ढाका में तीन सौ मौतें, मजदूर सड़कों पर उतरे

बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के मजदूरों के लिए बेहतर दशाओं की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आँसू गैस और रबड़ की गोलियों की बौछार की है.
इससे पहले बुधवार को एक कपड़ा इमारत के ढह जाने के कारण कम से कम 300 लोग मारे जा चुके हैं.
प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने राजधानी ढाका और आसपास के इलाक़ों में गाड़ियाँ तोड़ीं और मकानों को जलाया.
उन्होंने इमारत में स्थित कपड़ा फैक्ट्री के मालिक को गिरफ्तार करने की मांग की, जिसने इमारत को असुरक्षित घोषित किये जाने के बावजूद अपने कर्मचारियों को काम पर लगे रहने के लिए कहा था.
अभी भी सैकड़ों लोगों के लापता होने की बात कही जा रही है. बचाव दल के कर्मचारी मलबे की खुदाई कर रहे हैं.
ढाका के पास स्थित राणा प्लाजा नाम की इस इमारत से गुरुवार के बाद से 40 से अधिक लोगों को बचाया गया है.
प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पूरे देश में पीड़ित लोगों के लिए विशेष प्रार्थना आयोजित करने की अपील की है.
गिरफ्तारी की माँग
दूसरी ओर क्रोधित प्रदर्शनकारी दूसरे दिन ढाका की सड़कों पर जमा रहे.
वे अधिकारियों से इमारत के मालिक को गिरफ्तार करने और कपड़ा मजदूरों के लिए दशाओं को बेहतर बनाने की माँग कर रहे हैं.
पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के लिए कम से कम 1,000 लोग जमा हुए और हालात को “अस्थिर” बताया.
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस और रबड़ की गोलियों का इस्तेमाल किया. इससे पहले भीड़ ने सड़क जाम की, बसों में आग लगा दी और कपड़ा फैक्टरियों पर हमला किया.
सजा का वादा
पुलिस के मुताबिक बिल्डिंग के मालिक ने इस सप्ताह इमारत में पड़ी दरार को लेकर मिली चेतावनी को नजरअंदाज किया.
बताया जा रहा है कि वह कहीं छिपा हुआ है, लेकिन शेख हसीना ने वादा किया है कि उसे सजा ज़रूर दी जायेगी.
राणा प्लाजा बुधवार को जब ढ़ही, उस समय उसमें करीब 2,000 लोग मौजूद थे.
सेना, बार्डर गार्ड्स और अग्निशमन दल के लोग बचे हुए लोगों की तलाश में मौके पर 24 घंटे काम कर रहे हैं.
बचाव अभियान
सेना के अधिकारी मेजर जनरल चौधरी हसन सुहरावर्दी ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि खोज और बचाव अभियान कम से कम शनिवार तक जारी रहेगा.
उन्होंने बताया कि, “हम जानते हैं कि ऐसे हालात में एक व्यक्ति 72 घंटों तक जीवित रह सकता है. इसलिए हमारी कोशिशें लगातार जारी रहेंगी.”
जिन जीवित लोगों को अभी तक खोजा जा चुका है, उनके लिए बचाव दल सुराख से पानी की बोतल और खाने का सामान डाल रहा है.
स्थानीय नियंत्रण केन्द्र ने बताया कि परिवारों ने अभी तक कुल 372 लोगों के गुमशुदा होने की सूचना दी है.
हालाँकि, खबरों के मुताबिक लापता होने वालों की संख्या इससे काफी अधिक है.
जीने की चाह
मलबे में फँसे एक व्यक्ति मोहम्मद अल्ताब, जो गुरुवार को पत्रकारों से बात करने में कामयाब रहा, ने कहा कि, “मैं जीना चाहता हूँ. यहाँ रहना काफी दर्दनाक है.”
अधिक गहराई में फँसे एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि, “यहाँ जिन्दा रहना काफी मुश्किल है. जीवित रहने के लिए ऐसा असहनीय दर्द सहने ते अच्छा मर जाना है.”
स्थानीय अस्पताल पूरी तरह से भरे हुए हैं और 1,000 से अधिक घायल लोग यहाँ आ चुके हैं.
बांग्लादेश दुनिया के सबसे बड़े कपड़ा उद्योगों में एक है और उसे अपने सस्ते श्रमिकों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़त हासिल है.
श्रमिकों को कम भुगतान और सीमित अधिकारों के कारण अक्सर उद्योग को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ता है.












