महासेन बांग्लादेश से बर्मा की ओर बढ़ा

बांग्लादेश के दक्षिणी तट पर आए <link type="page"><caption> चक्रवाती तूफान महासेन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130516_cyclone_mahasen_bamgladesh_aa.shtml" platform="highweb"/></link> के चलते कम से कम 12 लोग अब तक मारे जा चुके हैं. लाखों लोग अपने घरों को छोड़कर जा पलायन कर चुके हैं.
अधिकारियों ने चक्रवाती तूफान महासेन की आशंका को देखते हुए तैयारियां की हैं लेकिन अब ये कमज़ोर पड़ गयाहै.
तूफान ने बृहस्पतिवार को पटुआखाली ज़िले में दस्तक दी, इस दौरान भारी बारिश होती रही और हवा की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा थी.
सूचनाओं के मुताबिक बर्मा की सीमा के दोनों ओर शिविरों में रहने वाले रोहिग्या मुसलमानों पर इसका सबसे बुरा असर हो सकता है.
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि महासेन के चलते बांग्लादेश, बर्मा और उत्तर पूर्व भारत के 82 लाख लोगों की <link type="page"><caption> ज़िंदगी ख़तरे</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130515_bangladesh_cyclone_va.shtml" platform="highweb"/></link> में है.
कई भारतीय राज्यों में भी तूफान पर अलर्ट जारी किया गया है और लोगों को खराब मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने को कहा गया है.
हांलाकि तूफान बंगाल की खाड़ी के ऊपर कमज़ोर पड़ गया है लेकिन इसके 24 घंटे के भीतर फैलने की आशंका है.
बांग्लादेश की सरकार का कहना है कि नौ लाख से ज्यादा लोगों को तटीय क्षेत्रों से हटाकर 3200 से अधिक चक्रवात राहत शिविर में पहुंचाया गया है.

चक्रवात के वहाँ पहुंचने से पहले ही अधिकारियों ने चेतावनी संदेश प्रसारित किया है. चिटगांव में मौजूद बीबीसी संवाददाता संजॉय मजूमदार का कहना हैं कि चटगांव में हवाई अड्डा, कॉक्स बाजार के साथ साथ चटगांव के बंदरगाह भी बंद कर दिया गया है.
तहस नहस
बांग्लादेश के मौसम विभाग का कहना है कि तट पर पहुंचने से पहले चक्रवात ने नौ घंटे में 175 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय की.
तूफान ने तटीय इलाकों में हजारों झोपड़ियों को नष्ट कर दिया और बाढ़ आ गई.
सभी स्कूलों, कॉलेजों और कुछ होटलों को चक्रवात आश्रय स्थल घोषित किया गया है.
संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय के मुताबिक तूफान कमज़ोर पड़ रहा है लेकिन फिर भी इसे बांग्लादेश, बर्मा और पूर्वोत्तर भारत के लोगों के लिए खतरा माना जा रहा है. पाँच साल पहले आए तूफान नरगिस में बर्मा में एक लाख से ज़्यादा लोग मारे गए थे.
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक असम, मिज़ोरम, मणिपुर, त्रिपुराऔर नागालैंड राज्यों में मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
बर्मा में भी ख़तरा

बर्मा भी इस तूफान की चपेट में आ सकता है और बड़ी संख्या में लोग इलाके खाली कर रहे हैं.
पहले से ही विस्थापित हज़ारों रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर खासतौर पर चिंता जताई जा रही है. इनमें बहुत से लोग अपने शिविरों को छोड़कर नहीं जाना चाहते और कह रहे हैं कि उन्हें स्थानीय अधिकारियों पर भरोसा नहीं है.
पिछले साल हुई जातीय हिंसा के बाद रोहिंग्या मुसलमानों को अपना घर छोड़ना पड़ा था.
बर्मा में मंगलवार को 50 रोहिंग्या मुसलमानों के डूब कर मर जाने की आशंका है. इन लोगों को नाव के ज़रिए सुरक्षित इलाके में ले जाया जा रहा था लेकिन नाव डूब गई.
बर्मा के राष्ट्रीय योजना विभाग के मंत्री टिन नियांग श्वेन ने कहा है कि एक लाख पचास हज़ार लोगों को ऊँचाई वाले इलाकों में ले जाया गया है. सरकार के मुताबिक इनमें रोहिंग्या भी शामिल हैं.
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