बांग्लादेश में जमात ए इस्लामी पर कसा शिकंजा

बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने देश की मुख्य इस्लामी पार्टी जमात ए इस्लामी को चुनावी नियम तोड़ने का दोषी करार दिया है, जिसके चलते उसे अगले साल होने वाले आम चुनाव में हिस्सा लेने से रोका जा सकता है.
पाकिस्तान से बांग्लादेश की आजादी का विरोध करने वाली जमात ए इस्लामी के नेताओं के खिलाफ इन दिनों युद्ध अपराध के आरोपों में मुकदमे चल रहे हैं जिनके फैसलों के बाद देश में हिंसक प्रतिक्रिया देखने को मिली है.
बांग्लादेश का धर्मनिरपेक्ष संविधान धर्म को राजनीति से दूर रखने पर जोर देता है. वहीं जमात का कहना है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है और पार्टी इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेगी.
अदालत के सामने चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए एक अधिवक्ता ने कहा कि यदि जमात ए इस्लामी चुनावों में अपने उम्मीदवार खड़े करना चाहती है तो पार्टी को अपने घोषणापत्र में बदलाव कर दोबारा पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा.
<link type="page"><caption> बांग्लादेश: इस्लामी नेता को मौत की सज़ा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/07/130717_bangladesh_islamist_execution_verdict_rd.shtml" platform="highweb"/></link>
हाई कोर्ट में जजों की एक खंडपीठ ने जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ़ दायर की गई उस याचिका पर सुनवाई की जिसमें कहा गया है कि यह पार्टी बांग्लादेश की स्वतंत्रता और संप्रभुता में विश्वास नहीं रखती है.
जमात पर शिकंजा
याचिका दायर करने वाले अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि जमात का घोषणापत्र बांग्लादेश के संविधान के खिलाफ़ है. हाई कोर्ट ने याचिका के पक्ष में फैसला दिया.
गुरुवार को आए फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि जमात अपनी राजनीतिक गतिविधियाँ जारी रख सकेगी. बांग्लादेश में अगले साल जनवरी में आम चुनाव होने हैं.
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चुनाव आयोग के अधिवक्ता शाहदीन मलिक ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "यदि जमात अपने घोषणापत्र में बदलाव करके इसे संविधान के अनुरूप बना लेती है और पंजीकरण के लिए फिर से आवेदन देती है तो पार्टी का फिर से पंजीकरण हो जा सकता है."
जमात के चार बड़े नेताओं को 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हत्या, नरसंहार, बलात्कार और उत्पीड़न के आरोपों में इस साल मौत की सजा सुनाई जा चुकी है.
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) की ओर से गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ फ़रवरी से आए अदालत के विवादित फैसलों के बाद हुई हिंसा में अब तक कम से कम 150 लोग मारे जा चुके हैं. मारे गए लोगों में ज्यादातर प्रदर्शनकारी थे जबकि सुरक्षा एजेंसियों के कम से कम 12 जवान भी अब तक हिंसा में मारे जा चुके हैं.
एचआरडब्ल्यू की एक प्रवक्ता ने कहा कि आगामी अदालती फैसलों के मद्देनजर देश में और भी हिंसा होने की संभावना है.
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