कहा कि अमरीका को इस बात की सही <link type="page"><caption> समझ नहीं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130617_israel_iran_ra.shtml" platform="highweb"/></link> है कि ईरान में क्या हो रहा है, और उसने जून के राष्ट्रपति चुनावों के बाद ‘उपयुक्त और व्यवहारिक’ तरीके से बर्ताव नहीं किया है.
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लैवरोव ने हसन रूहानी के बातचीत के प्रस्ताव का स्वागत किया है.
उन्होंने रोम में पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा, “हम उनकी बातों से पूरी तरह सहमत हैं. किसी भी मसले को अल्टीमेटम के आधार पर नहीं बल्कि सहयोगी की इज़्जत करते हुए सुलझाना चाहिए.”
इससे पहले सर्गेई लैवरान के एक जूनियर सहयोगी ने कहा था कि ईरान के साथ बातचीत में कोई भी देरी नहीं होनी चाहिए और बातचीत सितंबर-मध्य तक हो जानी चाहिए.
अपनी पत्रकारवार्ता में हसन रूहानी ने प्रण लिया कि उनकी सरकार जिम्मेदार और पारदर्शी तरीके से काम करेगी.
हसन रूहानी की सरकार को बढ़ती महंगाई, घटती आमदनी, खाद्यान की कमी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों जैसी चुनौतियों का सामना है.
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