बीबीसी ने की ईरान के 'उत्पीड़न' की निंदा'

बीबीसी ने ईरान द्वारा शुक्रवार को<link type="page"><caption> राष्ट्रपति चुनावों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130613_iran_election_analysis_vr.shtml" platform="highweb"/></link> से पहले बीबीसी कर्मचारियों के परिवारों को मिली “धमकियों के अप्रत्याशित स्तर” की निंदा की है.
समाचार संस्था ने कहा है कि ईरान के बीबीसी की फारसी सेवा के 15 कर्मचारियों के परिवारों को चेतावनी दी है कि वो बीबीसी के लिए काम बंद करना बंद कर दें अन्यथा लंदन में उनका जीवन खतरे में पड़ जाएगा.
परिवार के सदस्यों को भी धमकी दी गई है कि वो अपनी नौकरी से हाथ धो सकते हैं और उनकी विदेश यात्रा पर रोक लग सकती है.
<link type="page"><caption> ईरानी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130319_iraq_chronology_vr.shtml" platform="highweb"/></link> अधिकारियों ने अभी तक इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
‘लचीलापन’
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में भाषाई सेवाओं की प्रमुख लिलिएन लैनडोर ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि, “तेहरान और देश के दूसरे शहरों में पिछले 15 दिनों में 15 परिवारों से ईरानी खूफिया मंत्रालय ने पूछताछ की है.”
उन्होंने बताया, “उत्पीड़न में धमकी शामिल हैं, जो नौकरी और पेंशन खो देने तथा विदेश यात्रा पर पाबंदी से संबंधित हैं.”
उन्होंने साथ ही कहा कि, “पहली बार ब्रिटेन में रह रहे बीबीसी फारसी टेलीविजन के स्टॉफ के भी धमकी दी गई है.”
बीबीसी फारसी के प्रमुख सादिक साबा ने कहा कि दबावों के बावजूद सेवा “ईरान के लोगों के लिए समाचार का स्वतंत्र और वैकल्पिक स्रोत बनी रहेगी.”
बीबीसी ने यह भी कहा है कि ईरान में उसके दर्शकों सी संख्या लगभग दोगुनी होकर 1.18 करोड़ हो गई है. ईरानियों की यह स्वीकृति बीबीसी के पत्रकारों के पेशेवर रूख और लचीलेपन के प्रति सम्मान की दर्शाता है.
‘दुश्मन और हमलावर’

बीबीसी द्वारा की गई यह आलोचना ऐसे वक्त आई है जब लाखों ईरानी शुक्रवार को वोट डालने की तैयारी कर रहे हैं.
छह प्रत्याशी मैदान में हैं और हाल में उदारवादी मौलवी हसन रहानी को लेकर माहौल बनता दिखा है.
लेकिन उन्हें शीर्ष परमाणु वार्ताकार <link type="page"><caption> सईद जलीली</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130613_iran_presiidential_election_sk.shtml" platform="highweb"/></link> और तेहरान के मेयर मेहम्मद बाकर कलीबाफ जैसे कट्टरपंथी प्रत्याशियों से तगड़ी चुनौती मिल रही है.
चुनाव परिणाम मोहम्मद अहमदीनेजाद का उत्तराधिकारी तय करेंगे, जो तीसरे कार्यकाल के लिए योग्य नहीं हैं.
उनके आठ वर्षों के कार्यकाल को<link type="page"><caption> विवादित परमाणु कार्यक्रम</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/04/130409_iran_earthquake_gallery_va.shtml" platform="highweb"/></link> के कारण ईरान के खिलाफ पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और आर्थिक संकट के लिए याद रखा जाएगा.
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह ख़मेनेई ने सभी ईरानियों से वोट देने की अपील की है.
मजबूत जनादेश
आयतुल्लाह ख़मेनेई की वेबसाइट ने उन्हें उद्धृत करते हुए कहा है कि, “जो भी चुना जाएगा, यदि उसे एक मजबूत और अत्यधिक वोट मिलता है तो वह शत्रुओं और हमलावरों के खिलाफ कहीं बेहतर तरीके से खड़ा हो सकेगा.”
पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी की सलाह पर एक मात्र सुधारवादी प्रत्याशी मोहम्मद रजा आरिफ ने मंगलवार को अपना नाम वापस ले लिया था, इसके बाद रहानी के पक्ष में समर्थन बढ़ गया है.
रहानी को दो पूर्व राष्ट्रपति खातमी और अकबर हशेमी रफसनजानी की समर्थन हासिल है.
चुनाव में अन्य ज्यादातर उम्मीदवार कट्टरपंथी हैं और आयतुल्लाह ख़मेनेई के करीबी हैं.
इससे पहले ईरान में 2009 में चुनाव हुए थे, जब प्रदर्शनकारी चुनाव परिणामों को लेकर गुस्से के कारण सड़कों पर आ गए थे. उनका कहना था कि परिणामों को अहमदीनेजाद के पक्ष में मोड़ा गया है.
विपक्ष का कहना है कि उनके खिलाफ कार्रवाई में छह माह के दौरान 80 से अधिक लोग मारे गए, हालांकि इस आंकड़े से सरकार सहमत नहीं है.












