क्या आपका परिवार चीनी से नाता तोड़ सकता है?

(फ़ाईल चित्र)
इमेज कैप्शन, अगर ख़ून में ग्लूकोज़ की मात्रा बहुत ज़्यादा होगी तो इससे शरीर के अंगों को नुक्सान हो सकता है. (फ़ाईल चित्र)

जब जेसन और क्लेयर बर्ट को पता चला कि उनकी बेटी को टाइप 1 <documentLink href="" document-type=""> डायबीटीज़</documentLink> है तो पूरे परिवार ने चीनी छोड़ने का फैसला किया.

लेकिन उनके लिए ये <documentLink href="" document-type=""> फ़ैसला</documentLink> लेना आसान नहीं था.

ब्रिटेन के जेसन बर्ट कहते हैं, "लगभग एक महीने तक मुझे <documentLink href="" document-type=""> हैंगओवर</documentLink> या ज़्यादा शराब पीने के बाद होने वाला एहसास रहा. मैं बहुत ज़्यादा आलस महसूस कर रहा था और किसी भी चीज़ पर ध्यान नहीं लगा पा रहा था."

जेसन की 16 वर्षीय बेटी लूसी को सितंबर 2011 में पता चला कि उसे टाइप 1 या डायबीटीज़ <documentLink href="" document-type=""> मैलिटस</documentLink> है.

इस <documentLink href="" document-type=""> बीमारी</documentLink> में पैन्क्रियास या अग्नाश्य में इंसुलिन नहीं बन पाती. इंसुलिन वो हॉर्मोन है जो खून में ग्लूकोज़ का स्तर नियंत्रित करता है.

और अगर ख़ून में <documentLink href="" document-type=""> ग्लूकोज़</documentLink> की मात्रा बहुत ज़्यादा होगी तो इससे शरीर के अंगों को नुक्सान हो सकता है.

कठिन फैसला

लूसी की बीमारी का पता चलने पर बर्ट परिवार को ज़्यादा झटका इसलिए भी लगा क्योंकि जेसन के मुताबिक उनके परिवार की जीवनशैली हमेशा ही बेहद स्वस्थ रही है जिसमें होम्योपैथी और घर पर ही बच्चों की पढ़ाई शामिल हैं.

जेसन और क्लेयर के दो और बच्चे हैं-12 साल के जैक और 18 साल की ऐमा.

डॉक्टरों का कहना था कि लूसी को अपने ग्लूकोज़ स्तर की नियमित जांच करनी चाहिए और इंसुलिन के इंजेक्शन लगाने चाहिए और इसके साथ वो नियमित, संतुलित भोजन जारी रख सकती है.

लेकिन जेसन और उनकी पत्नी ने फ़ैसला किया कि उन्हें और उनके तीनो बच्चों को चीनी छोड़ देनी चाहिए.

मीठे व्यजंन
इमेज कैप्शन, क्या पूरे परिवार के लिए बिना चीनी का भोजन करना मुमकिन है?

जेसन कहते हैं कि ये लूसी के साथ एकता की भावना थी.

वे कहते हैं, "ये एकता की बात थी. साफ़ था कि जिस तरह का भोजन लूसी के लिए सबसे सही था, वही भोजन कर, हम सब उसका साथ दे रहे थे."

इसलिए बर्ट परिवार ने डॉक्टर की सलाह न मानने का फ़ैसला किया और तब से उनका आहार कम कार्बोहाइड्रेट, ज़्यादा प्रोटीन, ज़्यादा वसा, बिना चीनी और खूब सारी सब्ज़ियों से भरपूर होता है.

फ़ायदे

शुरुआत में बर्ट परिवार के लिए ये करना बहुत मुश्किल और असहज था लेकिन अब वे सब पहले से ज़्यादा स्वस्थ महसूस करते हैं, चीज़ों पर ज़्यादा ध्यान दे पाते हैं, पहले से कम खाते हैं और भोजन पर उनका खर्च भी कम हो गया है.

