ईरान के राष्ट्रपति अमरीका से रिश्तों में सुधार चाहते हैं

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इमेज कैप्शन, रूहानी मुल्क के कई अहम पदों पर रह चुके हैं.

ईरान में राष्ट्रपति पद के लिए हुआ चुनाव 64 वर्षीय उदारवादी नेताहसन रूहानीने जीत लिया है. राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने वाले वे एकमात्र धार्मिक गुरु थे.

हसन रूहानी का कहना है कि वे देश को उदारवाद की राह पर चलाना चाहते है और उनके पास उन सुधारवादियों का समर्थन हासिल है जिनका नेतृत्व पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ात्मी कर रहे हैं.

पूर्व राष्ट्रपति अकबर हाश्मी रफ़सनजानी भी रूहानी के हिमायती रहे हैं. रफ़सनजानी को इस्लामी उदारवादियों में गिना जाता है. लेकिन उनके चुनाव लड़ने पर रोक है.

रूहानी जहां भी चुनाव प्रचार के लिए गए भारी भीड़ को खींचने में कामयाब रहे. अपने भाषणों में उन्होंने सुधार, राजनीतिक बंदियों की जेल से रिहाई, नागरिक अधिकारों की गारंटी और 'देश की प्रतिष्ठा' वापस लाने का वायदा किया

टेलीविज़न पर हुई बहसों के दौरान उन्होंने ऐसे विषयों को उठाया जिन पर बात करना वर्जित माना जाता है. जैसे परमाणु मुद्देपर दुनिया के शक्तिशाली देशों के साथ गतिरोध, देश को नुकसान पहुँचाते अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, अर्थव्यवस्था की लचर हालात और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में ईरान का एकदम अलग-थलग पड़ना.

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इमेज कैप्शन, रूहानी ने लोगों से कहा था कि कट्टरपंथी नहीं चाहते कि वो वोट करें.

उन्होंने ईरान के पुराने दुश्मन अमरीका के साथ राजनयिक संबंधों को बहाल करने की बात कही है. साल 1979 में इस्लामी छात्रों ने तेहरान में स्थित अमरीकी दूतावास पर कब्ज़ा कर लिया था जिसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्ता टूट गया था.

लोगों से अपील

इन चुनावों में रूहानी ने लोगों से ये कहकर वोट करने की अपील की कि कट्टरपंथी ''नहीं चाहते है आप वोट करें , वो मतों को बिना किसी चुनौती के ही जीतना चाहते हैं.''

हसन रूहानी ईरान की राजनीति में एक अहम शख्सियत का दर्जा रखते हैं. वे कई बार संसदीय पदों पर रह चुके हैं. जैसे उप स्पीकर और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई के प्रतिनिधि का पद.

वे खात्मी के शासनकाल के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर प्रमुख वार्ताकार रहे हैं और वर्तमान में वे एक्सीपीडीअंसी कॉउसिल में स्ट्रेटजिक रिसर्च सेंटर के प्रमुख भी हैं. ये परिषद दरअसल सर्वोच्च नेता की उच्च सलाहकार संस्था है.

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इमेज कैप्शन, ईरान में पांच करोड़ लोग अपने मतों का इस्तेमाल करने योग्य थे.

साल 1999 में एक सुधारवादी अखबार के बंद होने का छात्रों ने विरोध किया था. इस दौरान रूहानी ने सख्त कदम उठाते हुए कहा था कि जिन्हें सरकारी संपति को नुकसान पहुंचाने और तोड़-फोड के मामले में गिरफ्तार किया गया है, उन्हें दोषी पाए जाने पर मृत्युदंड दिया जाएगा.

जनता के साथ

लेकिन साल 2009 में चुनाव के बाद लोगों ने जो विरोध प्रदर्शन किए उसका रूहानी ने समर्थन किया था. उन्होंने इस शांतिपूर्ण विरोध को लोगों का अधिकार बताया था और सरकार का इसका विरोध करने की आलोचना की थी.

साथ ही उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति मेहमूद अहमदीनेजाद की खुलकर ये कहते हुए आलोचना की थी कि वे लापरवाह हैं और उन्होंने 'बिना सोचे समझे चीज़े की हैं' जिसकी वजह से देश को नुकसान हुआ है.

ग्लासगो केलीडॉनिएन यूनिवर्सिटी से क़ानून विषय में डॉक्टेरेट कर चुके रूहानी अंग्रेजी, जर्मनी, फ्रांसीसी, रुसी और अरबी फर्राटे से बोल सकते हैं.

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