वो चाहती थी ओलंपिक के वक्त जहाज़ में ब्लास्ट

किम ह्यून-हुई निश्चित रूप से किसी व्यापक जनसंहार को अंजाम देने वाले नही लगती हैं. 51 साल की किम ह्यून-हुई दो बच्चों की माँ हैं. उनकी मुस्कान सौम्य है और बातचीत की शैली मधुर.
आज वो दक्षिण कोरिया में किसी जगह, तनहाई में जीवन बिता रही है, वो ये बताना नही चाहतीं कहाँ. जिस दिन मेरी मुलाकात उनसे हुई, हमेशा की तरह उन्होंने ढीला ढाला सूट पहन रखा था और उनके साथ कई लोग थे.
उन्हें लगता है कि उत्तर कोरियाई सरकार अब भी उनकी हत्या करानी चाहती है. किम ह्यून-हुई कभी उत्तर कोरिया की जासूस हुआ करती थी.
25 साल पहले की बात है जब उन्होंने उत्तर कोरिया के आदेश पर एक दक्षिण कोरियाई विमान को धमाके से उड़ा दिया था.
सोल के एक होटल के कमरे वो मुझे विस्तार से बताती हैं कि किस तरह सिर्फ 19 साल की उम्र में उन्हें उस समय भर्ती किया गया था, जब वो प्योंगयांग विश्वविद्यालय में जापानी भाषा की पढ़ाई कर रहीं थी.
उन्हें छह साल तक प्रशिक्षित किया गया. उन्हें युवा जापानी महिला येको तागुची के साथ रखा गया ताकी वो जापानी बोलना और उनकी तरह व्यवहार करना सीख सकें. येको तागुची का उत्तरी जापान में उनके घर से अपहरण किया गया था.
विमान में बम
इसके बाद उनका दुर्भाग्यपूर्ण मिशन आया.
साल 1987 में दक्षिण कोरिया, सोल में ओलंपिक खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा था और उत्तर कोरिया के नेता किम इल सुंग और उनके बेटे किम जोंग इल इसे हर हालत में रोकना चाहते थे.
किम ह्यून-हुई ने बताया, "मुझे एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सोल ओलंपिक से पहले हम एक दक्षिण कोरियाई विमान को गिरा देंगें."
उन्होंने कहा कि इससे दक्षिण कोरिया में अराजकता और भ्रम की स्थिति पैदा होगी और उसे गंभीर झटका लगेगा.
'सीधा आदेश'
किम और उनके एक पुराने साथी बगदाद में कोरियाई एयरलाइंस के विमान में सवार हो गए और उन्होंने विमान में यात्री सामान रखने की जगह में सूटकेस बम रख दिया.
सफर के दौरान बीच जब विमान अबू धाबी में कुछ देर के लिए उतरा, दोनों उत्तर कोरियाई एजेंट विमान से उतर गए.
उड़ान के कुछ घंटे बाद अंडमान सागर के ऊपर विमान में बम विस्फोट हुआ और उस पर सवार सभी 115 लोग मारे गए.
योजना विफल
लेकिन इसके बाद उनकी योजना विफल हो गई. इन दोनों एजेंटों को बहरीन में धर दबोचा गया.
किम ह्यून-हुई के साथी ने तो साइनाइड ज़हर से बुझी सिगरेट के साथ आत्महत्या कर ली, लेकिन वो ऐसा करने में विफल रहीं.
किम ह्यून-हुई को सोल ले जाए जाने की बजाय अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने पेश किया कर दिया गया.
किम ह्यून-हुई आगे कहती हैं, "जब मैं विमान की सीढ़ियों से नीचे उतरी तो मैं कुछ भी देख नही पा रही थी. मैं सिर्फ जमीन देख रही थी. मेरा मुँह टेप से बंद कर दिया गया था. मुझे लगा कि मैं शेर की मांद में प्रवेश कर रही हूँ. मुझे इस बात का यकीन था कि वो मुझे मारने के लिए ले जा रहे है."
लेकिन इसकी बजाय किम ह्यून-हुई को एक भूमिगत बंकर में ले जाया गया और पूछताछ शुरू कर दी गई. पहले तो किम ह्यून-हुई ने खुद को जापानी सिद्ध करने की कोशिश की लेकिन अंतत: वो टूट गई.