इतना ही नहीं, लूसी बर्ट की डायबीटीज़ अब नियंत्रण में है.

हालांकि उन्हें अब भी थोड़ी बहुत इंसुलिन लेने पड़ती है लेकिन स्थिति ज़्यादातर स्थिर है.

कुल मिलाकर पूरे परिवार का लगभग 54 किलो वज़न कम हुआ है. इसमें से जेसन और क्लेयर का 19-19 किलो वज़न कम हुआ.

क्लेयर और जेसन बर्ट
इमेज कैप्शन, क्लेयर और जेसन बर्ट की अपनी बेकरी है.

उनका रक्तचाप उतना ही है लेकिन उन्होंने तब से कॉलेस्ट्रॉल जांच नहीं करवाई है.

शक्कर नहीं खाने का फैसला लेने में बर्ट परिवार को एक और दिक्कत भी थी.

और वो ये कि उनकी फ़ार्महाउस कुकरी नाम की बेकरी है जहां हर हफ्ते 2500 से 3000 केक बनते हैं.

क्लेयर बर्ट कहती हैं कि उन्हें अपने जीवन के दो बिल्कुल अलग-अलग पहलुओं में संतुलन बिठाने में दिक्कत आई.

वे कहती हैं, "जब लूसी की बीमारी का पता चला था तो मुझे लगा कि हमारे घर के माहौल और काम में तालमेल नहीं है और इसकी वजह से मुझे बहुत परेशानी हुई. लेकिन फिर मैंने एक दोस्त से बात की जिसने मुझे याद दिलाया कि लोग इस वजह से केक खाना नहीं छोड़ देंगे क्योंकि लूसी को डायबीटीज़ है.

जेसन भी कहते हैं, "शुरुआत में अपना काम मुझे ठीक नहीं लगा लेकिन हमें पैसा तो कमाना ही था. हो सकता है कि भविष्य में हम बिना शक्कर वाले उत्पाद भी बनाने के बारे में सोचें. लेकिन फ़िलहाल तो यही सच है कि हमें अपना कारोबार चलाना है."

संतुलन ज़रूरी

लेकिन किसी भी बढ़िया रसोइए के लिए अपने बनाए खाने को चखना ज़रूरी होता है. ऐसे में जेसन और क्लेयर क्या करते हैं?

क्लेयर कहती हैं, "हमारे केक चखने वाले लोगों की कमी नहीं है. और अगर बिल्कुल ही ज़रूरी हुआ तो हम ख़ुद भी अपने केक का बेहद छोटा टुकड़ा चख लेंगे."

जेसन मानते हैं कि मोटापे के लिए चीनी की जगह वसा को ज़िम्मेदार बताने की सरकारी नीति सही नहीं है.

उनके मुताबिक बड़ी कंपनियों का अपने उत्पादों में कम वसा होने के विज्ञापन भी ग्राहकों को गुमराह करते हैं क्योंकि इन उत्पादों में चीनी की मात्रा बहुत ज़्यादा हो सकती है.

वहीं क्लेयर मानती हैं कि पूरी तरह बिना शक्कर का भोजन अपनाना आसान नहीं है और वो आहार में चीनी की मात्रा को संतुलित करने की सलाह देती हैं.

वे कहती हैं, "मेरे बचपन में हम हर रोज़ केक नहीं खाते थे. लेकिन आज की पीढ़ी के लिए मामला बिल्कुल अलग है. उनके लिए केक, बिस्कुट या कुछ और मीठा व्यंजन खाना हर रोज़ की बात है. और ये बहुत ज़्यादा हो गया है. लेकिन अगर यही संतुलित मात्रा में खाया जाए तो इसमें कोई बुराई नहीं होगी."

<bold>(<link type="page"><caption> बीबीसी हिन्दी</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर <documentLink href="" document-type=""> फ़ॉलो</documentLink> भी कर सकते हैं.)</bold>