अफ़ग़ानिस्तान में बिना आरोप के 'हिरासत में संदिग्ध'

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद स्थित कैंप बेस्टियन में बिना आरोप के रखे गए क़रीब 90 संदिग्ध अफगान विद्रोहियों को छोड़ दिया जाएगा.
ये क़दम ऐसे समय उठाया गया है, जब बीबीसी को कैंप बेस्टियन में बिना आरोप के हिरासत में रखे गए अफ़ग़ान विद्रोहियों के बारे में विस्तार से जानकारी देने वाले दस्तावेज़ दिखाए गए.
हिरासत में रखे गए लोगों में से आठ के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रही टीम ने कहा था इन लोगों को बिना किसी आरोप के 14 महीने तक हिरासत में रखा गया. इनके वकीलों ने इसे ग़ैर क़ानूनी बताया था.
रक्षा मंत्री फिलिप हैमंड ने बीबीसी को बताया था कि इन लोगों की रिहाई से ब्रितानी सेना को खतरा हो सकता है. लेकिन बाद में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने हिरासत में रखे गए लोगों की रिहाई का एक सुरक्षित तरीका ढूढ़ लिया है.
ये ख़बर आने के बाद ब्रितानी सरकार ने इस बात को माना कि उसने 80 से ज्यादा संदिग्ध अफगान विद्रोहियों को बिना किसी आरोप के हिरासत में रखा है.
उस समय ब्रिटेन के रक्षा मंत्री फिलिप हैमंड ने कहा था कि इन लोगों को हिरासत में रखा जाना अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र के नियम के अंतर्गत आता है.
हिरासत
अफगानिस्तान में ब्रितानी सैनिक संदिग्धों को 96 घंटों के लिए हिरासत में ले सकते हैं.
हालांकि कुछ 'खास परिस्थितियों' में 'खुफ़िया जानकारी हासिल करने के लिए' वे उन्हें ज्यादा समय के लिए हिरासत में रख सकते हैं.
हिरासत में लिए गए लोगों में से आठ के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे वकील का कहना है कि उनके मुवक्किल को ब्रितानी सैनिको ने हेलमंद और कंधार प्रांत के गांवों में मारे गए छापे के दौरान गिरफ्तार किया था.
उन्होंने दावा किया कि इन्हें बिना किसी आरोप के आठ से 14 महीनों तक हिरासत में रखा गया है.
लेकिन रक्षा मंत्री ने इन दावों का खंडन किया है कि अफगानिस्तान में ब्रिटेन किसी प्रकार का 'गुप्त ठिकाना' चला रहा है और उन्होंने इसे 'पूरी तरह से बेतुका' बताया है.
हैमंड ने बीबीसी के रेडियो 4 के कार्यक्रम में कहा कि सरकार ने संसद को इस बारे में सूचित कर दिया है.
हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि इन लोगों को कितने समय के लिए हिरासत में लिया गया था और न ही सही संख्या के बारे में भी बताया जा सकता है.
अवैध और अमानवीय

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय में प्रवक्ता जनरल ज़हीर अज़ीमी ने इस तरह लोगो को हिरासत में लिए जाने को अवैध और अमानवीय बताया है.
उनका कहना था, ''इन कैदियों को अफगानिस्तान के प्रशासन को सौंपा जाना चाहिए. जब इन लोगों को हमें सौंप दिया जाएगा तो हम इनके खिलाफ़ अपने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ जो सहमति वाले क़ानून के तहत कार्रवाई करेंगे.''
हैमंड ने दिसंबर महीने में संसद को जानकारी दी थी कि ब्रितानी सेना ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में रखा है और ये लोग क़ानूनी कारणों से अफगानी प्रशासन को नहीं सौंपे जा सकते.
बीबीसी के क़ानूनी मामलों पर नजर रखने वाले संवाददाता क्लाइव कॉलमेन का कहना है कि सरकार इस मामले में मुश्किलों से घिरी हुई है.
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