किम ह्यून-हुई कहती हैं, "मैंने ना चाहते हुए भी कबूल किया क्योंकि मैंने सोचा कि उत्तर कोरिया में मेरा परिवार खतरे में पड़ जाएगा. अपराध स्वीकार करने का फैसला एक बड़ा फैसला था क्योंकि मुझे ये लगने लगा था कि यह उनके लिए सही कदम होगा जो पीड़ित हैं. ये उनके लिए ठीक होगा जो सच्चाई समझने में सक्षम हो."
अपने कबूलनामे में किम ह्यून-हुई ने साफ कर दिया कि विमान को बम से उड़ाने के आदेश सीधे तौर पर किम-इल-सुंग या उनके बेटे व उत्तराधिकारी किम-जोंग-इल की ओर से आया था.
'भगवान सरीखा व्यक्तित्व'
"उत्तर कोरिया में सब कुछ किम-इल-सुंग और उनके बेटे किम-जोंग-इल के इर्द गिर्द ही घूमता था."
“उनकी मंजूरी के बिना कुछ भी नहीं हो सकता था. हमें बताया गया था कि इस आदेश की 'पुष्टि' हो चुकी है. आदेश ऊपर से आया था, उन्होंने सिर्फ उस एक शब्द 'पुष्टि' का प्रयोग किया."
"उत्तर कोरिया में किम-इल-सुंग का व्यक्तित्व देवता सरीखा रहा है. उनका कोई भी आदेश जायज ठहराया जा सकता है, उनका किसी भी आदेश का पालन चरम निष्ठा के साथ किया जाता था. उनके एक आदेश पर आप अपना जीवन बलिदान करने को तैयार थे."
किम ह्यून-हुई ने मुझे बताया, "उत्तर कोरिया के जैसा दूसरा कोई देश नहीं है, पूरा देश शाही किम परिवार के प्रति वफादारी दिखाने के लिए बना है. वहाँ ये एक धर्म की तरह है. यहाँ कोई मानव अधिकार, कोई आज़ादी नहीं हैं."
किम ह्यून-हुई कहती हैं, “ आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ तो दुखी हो जाती हूँ, ये सोचकर कि क्यों मैं उत्तर कोरिया में पैदा हुई, देखो उन्होंने मेरे लिए क्या किया है?"
राजवंश के संस्थापक किम-इल-सुंग और किम-जोंग-इल की अब मौत हो चुकी है और देश की कमान 30 वर्षीय <link type="page"><caption> किम-जोंग-उन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/rolling_news/2012/07/120718_north_korea_rn.shtml" platform="highweb"/></link> के हाथों में सौंप दी गई है.
"उत्तर कोरिया एक <link type="page"><caption> निराशाजनक स्थिति</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/04/130405_north_korea_gallery_dp.shtml" platform="highweb"/></link> में है, किम-जोंग-उन के प्रति असंतोष बहुत अधिक है, लेकिन उस पर पर्दा डाल दिया गया है.”
" उनके पास सिर्फ एक ही चीज़ <link type="page"><caption> परमाणु हथियार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130410_southkorea_survellance_ra.shtml" platform="highweb"/></link> है. इसलिए लोगों का भरोसा जीतने के लिए उन्होंने युद्ध की इस भावना पैदा कर दी है, वो अपने परमाणु हथियारों का फायदा उठा रहे है."
1989 में एक दक्षिण कोरियाई अदालत ने किम ह्यून-हुई को मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन राष्ट्रपति रो ताए वू ने उन्हें क्षमादान दे दिया.
अपराध बोध
बाद में किम ह्यून-हुई ने दक्षिण कोरियाई खुफिया अधिकारी से शादी कर ली. आज उनके दो बच्चे हैं.
इतना वक्त बीत जाने के बाद आज भी किम ह्यून-हुई उस भारी अपराध बोध से ग्रस्त हैं, जो उन्होंने किया.
किम ह्यून-हुई कहती हैं कि उन्हें ईसाई धर्म में शांति मिलती है और उन्हें विमान धमाके में मारे गए लोगों के परिजन भी माफ़ कर रहे है.
"जब भी मैंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की है, तो हमारे गले रुंधे और आंखों में थे."
हमारी लगभग घंटे भर तक चली बैठक के दौरान सिर्फ एक पल ऐसा आया जब किम ह्यून-हुई बेहद भावुक हो गईं.
अंत में जब मैंने उनसे उत्तर कोरिया में उनके परिवार के बारे में पूछा तो उनकी आँखें भर आईं और उन्होंने सिर हिलाते हुए जवाब दिया कि उन्हें नहीं पता, "मैंने सुना है कि उन्हें प्योंगयांग से दूर एक श्रम शिविर में ले जाए जाते हुए देखा गया था."












